<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155</id><updated>2012-01-15T10:16:23.093+05:30</updated><category term='पत्रकारिता'/><category term='सामयिक'/><category term='टिप्‍पणी'/><category term='त्‍वरित टिप्‍पणी'/><category term='तात्कालिक'/><category term='राजनीति'/><category term='चना चबेना'/><category term='सामयिकी'/><category term='समसामयिक'/><category term='त्वरित टिपण्णी'/><category term='समकालीन मुद्दे'/><category term='अन्ना की सुनो'/><category term='यू ही बतकही'/><category term='विचार बिन्दु'/><category term='दीपावली विशेष'/><category term='चिंताएं'/><category term='तत्‍कालिक'/><category term='सम सामयिक'/><category term='चिंतन'/><category term='विश्‍लेषण'/><category term='दुर्गापूजा'/><category term='साहित्‍य'/><category term='चर्चा में विकास'/><category term='चुनाव'/><title type='text'>बलि‍दानी पत्रकार</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>111</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-640107733182898708</id><published>2012-01-02T13:26:00.003+05:30</published><updated>2012-01-02T14:22:11.246+05:30</updated><title type='text'>नववर्ष का आगमन, नई उर्जा का संचार</title><content type='html'>नई उर्जा, नई चेतना, हर चीज में नयापन, दृष्टी नई , सोच नई, नया कुछ करने का संकल्प । नए वर्ष का शुभ आगमन। भारत भूमि की उर्वरता बढे , अन्न हमारी रगों में नई जोश और उमंग का संचार करे। जल अपने सा निर्मल बनने की प्रेरणा दे, वायु जीवन को गतिशील बनाए, उर्जावान बनाए। छितिज की ओर दृष्टी हो, जो कभी न मिलकर भी अपनी सम्पूर्णता का अहसास कराए। आकाश ईश्वर की कृपा हम सबो के प्रति बनाए रखे। अग्नि तो स्वयं देव हैं, वे हमारे कष्टों का निवारण कर कुंदन सी आभा प्रदान करे। जब हम नए का सृजन करते हैं तो पहला अन्न ईश्वर को समर्पित करते हैं, भारत भूमि की मिटटी में इस संस्कृति का विस्तार हुआ हैं। हम सब उसी परम पिता की संतान हैं जिसने हमें जन्म दिया हैं , जीवन बक्शी हैं। क्षमा हमारा धर्म हैं, परोपकार करना हमारा कर्तब्य हैं । अंग्रेजी कैलेंडर किसी नई बात का सृजन नहीं करता, वह धान की कटनी के बाद आयोजित होने वाला हर्षौल्लास का वक्त नहीं हैं , फिर भी हम तनाव से इतने भरे हैं कि ख़ुशी का एक पल इसमें ढूढ़ लेते हैं। उत्सव के बिना जीवन एकाकी हो जाता हैं, यही कारण हैं कि हम किसी के विदा लेने पर दुखी हो जाते हैं तो किसी के मिलने पर खुशी का अनुभव करते हैं । जीवन में पल प्रति पल छुट रहे को हम नहीं अनुभव कर रहे, वर्ष में एक दिन संकल्प का ढूंढते, यह दिन हमारे लिए महत्वपूर्ण हो जाता हैं। हम पल प्रति पल को महत्वपूर्ण बनाए तो कितना सुन्दर हो । आइये, हम अपनी सकारात्मक उर्जा को राष्ट्र सेवा में लगाये। भ्रष्टाचार का खात्मा करे , शांति स्थापित करे&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-640107733182898708?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/640107733182898708/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=640107733182898708&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/640107733182898708'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/640107733182898708'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2012/01/blog-post.html' title='नववर्ष का आगमन, नई उर्जा का संचार'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4693324352036680247</id><published>2011-12-20T13:09:00.003+05:30</published><updated>2011-12-20T13:39:51.789+05:30</updated><title type='text'>भिखारी के गांव में अनगढ़ कला का सौन्दर्य बोध</title><content type='html'>" जा उधो अतने सुधि काहीह, तनिको सहत नइखे पीर,कहत भिखारी बिहारी न आइले, फूटी गईले तक़दीर " गीत की प्रस्तुति और लाल जैकेट में लोक मंच पर विदेशिया की भूमिका में उतरे ८० वर्षीय गोपाल जी, बटोही शिवलाल व् प्यारी सुन्दरी बने लखन मांझी ने जब समा बंधा तो शामियाना में ठिठुरते दर्शको के बीच उत्साह का संचार हो गया , तालियों की गूंज उनकी गर्म जोशी को व्यक्त करने लगी। इसके पूर्व " लव कुश के सामने सब के टूटल अभिमान- भगवान भगवान के बोल पर झाल व तबले की थाप लगी तो मुबई फिल्म इंडस्ट्री के नामचीन कलाकार भी अपने को रोक न सके । सबके पैरो और उंगलियों की थिरकन सी आ गयी। मौका था लोक चेतना के महान विभूति भिखारी ठाकुर की १२४ वी जयंती पर उनके गांव कुतुबपुर में सांस्कृतिक महोत्सव का। मिटटी की खुशबु, भोजपुरी की खनकव् लोक कलाकारों का भिल्हारी ठाकुर के प्रति अनन्य श्रधा की बानगी देखते ही बन रही थी। कुतुबपुर में अनगढ़ कला का अनुपम सौन्दर्य बोध हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। पटना मुंबई की चमक दमक से दूर दियारा छेत्र में गांव गवई के बीच स्थानीय भाषा में उठी यह सांस्कृतिक गूंज विरासत के प्रति अनन्य आस्था को अभिव्यक्त कर रही थी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4693324352036680247?