Thursday, July 17, 2008

परमाणु करार पर राजनीतिज्ञों की रस्‍साकशी

अजब व गजब मूल्‍क है हिंदुस्‍तान. यह कब किस बात को लेकर राजनीतिज्ञों के विचार बदल जाते है,इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. अब लीजिए, परमाणु करार को मुददा बनाकर, केंद्र की सरकार के माथे पर बल वामपंथियों ने डाल दिया है. भाई मेरे सत्‍ता के समर्थन व समर्थन वापसी से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है देश. भारत भूमि पर बिजली की उपलब्‍धता हो, चहुंओर जगमग रोशनी हो, लोगों के रोजी रोजगार में विद्यूत उर्जा का उपयोग हो, ये भला देश का कौन ऐसा नागरिक नहीं चाहेगा. हां,इसको लेकर राजनीति की दूकान चमकानी हो, तो भला और बात है. वामपंथियों को यह कहना बिल्‍कुल ही जायज है कि आखिर इस करार के प्रति देश की प्रतिष्‍ठा को कहीं पश्चिम के हाथों गिरवी तो नहीं रखी जा रही है. इसे स्‍पष्‍ट करना केंद्र सरकार का काम है. केंद्र सरकार है कि करार के पूर्व न तो कुछ प्रदर्शित करना चाहती है न छिपाना ही चाहती है. इस प्रकार के दोरंगी नीति से आम आदमी को क्‍या लेना देना. आखिर देश के प्रत्‍येक नागरिक को यह जानने का अधिकार है कि यह करार आखिर क्‍या बला है, जिसकों लेकर इतनी हलचल मची हुई है. आम आदमी के पल्‍ले सिर्फ यह बात आ रही है कि केंद्र की सरकार को बचाने के लिए हाय तौबा मची हुई है. पुरा देश महंगाई की पीडा झेल रहा है. भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी हो या अन्‍य पार्टियां, सब अपने अपने सांसदों को एकजुट करने में लगी है. सांसदों की खरीद फरोख्त हो रही है. कोई 25 करोड की बोली लगा रहा है तो कोई उससे कम पर बिकने के लिए तैयार नहीं है. कोई संसद का सभापति बने रहना चाह रहा है तो कोई उन्‍हें नैतिकता का पाठ पढा रहा है. असंसदीय व असभ्‍य भाषाएं राजनेताओं के सिर चढ कर बोल रही है. अब तो यह भी खबर आ रही है कि दिल्‍ली से आये किस अज्ञात फोन कॉल के संदेश प्राप्‍त करने के बाद उज्‍जैन स्थित तांत्रिक जप व हवन में लग गये है ताकि सरकार को बचाया जा सके. बंद करें यह सब बकवास. केंद्र हो राज्‍य सरकारे कहीं कोई राजनीतिक शुचिता है ही नहीं. दिल्‍ली जब ऐसी होगी तो लखनउ,पटना,मुंबई, भोपाल इत्‍यादि राज्‍यों की राजधानी में क्‍या प्रभाव पडेगा. हमें थोडा ठहर कर विचार करना चाहिये, क्‍या इसी तरह एक विकसित भारत का निर्माण हम कर पायेंगे, क्‍या हम भावी पीढी को इसी तरह का भारत सौंपगें.

4 comments:

Anonymous said...

Dear Sir,
Please find my CV enclosed herewith for a detailed perusal. I have
worked in primary education with CARE-India, I have worked with ICT
projects for the women for the Microsoft Unlimited Potential project
with World Lnks where i was National Coordinator, have worked for

elemenatry education projects for the street and working children and
the slum children for an MSDF funded project with Butterflies. At
present I am working with India Sponsor Foundation as Director,
primarily responsible for elementry education projects which is funded
by india corporate donors. I have also helped two of the organisations
establish thier offices and partnership with Govt . during my career.
I am sending you my CV as we had your email ID in our databank. If you
do not have any position at your office, I would request you to
forward my CV to the concerned deaprtment or any other organisation.

Awaiting a favourable response.
Thanks and warm regards
Vineeta Sinha
9350030418



--
________________________________
Vineeta Sinha,
M:09350030418
vismayavi@gmail.com

jjj said...

http://patiye.blogspot.com/

दोस्‍ती प्रस्‍ताव said...

वास्‍तव में हिंदी पत्र्कारिता को आप जैसे लोगों की ही जरूरत है, जो सधी हुइ भाषा में सच्‍ची बात करते हैं। आपसे ि‍मत्रता मेंरे ि‍लए सुखद होगी।

Mariinsky Ballet said...

Respected sir,
we have seen your commrnt on bigaada,a vetran indian fim icon's blog.

we are creating a decoument on litrature based film of India,Pakistan, Bangladesh, nepal and other south Asian country- we want some like minded felow, who could help us. will you sugest any name for that? or, youself can countribute in this, it will be our pleasure.