Sunday, December 21, 2008

युद्ध या कूटनीति

देश आज किन भूल-भूलियो में भटक रहा है यह तो नियंता ही जाने यह स्पस्ट है कि आतंक से मुकाबला करने कि लिए युद्ध या कूटनीति में से तत्काल एक को चुनना होगा. युध का रास्ता अपनाने कि पहले हमे अपनी कूटनीति की ओर देखना होगा.यह हमें भटकाने वाला नही होगा बल्कि ठीक निशाने को भेदने में सहायक होगा. भारत में चन्द्रगुप्त मौर की विजय पताका लहराने वाला मगध साम्राज्य का इतिहास इसका गवाह है की कैसे युद्ध लड़ी जाती है.कैसे अपने देश कि एकता की बदौलत दुश्मन को परस्त किया जाता है. एक अदना सा दिखने वाला गुरु चाणक्य ने बालक चन्द्रगुप्त को देश का सम्राट बना दिया.टुकडो में बिखरे भूखंड को गुलसन बना दिया.इंदिरा जी ने पाकिस्तान से युद्ध करने कि पूर्व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भावनाओ से अवगत कराया था. पाकिस्तान ने माना तो ठीक ,नहीं तो उसे दुरुशत कर दिया.पाकिस्तानी कट्टर पंथियों ने सबसे अधिक अत्याचार सिंधियों पर कर रखा है. उसे मुक्ति दिलाना जरुरी है.

1 comment:

varun jaiswal said...

फिलहाल कूटनीति ही आक्रामक विकल्प है |