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4693324352036680247/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4693324352036680247&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4693324352036680247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4693324352036680247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/12/blog-post.html' title='भिखारी के गांव में अनगढ़ कला का सौन्दर्य बोध'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' 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तरह लोकतंत्र को हाक सकता हैं। देश पहले ही १९४७ में एक बड़े बटवारे का दंश झेल चूका हैं। इसके बाद भी राज्यों का पुनर्गठन किया गया हैं। क्या सभी विभाजित राज्यों के विकास अथवा पिछड़ेपन को ले कर कोई स्वतंत्र अध्ययन हुई हैं। विभाजन के अतिरिक्त क्या कोई अन्य उपाय नहीं हैं । आज झारखण्ड, छतीसगढ़ व् उतरांचल के विकास की रूपरेखा क्या संतोषप्रद हैं। सिर्फ राजनितिक स्वार्थ के लोभ से सब कुछ बाट देना कहा तक उचित हैं। राजनीतिक लोगो से भी गुजारिश हैं , बंद करे यह बटवारे की राजनीति। एक गाना यद् आता हैं - इस दिल के टुकड़े हजार हुए कुछ यहाँ गिरा कुछ वहा गिरा। कभी तो एकता, विकास और मुल्क की तरक्की की बाते करे। आजादी के ६० सालो बाद भी हम कहा हैं , इस देश में महात्मा गाँधी की सोच और सपनो का भारत कहा हैं , इसे ढूंढे। आधुनिकता की अंधी दौड़ में देश को रसातल में न ले जाये। अमीरी और गरीबी की बढती खाई आज १०० गुनी चौड़ी हो गयी हैं। इसे पाटने का प्रयास करे&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-9000045049209662863</id><published>2011-10-21T16:17:00.003+05:30</published><updated>2011-10-22T00:28:45.529+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='दीपावली विशेष'/><title type='text'>महलो से छन कर रौशनी झोपड़ो तक पहुचे</title><content type='html'>सावधान हो जाये, दीपावली में एक बार फिर मिलावटी खाद्य पदार्थो की बिक्री चरम पर हैं। बिहार व् उत्तर प्रदेश में पुलिसे की हो रही लगातार छापेमारी से मिलावटी वस्तुओ की बरामदगी जारी हैं। अब तो हर आदमी कोई टेस्ट पेपर ले कर नहीं घूम रहा, दूसरी ओर बाजार उनकी सेहत और पैसे पर नजर गडाए हुआ हैं। अब तो हमारे पर्व त्यौहार भी मिलावट करने वालो के लिए एक अवसर में तब्दील हो चूका हैं । कौन इन पर निगरानी रखे जब मुहल्ले के छोटे छोटे दुकानों से लेकर बड़ी दुकानों तक में ये रोग फैल गया हो। आये , हम अपनी सेहत और श्रद्धा का खुद ख्याल रखे । दीपावली के दिन बच्चे, बड़े स्त्री व् पुरुष सभी मुह मीठा करते हैं, अगर मिठाई नकली हो तो जायका तो बिगड़ेगा ही साथ ही डाक्टर की शरण में जाना पड़ सकता हैं। आजकल बड़े बड़े बिजनेस फार्म अपने शुभचिंतको को विशेष कर सरकारी महकमो में कम करने वालो को मिठाई गिफ्ट करते हैं । यह एक नए किस्म का भ्रष्टाचार हैं। इससे हम अपने बच्चो को कौन सी खुशिया दे देंगे पता नहीं। अव्वल इन मिठाइयो के आर्डर व पैकिंग कई दिनों पूर्व से होने लगती हैं , इसे में इन्हें खा कर धोखा भी हो सकता हैं । हमें अपने घरो में दिए जलाने के साथ यह भी ध्यान रखना चाहिए की आजाद भारत में अब भी कई ऐसे घर हैं जहा सालोभर रौशनी नहीं होती क्या इन घरो को रौशन करना हमारा दायित्व नहीं हैं । देवी लछमी क्या उधर भी देखेंगी। ५४० टन सोना भारत में बिक्री के लिए आयात किया गया हैं, सोने की मांग भारत में प्रति वर्ष बढ़ रही हैं, क्या इन गरीबो की झोपडी में भी सोना बरसेगा। लाखो भारतीय आज भी स्वच्छ पेयजल, शौचालय को तरसते हैं , खाने को दोनों वक्त भोजन नसीब नहीं होता...क्या उन तक जरुरत की चीजे उपलब्ध कराइ जा सकती हैं। आप कहेंगे कौन इतना सोचता हैं, लेकिन यह जान ले की इन समस्याओ से मुह मोड़ कर हम अपने पैरो पर कुलाढ़ी मार रहे हैं , टैक्स में बढ़ोतरी, महंगाई की चरम सीमा, महंगी होती सुबिधाये एक दिन अपने साथ साथ सब को डुबोने में कामयाब होगी, जिस पश्छिम की नक़ल में हम बेतहासा भाग रहे हैं वो उसी तरह बर्बाद करेगी जिस तरह आज उन मुल्को में दिखाई पड़ रहा हैं। आइये इस बार दीपावली में कुछ ऐसा करे कि महलो से छन कर रोशनी कि कुछ छटा झोपड़ो पर भी पड़े , ताकि उनके घर आँगन में भी देवी कि कृपा हो और हम सब भारतवासियों का जीवन खुशहाल हो। देवी लछमी की सवारी हर घर तक पहुचे। मिल्लत और खुशियों से अपना चमन गुलजार रहे । आप सोना ख़रीदे तो गरीब के पास एक थाली तो हो जिसमे वो भरपेट खा सके, उसमे कोई छेड़ न हो सके।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-9000045049209662863?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/9000045049209662863/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=9000045049209662863&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9000045049209662863'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9000045049209662863'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='महलो से छन कर रौशनी झोपड़ो तक पहुचे'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1962480148065681476</id><published>2011-09-28T12:35:00.002+05:30</published><updated>2011-09-28T13:17:01.145+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='दुर्गापूजा'/><title type='text'>नवरात्र का शुभारम्भ, बुराइयों का हो सर्वनास</title><content type='html'>आज से अश्विन मास की नवरात्र का शुभारम्भ हो गया। माँ दुर्गा सब की मनोकामना पूर्ण करे, बुराइयों का सर्वनास हो। माँ की आराधना के अवसर पर हम २ जी घोटाला, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाला, शहीदों के नाम पर बनने वाले आदर्श सोसायटी में घोटाला इत्यादि से मुक्ति का संकल्प ले। भारत माता के मान-सम्मान और मर्यादा को ह्रदय में स्थान देते हुए , राष्ट्र प्रेम का अलख जगाये। मशहुर उक्ति हैं कि कफन में जेब नहीं होती, फिर यह धन लिप्सा आखिर क्यों, दुसरो के अमन चैन को लुट कर एसी में साउंड स्लिप का प्रयास क्यों । अपने पूर्वजो को याद करे, कैसे अंग्रेजी दस्ता के बीच आनंद मठ के रचयिता बकिम चन्द्र चटर्जी ने जननी जन्मभूमि की वंदना माँ भवानी के रूप में की हैं। इस मिथ्या जगत में निवास करते हुए क्या जन्मभूमि के प्रति कृतज्ञता ब्यक्त नहीं की जा सकती। जिस भूमि ने पीने को जल दिया, खाने को फल फूल दिए, जिसकी आगोश में विश्राम किये, जिसने छाती भर श्वास लेने को शुद्ध वायु प्रदान किये , क्या हम इतने कृत्घन हैं, उसे अपना प्यार व स्नेह भी नहीं दे सकते, उसे प्रदुषित करते रहे , उसकी चिंता करने की जगह, उसकी संपदा का सार्वजनिक उपयोग करने की जगह हम लुट खसोट में जुटे हैं , जेल जाने को शान समझ बैठे हैं। बाजार की हवा ने सब कुछ बिकाऊ बना दिया हैं। माँ दुर्गा हम सब को सदबुधि दे, स्त्रियों का सम्मान हो, स्त्रिया अपनी मर्यादा का उल्लंघन न करे। बच्चे अनुशासित व संस्कार युक्त बने। सिर्फ नुकसान के भय से पूजा या आराधना करना अपने आप को संतुष्ट करने का थोथा प्रयास हैं । आये हम सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय की मंगल कामना से पूजनोत्सव में शामिल हो.........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1962480148065681476?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1962480148065681476/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1962480148065681476&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1962480148065681476'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1962480148065681476'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='नवरात्र का शुभारम्भ, बुराइयों का हो सर्वनास'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3944017537644293564</id><published>2011-08-23T12:17:00.002+05:30</published><updated>2011-08-23T13:08:37.079+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अन्ना की सुनो'/><title type='text'>केंद्र की हठधर्मिता और देश में तूफान का आगाज</title><content type='html'>अन्ना हजारे के सत्याग्रह को लेकर भ्रष्टाचार के विरुद्ध राष्ट्र व्यापी माहौल बना हैं । यह एक दिन की पीड़ा नहीं , आजादी के बाद से गरीबी की चक्की में पिसते लोगो की भ्रष्टाचार ने कमर तोड़ दी हैं। टूटे हुए लोगो की पीड़ा से अन्ना की पीड़ा जा कर जुड़ गयी हैं। महंगाई, भ्रष्टाचार, सामाजिक भेदभाव, पूंजी का केन्द्रीकरण , राष्ट्रीयता की भावना का लोप कई ऐसी समस्याए हैं जो व्यक्ति के विकास में बाधक बने हुए हैं। भारत के राष्ट्रीय चरित्र में जिस प्रकार की गिरावट आई हैं वो शर्मशार करने वाला हैं। संसद की सर्वोचता को लेकर बेबजह बहस चलायी जा रही हैं। क्या इस देश में आम नागरिक या ग्राम पंचायतो की सर्वोचता को लेकर कभी विचार किया हैं। क्या हमारे लिए हमेशा बेघर, भूखे ,निहंग लोगो की आवयश्कता गैर जरुरी रहेगी। इस देश में लुट का खेल चलता रहे और लोग देखते रहे ऐसा कबतक चलेगा। अन्ना कोई नई या अनोखी बात नहीं कर रहे हैं वो तो सिर्फ निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आइना दिख रहे हैं । वे संसद में क्या करते हैं , उन्हें क्या करना चाहिए । क्या कोर्ट या जन दबाब के बाद ही सरकारे जगती रहेंगी । उनकी अपनी कोई जिम्मेवारी नहीं हैं । विरोधी दल के बाते राजनीतिसे प्रेरित मन ली जाती हैं । सत्ता सञ्चालन में विरोधी दल की भी प्रमुख भागीदारी होती हैं। आम आदमी भी गजट के प्रकाशन से सीधा सम्बन्ध रखता हैं । नहीं तो फिर जनता की राय लेने गजट के प्रकाशन का आखिर क्या मकसद हैं । मिडिया जो आज अन्ना के साथ चिल्ला रही हैं उसे भी अपनी गिरेबान में झाकना होगा। मंत्री जेल जाये और २ जी में शामिल मिडिया की हस्ती बाहर रहे ऐसा नहीं हो सकता। भ्रष्ट आचरण हमेशा निंदनीय हैं । सिर्फ फैशन के लिए सत्याग्रही होना और बात हैं । महात्मा गाँधी के समय भी जेलों में जा कर फाकते उड़ना और बरसाती मेढको की भाती सत्याग्रही बन जाने की बाते प्रमुखता से होती थी लेकिन सत्य की एक दिन जीत हुई लोगो के ह्रदय में महत्मा का जादू सर चढ़ कर बोला ...मोहन दास करमचंद गाँधी एक मिथक बन गये । अन्ना तो बस उनके अनुयायी हैं उनकी ताकत कई गुना बढ़ कर आम जन जीवन को प्रभावित कर रही हैं ऐसे में भला सरकार कैसे अप्रभावित रह सकेगी। भारत के लोग आशावादी होते हैं , वे जब जग गए तो फिर उन्हें सोने के लिए कहना शेर को छेड़ने के समान हैं ... &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3944017537644293564?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3944017537644293564/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3944017537644293564&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3944017537644293564'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3944017537644293564'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/08/blog-post_23.html' title='केंद्र की हठधर्मिता और देश में तूफान का आगाज'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8525477778173117095</id><published>2011-08-18T12:15:00.004+05:30</published><updated>2011-08-18T13:10:51.550+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तात्कालिक'/><title type='text'>अन्ना के सत्याग्रह से केंद्र की फजीहत</title><content type='html'>भ्रस्टाचार के विरोध में अन्ना के उठ खड़े होने के बाद केंद्र सरकार की फजीहत हो रही हैं। यह इतना संवेदनशील मसला हैं जिससे हर आम नागरिक परेशान हैं, मैंने खास की बात नहीं कर रहा क्योकि वे तो अपने साधन के सहारे इस परेशानी को झेल लेते हैं। कई बार तो वे भ्रस्टाचार को एक आसन रास्ता मानते हैं । अन्ना की ईमानदारी पर उनकी सत्य निष्ठा पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता हैं । अन्ना की टीम ने जो मिडिया मैनेजमेंट किया वो काबिले तारीफ रहा । सरकारी अमला फेल साबित हुआ । अन्ना का भ्रस्टाचार की जड़ पूंजीवाद के विरुद्ध कुछ नहीं बोलना थोडा खलता हैं क्योकि वही तो इसे बढ़ावा देता हैं । पूंजीवाद आगे बढ़ने की होड़ में सभी गलत तरीको को प्रश्रय देता हैं। भले ही आन्दोलन का ह्रस नाउम्मीदी भरा हो लेकिन युवा वर्ग को एक नई दिशा मिली हैं । वो आगे बढ़ ने को तैयार हैं। वो किसी ऐसी व्यवस्था को नहीं चाहता जो देश के विकास में बाधा कड़ी करता हो। देश का हर नागरिक इससे मुक्ति चाहता हैं । पुरे आन्दोलन से महंगाई नेपथ्य में चला गया हैं इसे अन्ना की टीम ने गंभीरता से नहीं लिया हैं । दो जून भोजन गरीबो को नहीं मिलेगा तो वो भ्रस्टाचार की जगह अपराध का सहारा लेंगे .&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8525477778173117095?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8525477778173117095/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8525477778173117095&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8525477778173117095'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8525477778173117095'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/08/blog-post_6811.html' title='अन्ना के सत्याग्रह से केंद्र की फजीहत'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8263368732367862611</id><published>2011-08-03T21:54:00.002+05:30</published><updated>2011-08-03T22:03:04.335+05:30</updated><title type='text'>मुख्यमंत्री के आवास पर मिडिया से हुए रूबरू</title><content type='html'>अमिताभ बच्चन ने मुख्यमंत्री नितीश कुमार से मुलाकात की। उस दौरान थोड़ी देर को मिडिया से भी बाते की। इसके पूर्व प्रकाश झा के मौल पर उन्होंने घंटो मिडिया कर्मियों से बाते की । मुख्यमंत्री आवास पर मैंने पूछा कि कैसा लगा बिहार आना लम्बे समय के बाद तो बड़ी सहजता से कहा बिहार बदल रहा हैं ,सुन्दर हैं । दोबारा आने को पूछा तो वही बच्चे सा मासूम जबाब कल मन किया तो फिर आ जाऊंगा । चंद लम्हे भी अमितजी जैसे वयक्तित्व के साथ हर कोई गुजरना चाहता हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8263368732367862611?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8263368732367862611/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8263368732367862611&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8263368732367862611'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8263368732367862611'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/08/blog-post_03.html' title='मुख्यमंत्री के आवास पर मिडिया से हुए रूबरू'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3258245318951001561</id><published>2011-08-03T12:41:00.002+05:30</published><updated>2011-08-03T12:53:25.783+05:30</updated><title type='text'>आज अमिताभ पटना में</title><content type='html'>आज बिग बी अमिताभ बच्चन अपनी फ़िल्म के प्रचार के सिलसिले में पटना में रहेंगे । वे रात में यहा रुकेंगे । पटना आना उनका एक जमाने के बाद हो रहा हैं। कुछ दिनों पूर्व हमारे यहाँ प्रभात खबर में उनके पुत्र अभिषेक आये थे । छोटे शहरो की ओर उनका आना यादगार पल हो जाता हैं क्योकि बड़े शहरो में तो वे प्रायः जाते रहते हैं। इश्वर उनकी फ़िल्म को सफलता दे। उनके फैन पुरे देश दुनिया में हैं। खास कर अमित जी एक बड़े व्यक्तित्व हैं , एक संवेदनशील पिता के योग्य संतान हैं । देश को उन पर फक्र हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3258245318951001561?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3258245318951001561/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3258245318951001561&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3258245318951001561'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3258245318951001561'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='आज अमिताभ पटना में'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1926326002382291248</id><published>2011-06-08T22:44:00.005+05:30</published><updated>2011-06-08T23:30:21.895+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='यू ही बतकही'/><title type='text'>पत्रकारिता की दशा- दिशा और वर्तमान भारत</title><content type='html'>भारतीय राजनीति जिस परिस्तिथी से गुजर रही हैं वहा भारतीय पत्रकारिता अपने लिए जगह नहीं बना पा रही हैं। ऐसी मजबूरी भारतीय पत्रकारिता को पहले कभी नहीं झेलनी पड़ी थी । इसका एक मात्र कारण हैं , जन समस्याओ से मिडिया का कटते जाना । जब कार्पोरेट घरानों की गोद में देश की राजनीति और मिडिया खेलने लगे , चमकते चेहरों के बीच आम आदमी की दुश्वारिया बढती जाये तो फिर क्यों कर देश भक्ति की राग अलापी जाती हैं पता नहीं । मन दुखी हो जाता हैं जब यह सोचता हू की गुलाम भारत में कम पढ़े लिखे नेताओ में भी विजन था, पत्रकारिता भी निष्ठावान थी अपने धेय के प्रति। भारत में प्रतिभा का विस्फोट हो रहा हैं, सुचना क्रांति के युग में हम पहुच चुके हैं, वैश्विक राजनीति में परिवर्तन आ चूका हैं फिर भी हम हैं की सुधरने का नाम नहीं ले रहे। कौन सा स्थायी महल बना लेंगे, कौन सी स्थायी कीर्ति अर्जित हो जाएगी जो अमिट होगी। इस पल पल नाशवान धरा में जब हम अपने बंधू बान्धवों के साथ थोडा सुकून से न जी सके , एक दुसरे के कम न आ सके तो दरिद्र में नारायण को न पा सके तो फिर कहे की मारामारी। ये कनिमोंझी, ये २ जी स्पेक्ट्रम और राजा, कलमाड़ी एक नहीं कई अपने आस पास ही दिख जाएँगे। हमने अपना राष्ट्रिय चरित्र ही बेच दिया हैं। किसी मौके पर तो वेश्या भी apna घुंघुरू तोड़ देती हैं मगर ये हमारे नेता और टीवी, नोट और दारू की बोतल पर पंचायत से संसद तक के लिए वोट बेचती जनता.... विकट हो गया हैं भले आदमी का जीना. आन्ना हजारे हो या बाबा रामदेव जिसे वतन पर फिदा होना हैं उन्हें ....सब को लंगोटी धारण कर भारत माँ की मर्यादा को बचाना होगा .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1926326002382291248?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1926326002382291248/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1926326002382291248&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1926326002382291248'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1926326002382291248'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='पत्रकारिता की दशा- दिशा और वर्तमान भारत'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8085411024291007154</id><published>2011-05-14T23:04:00.002+05:30</published><updated>2011-05-14T23:11:13.605+05:30</updated><title type='text'>ब्लॉग लेखन की कठिनाईया</title><content type='html'>बहुत दिन हुए ब्लॉग लिखे समय की किल्लत हैं भाई । ढेर सारी बाते हैं अनुभव हैं सब साझा करूंगा, और कहा रहना हैं आप सब के बीच ही न, ढेरो बाते जो दिल को सुने और गुने भी । समय तेजी से बदल रहा हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8085411024291007154?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8085411024291007154/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8085411024291007154&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8085411024291007154'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8085411024291007154'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='ब्लॉग लेखन की कठिनाईया'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1475750295982364770</id><published>2010-10-21T21:16:00.002+05:30</published><updated>2010-10-21T21:29:27.897+05:30</updated><title type='text'>प्रथम चरण का चुनाव संपन्न, जनता का नब्ज टटोल रहे नेता</title><content type='html'>प्रथम चरण का चुनाव आज बिहार में संपन्न हुआ , नेता एक जगह से दूसरी जगह भागते फिर रहे हैं , सत्ता का खेल चरम पर हैं। नोट बाटे जा रहे हैं । पेड़  न्यूज़ धडल्ले से छापे जा रहे हैं, उसका स्वरुप बदला बदला सा हैं , चुनाव आयोग इसे बंद करने को लेकर चिल्ला रहा हैं । कोई आम जनता की सुनने को तैयार नहीं । गरीबो के पास चुनाव बूथ तक जाने हिम्मत और हैसियत नहीं । चैनल नितीश की जित की घोसना कर रहे हैं। नयी पीढ़ी जानना चाहती हैं क्या ऐसे ही चुनाव होता हैं । कई बाते लोगो की जुबान पर हैं लेकिन वो लोकतंत्र की जुबान पर नहीं चढ़ती । थोथी बातो से क्या बिहार का पिछड़ा पन दूर हो सकता हैं । जरा सोचे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1475750295982364770?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1475750295982364770/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1475750295982364770&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1475750295982364770'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1475750295982364770'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='प्रथम चरण का चुनाव संपन्न, जनता का नब्ज टटोल रहे नेता'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5930410180528674418</id><published>2010-09-30T21:04:00.003+05:30</published><updated>2010-09-30T21:35:35.645+05:30</updated><title type='text'>अयोध्या विवाद के निपटारे की अदालती पहल</title><content type='html'>अयोध्या विवाद को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ द्वारा आज सुनाये गए ऐतिहासिक फैसले पर पूरी दुनिया की निगाह टिकी थी, सभी राजनितिक डालो की सांसे अटकी थीठीक ३-३० बजे से न्यायालय ने अपना फैसला सुनना शुरू कर दिया। मिडिया की बेचैनी बढती जा रही थी। घरो व दुकानों में जिसे जहा जगह मिली टीवी व रेडियो से चिपका रहा । अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। बिहार विधान सभा चुनाव के बीच इस मामले ने बिहार की राजनितिक तपिस को बढ़ा दिया था । मै  सीधे वयोवृध इतिहासकार रामशरण शर्मा के घर पंहुचा। ९३ साल के हो चुके शर्मा जी ने अपने संस्मरण सुनाये। कहा की अदालत के बाहर फैसला होना चाहिए था। इतिहास ने कोई भूल नहीं की हैं । मंदिर व मस्जिद के बीच दुरी का कम होना ही विवाद का मूल कारण हैं । क्या हम अदालत के बाहर मामला नहीं सुलझा सकते, हमारी आपसी समझ इतनी कम होती जा रही हैं । अदालत ने पूरी जमीं को तिन हिस्सों में बाट दिया हैं। रामलला को भी भूमि का मालिकाना हक़ दिया हैं। धन्य हैं भारत भूमि .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5930410180528674418?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5930410180528674418/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5930410180528674418&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5930410180528674418'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5930410180528674418'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/09/blog-post_30.html' title='अयोध्या विवाद के निपटारे की अदालती पहल'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4725451449295722743</id><published>2010-09-18T23:30:00.002+05:30</published><updated>2010-09-18T23:57:37.038+05:30</updated><title type='text'>चुनाव का बजा बिगुल, नेताओ के घात-प्रतिघात शुरू ,जनता गई तेल में</title><content type='html'>बिहार विधान सभा चुनाव -२०१० का बिगुल बज गया हैं , भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तिथि निर्धारित कर दी हैं , २७ सितम्बर को पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, इधर नेताओ के घात - प्रतिघात का दौर शुरू हो चूका हैं । कांग्रेस ने राहुल गाँधी को अपनी मुहीम में लगा दिया हैं , तो दूसरी ओर लालू-पासवान की दोस्ती परवान चढ़ रही हैं। विकास - विकास दर में वृद्धि की राग अलापते नितीश कुमार और सुशिल कुमार मोदी , जनता दल यु - भाजपा गठबंधन अपनी दूसरी पारी खेलने के लिए तैयार हैं। भाजपा - जदयू में जहा नरेन्द्र मोदी के चुनावी सभाओ के आयोजन को लेकर हाय - तौबा मची हैं , तो लालू - पासवान को अपने गर्दिश के दिनों से उबरने के लिए एक सुनहरा मौका सा मिल गया हैं, वे बिहार को विकास की नई डगर पर ले जाने की घोषणा करते फिर रहे हैं। लालू ने तो अपनी पत्नी व् पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवे को जहा साइड लाइन पर रख दिया हैं और रामविलास पासवान के छोटे भाई व् विधायक पशुपति कुमार पारस को उप मुख्यमंत्री के बतौर स्वीकार कर लिया हैं , उससे भविष्य की कल्पना की जा सकती हैं। पांच वर्षो के एनडीए शासन में विरोधी दल की ठीक से भूमिका नहीं निभा सकने वाली  राजद लोजपा को अब आम जनता की चिंता सताने लगी हैं। कांग्रेस की स्थिति मजबूत होने से बिहार चुनाव एक रोमांचक दौर में पहुच गया हैं। बिहार में बदलाव के कई दौर अभी आने शेष हैं लेकिन मौजूदा राजनीतिक स्तिथि में ऐसी कलप्ना करना कोरी मुर्खता होगी । आम अवाम के दुखो की चिंता में कोई शामिल नहीं हैं । रोजगार की तलाश में पलायन जरी हैं , पढ़ाई की समुचित व्यवस्था नहीं हैं , इलाज के लिए बड़े शहरो का चक्कर लगाना पड़ता हैं । कल कारखाने , बिजली की उपलब्धता नहीं हैं, प्राकृतिक आपदा राजनीती चमकाने का जरिया मात्र बन गयी हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4725451449295722743?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4725451449295722743/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4725451449295722743&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4725451449295722743'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4725451449295722743'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/09/blog-post_18.html' title='चुनाव का बजा बिगुल, नेताओ के घात-प्रतिघात शुरू ,जनता गई तेल में'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6963064923033516002</id><published>2010-09-02T12:21:00.002+05:30</published><updated>2010-09-02T12:44:47.366+05:30</updated><title type='text'>नक्सलियों को उकसाना बंद करे, हिंसा नहीं समाधान</title><content type='html'>गरीबी भुखमरी से जूझती जनता को नक्सलवाद का सहारा मिल रहा हैं, वे कोई उनकी भूख नहीं मिटा रहे न ही कोई स्थाई रोजगार के अवसर पैदा कर रहे लेकिन उनमे यह उम्मीद जगाए रखते हैं। उम्मीद भूख को समाप्त करने की , बेरोजगारी मिटाने की , जल , जमीं और जंगल के ऊपर उनके अधिकार दिलाने की । उनके बच्चो और महिलाओ को स्वास्थ्य की सुविधाए दिलाने की। वे आदिवासियों में कोई बैज्ञानिक पैदा नहीं करना चाहते । विधानसभाओ और लोक सभा में उनके समर्थक पहुचे हुए हैं , लेकिन वे भी अपने को लाचार महसूस कर रहे हैं। कई नेता तो अपने बच्चो को विदेशो में या कॉन्वेंट स्कुलो में पढ़ा रहे हैं लेकिन गरीबो को मरने मरने के लिए तैयार कर रखा हैं ।  केंद्र या राज्य सरकारों को इन्हें उकसाने वाली कार्यो से बचना चाहिए, भटके हुए लाचार लोगो को शेयर की जरुरत होती हैं, सरकारे हिंसा के लिए प्रेरित करने वालो के खिलाफ कड़ी करवाई करे , साथ ही साथ नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े स्तर पर राहत व पुनर्वास कार्यकर्म संचालित करे । बिहार में ४ दिनों से नक्सलियों ने कोहराम मचा रखा हैं , उन्हें कई बार सरकारों की ओर से सही जबाब नहीं मिल पा रहा हैं। निर्णय करने वाले स्थिति पर नजर रखे हैं लेकिन कुछ नहीं हो रहा हैं ।  वे चार पुलिस कर्मियों को बंधक बना रखा हैं , दूसरी ओर ७ को अबतक मार चुके हैं । हिंसा के रास्ते समाधान निकलना संभव नहीं हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6963064923033516002?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6963064923033516002/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6963064923033516002&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6963064923033516002'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6963064923033516002'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='नक्सलियों को उकसाना बंद करे, हिंसा नहीं समाधान'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8008490958159073580</id><published>2010-08-19T12:40:00.003+05:30</published><updated>2010-08-19T13:28:38.232+05:30</updated><title type='text'>छोटे शहरो में कॉमनवेल्थ गेम की चर्चा</title><content type='html'>दिल्ली से मिडिया में छन छन कर आ रही ख़बरे कॉमनवेल्थ की तैयारी और उससे जुडी सच्चाई को बया कर रही हैं , छोटे शहरो में उत्सुकता बढ़ा रही हैं, देश की प्रतिष्ठा दाव पर लगी हैं, चर्चाओ का बाजार गर्म हैं, कौन मॉल बना रहा हैं, कौन विज्ञापन को लेकर अपने हाथ खीच रहा हैं, शीला जी परेशान हैं, देश की निगाहे दिल्ली दरबार पर टिकी हैं । मिडिया की खबरों को दरकिनार करते हुए तैयारी अपने अंतिम चरण में हैं। भोजपुर जिले का मुख्यालय हैं आरा। यहाँ का एक नवयुवक प्रशांत जो दिल्ली से लौटा हैं, कहता हैं " दिल्ली में खेल के मैदानों , सडको को दुरुश्त किया जा रहा हैं लेकिन स्तर बेहद घटिया हैं। दिल्ली वासियों को फुरशत नहीं कि वे उसकी सामाजिक निगरानी करे। " यह सही हैं कि अपने यहाँ राष्ट्रीय गौरव कि भावना किसी खास तैयारी के दौरान देखने को नहीं मिलती। छोटे शहर इससे तब ज्यादा जुडेगे जब "विज्ञापन युद्ध" शुरू होगा। कॉमन वेल्थ ko darshne wale ti shirt  व अन्य दैनिक उपयोग कि सामग्रियों का बाजार सजने लगेगा। ग्रामीण इलाके के बच्चे टीवी में आँखों को चौंधियाती रौशनी में अपने खेल के मैदानों कि तुलना करेंगे । मछली पकड़ने वाले, गाय चराने वाले युवको कि टोली घास के मैदानों पर उधम मचाएगी। क्या हम पडोसी देश चीन से किसी भी खेल आयोजनों की तैयारी की सिख नहीं ले सकते। विश्व के सबसे युवा देश भरते के युवाओ को उससे संबध नहीं कर सकते । क्यों बड़े कार्पोरेट घरानों के ऊपर निर्भर हो कर हम अपनी प्रतिष्ठा को ठोकर मरने पर तुले हैं । कई बार राजनेता नहीं समझते की यह चुनाव की तैयारी नहीं और न ही कोई बच्चो का खेल हैं ........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8008490958159073580?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8008490958159073580/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8008490958159073580&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8008490958159073580'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8008490958159073580'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/08/blog-post_19.html' title='छोटे शहरो में कॉमनवेल्थ गेम की चर्चा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7316310069170566376</id><published>2010-08-07T23:48:00.002+05:30</published><updated>2010-08-08T00:29:19.762+05:30</updated><title type='text'>कैसे हो दिल की बतिया</title><content type='html'>आदमी कैसे करे दिल की बतिया। कैसे सेलिब्रिटी करते हैं अपने दिल की बाते। क्या उसमे दिल के किसी कोने की सच्चाई रहती हैं। कई बार लगा की वो सिर्फ मतलब की बाते करते हैं। क्या अंग्रेगी लेखको की तरह हिंदी लेखक अपने प्रति इतने इमानदार रहते हैं। साफगोई क्या हिंदी वालो की जुबान में नहीं होता, हिंदी पत्रकारिता को क्या अभी अपने  ईमानदारी की परख करनी बाकि हैं। कई इसे दिल्लगी समझ सकते हैं लेकिन हैं यह सच्चाई ।  हमारे अख़बार हो या हिंदी न्यूज़ चैनल हिंदी भाषियों की आत्मा को  पकड़ पाने में विफल हैं। निहायत ही बेबकूफाना अंदाज होता हैं हिंदी पट्टी वालो का ।  वे जानना चाहते हैं पूरी तफसील से । उनकी इच्छा इसमें नहीं की कौन कितना बड़ा बेवकूफ हैं वे जानना चाहते हैं की कौन उनका आदर्श हो सकता हैं। सच पूछे तो यह भारत की आत्मा की पुकार हैं।  हमारे आदर्श क्या नरेन्द्र मोदी हो सकते हैं, क्या राज ठाकरे जैसा कोई शख्श हो सकता हैं , कदापि नहीं । हमारा आदर्श महात्मा गाँधी , लता मंगेशकर, अमिताभ बच्चन, सचिन तेंदुलकर, रतन टाटा हो सकते हैं । इन्होने अपने जीवन में आदर्श स्थापित किया हैं । क्या आप इन्हें पहचानते हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7316310069170566376?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7316310069170566376/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7316310069170566376&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7316310069170566376'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7316310069170566376'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='कैसे हो दिल की बतिया'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-117959530050536554</id><published>2010-07-25T00:27:00.002+05:30</published><updated>2010-07-25T01:07:40.224+05:30</updated><title type='text'>बहस से भागते राजनेता, सड़क से संसद तक होता हैं हंगामा</title><content type='html'>हमारे देश के राजनेताओ में सहनशक्ति की भारी कमी हो गयी हैं। किसी भी बात पर तवरित प्रतिक्रिया देने में उन्हें कोई संकोच नहीं होता। वे यह समझाने को तैयार नहीं होते कि इससे आम जनता पर कितना प्रभाव पड़ता हैं। सड़क से संसद तक उनके व्यवहारों को देखा जा सकता हैं। संसद के दृश्य देखे या किसी राज्य कि विधान सभा की आपको एक से दृश्य देखने को मिलेंगे ।  क्या यह परिलछित नहीं करता की समाज में दिनों दिन हो रही गिरावट के कारण हर खासो आम अपने आप में सिमटा जा रहा हैं । बंधुत्व की भावना का संचार इन्टरनेट या मोबाईल क्रांति के कारण विस्तार पाने की जगह व्यक्ति केन्द्रित होता जा रहा हैं। आखिर क्यों हम जनहित के मुद्दों से भटक जा रहे हैं। सारी योजनाए भ्रस्टाचार की भेट चढ़ती जा रही हैं। युवा वर्ग के सामने कोई आदर्श नहीं दिखता। हमारे आइकोन भी घबरा जाते हैं जब एक ओर उनकी नुख्ताचिनी की जाती हैं तो दूसरी ओर बाजार के दबाब के कारण उन्हें अपनी भावनाओ को प्रगत करने में परेशानी का सामना करना पड़ता हैं। कितना कठिन हैं मौजूदा दौर में किसी गरीब की आहो को जगह मिलाना। क्या संसदीय जीवन में आरोप प्रत्यारोप से इतर हमे मुख्य समस्याओ को हल करने में अपनी उर्जा का व्यय नहीं कर सकते हैं। मिडिया को बाजार ने कब्जे में लेलिया हैं। उसमे रह कर चाहे कोई लाख दावा करे कही न कही उसे बाजार से समझौता करना पड़ रहा हैं ।  जिसे आवाज बनना था बेजुबानो का वह चाटुकारों , दलालोंके साथ मिलकर अमीरों की रखैल बनती जा रही हैं। माफ करेंगे ऐसे शब्दों को स्त्री विरोधी करार देने वाले समझ ले, इसे क्यों इस कदर निकृष्ट बनाया गया हैं ।  किसी शक्ति को बंधक बना कर उसका निजी स्वार्थ के लिए उपयोग में लगा देने पर क्या इससे भी बुरा कुछ कहा जा सकता हैं ।        व्यापारी सिन्धु घाटी सभ्यता कालखंड में भी अपने वयापार वाणिज्य के विस्तार के लिए दूर देशो की यात्राये करते थे, भारतीय वाणिज्य व्यापार का डंका पुरे विश्व में बजता था उनमे ईमानदारी कूट कूट कर भरी थी, विदेशी भी सम्मान करते थे लेकिन आज क्या हो रहा हैं। विदेशी व्यापारियों को देश को लुटने की खुली छुट दे दी गयी हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-117959530050536554?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/117959530050536554/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=117959530050536554&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/117959530050536554'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/117959530050536554'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/07/blog-post_25.html' title='बहस से भागते राजनेता, सड़क से संसद तक होता हैं हंगामा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5550180874630159839</id><published>2010-07-07T13:50:00.002+05:30</published><updated>2010-07-07T14:26:30.480+05:30</updated><title type='text'>गंभीरता से मुर्खता की उत्पत्ति होती हैं......</title><content type='html'>कभी कभी बच्चे जब नादानी करते हैं तो उन्हें कहा जाता हैं कि गंभीर बनो। क्या ऐसा लगता हैं कि गंभीरता जीवन की इतनी ही नायाब जरुरत हैं।  अभी एक केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ का बयान पढ़ा। उन्होंने कहा कि योजना आयोग एसी कमरे में बैठ कर गरीबो के लिए योजनाये बनाता हैं। क्या इस प्रकार के आयोगों में गंभीर लोगो की भरमार नहीं हैं जो बड़ी ही आकर्षक योजनाये गरीबो के लिए तैयार करते हैं। उनका तो शुक्रिया अदा करना होगा कि वे उसके साथ ही अम्बानियो, मोदियो का भी ख्याल करते हैं , नहीं तो ये कम्पूटर , मोबाईल , चमचमाती कारे कहा से आती। ये सचमुच गरीबो की सुध लेते तो जगह जगह गाँधी बाबा की खद्दर ही दिखाई देती। पेट तो भरा होता लेकिन अमेरिकी सोच कहा से आती। लोगो ने उलटी राह पकड ली हैं। कमलनाथ जी विचारवान पुरुष हैं, उनकी आत्मा कभी तो सत्य को परखती हैं। इतने भारी भरकम आयोगों , मंत्रालयों का कोई मतलब भी हैं क्या जो इन्हें इस देश कि गरीब जनता अपने पीठ पर ढोए जा रही हैं। सचमुच अब तो लगने लगा हैं कि गंभीरता से मुर्खता कि उत्पत्ति होती हैं। आब कोई बाप अपने बच्चे को नहीं सिखाता - झूठ बोलना पाप हैं, बिना झूठ को सच किये आदमी अपने आप को इस दुनिया से परे पाता हैं। आज इस देश में महापुरुष मिथक में तब्दील होते जा रहे हैं। गांधीजी जैसे महापुरुष कि कल्पना करना मुश्किल होगा तो , दुनिया बिनोबा को सोच कर भी हैरत में रह जाएगी  कि उसे हजारो एकड़ भूमि लोगो ने दान कर दिया था, एक मदन मोहन मालवीय जी थे जिन्होंने बिना किसी ग्रांट कमिशन के जन सहयोग से विश्विद्यालय स्थापित कर दियाउन्हें किसी आयोग कि अनुशंसा पर काम करने के लिए फंड नहीं मिला था। नियत सही हो तो कोई उदेश्य से भटका नहीं सकता। नेताजी, हमारे बुधिजिवियोगंभीर बने लेकिन मुर्खता छोड़े, आपको इतिहास माफ नहीं करने जा रहा हैं, जितने गरीबो के सिने से आह निकलेगी वह आपकी चिता कि धधकती ज्वाला को और भी जलाएगी। देखिये आप तो अभी से जल रहे हैं, इसकी tapish आपकी नींद गायब किये हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5550180874630159839?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5550180874630159839/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5550180874630159839&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5550180874630159839'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5550180874630159839'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/07/blog-post_07.html' title='गंभीरता से मुर्खता की उत्पत्ति होती हैं......'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4218518754842989809</id><published>2010-07-05T13:51:00.002+05:30</published><updated>2010-07-05T14:19:08.618+05:30</updated><title type='text'>भारत बंद के आईने में मिडिया के सरोकार</title><content type='html'>आज देश भर में भाजपा सहित तमाम विरोधी दलो ने महंगाई के मुद्दे पर भारत बंद का आह्वान किया। दिन भर रात भर धोनी की शादी में भोपू बजने वाली मिडिया अचानक से जनसरोकार के मुद्दे प्रदर्शित करने लगी। तमाम बड़े विरोधी दल के नेता स्क्रीन पर नजर आने लगे। कल के अख़बार में भी ये छाये रहेंगे । महगाई अपने जगह पर रहेगी , हा नेता और मिडिया अपना बाजार बना लेंगे। यहाँ मिडिया को इतनी ही पीड़ा होती तो जनसरोकार के मुद्दों को हासिये पर नहीं फेक दिया जाता। आज आजादी के ६० वर्षो बाद जिन्हे आम आदमी के बतौर नामित किया जाता हैं उनकी सामाजिक राजनितिक हैसियत क्या बच गयी हैं इसे समझा जा सकता हैं। देश के कई प्रान्तों में पिने का साफ पानी मयस्सर नहीं, महिलाओ के शौच की सही व्यवस्था नहीं, पेट भरने को मुठी भर दाना नहीं तो महंगाई की मार उनपर कैसी होती होगी इसे समझ पाना क्या इतना मुश्किल हैं । घडियाली आंसू बहाने वाले नेता अपने गिरेबान में झाके। मिडिया अपने को लोकतंत्र का स्वघोषित चौथा स्तम्भ मानती रहे , आम जनता का भरोसा उसपर नहीं रहा । कोई खबरे अब उन्हें चौकाती नहीं। ये कानून अब उनके लायक नहीं रहे । खेत मजदूरों को कार्पोरेट नेताओ की भाषा समझ नहीं आती। गाँधी इतिहास हो गए हैं, उनकी मान्यताये गीता पुराण की भाति किताबो में दर्ज हो कर रह गयी हैं। इन पुस्तकों को कम्पूटर भाषी संताने समझने में असमर्थ सिद्ध हो रही हैं । महंगाई को लेकर न तो सत्ताधीश न ही विरोधी कोई दीर्घ कालीन नीति तय करने की इच्छुक हैं । बंद ,विरोध, नित नये मूल्यों की घोषणा जनता के हिस्से में बस यही रह गयी हैं, सब अपनी अपनी जिम्मेवारी निभा रहे हैं । जय हो , भारत माता की जय हो , तुम्हारी संताने , इस परिणति को पहुच जाएँगी इसे ब्रम्हा भी समझाने में असमर्थ हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4218518754842989809?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4218518754842989809/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4218518754842989809&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4218518754842989809'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4218518754842989809'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='भारत बंद के आईने में मिडिया के सरोकार'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6619087972201761580</id><published>2010-06-30T21:11:00.003+05:30</published><updated>2010-06-30T21:43:54.715+05:30</updated><title type='text'>भूमि सुधार के मुद्दे पर  बिहारी राजनीति असमंजस में</title><content type='html'>बिहार में विधान सभा चुनाव होना हैं, इसके लिए विभिन्न दलों के रणनीतिकार अपने दिमागों पर बल डालना शुरू कर चुके हैं। कोई भी प्रमुख राजनीतिक दल जहा भूमि सुधार के मुद्दे को उठाने से घबरा रहे हैं वही जन संगठनो व् वामपंथी दलों द्वारा इसे जोर शोर से उठाया जा रहा हैं। बिहारी राजनीति में भाजपा और जनता दल उ पहले ही इस  मुद्दे पर अपनी हाथ जला चुकी हैं। किसी में इतनी ताकत नहीं दिख रही की वो भूमि सुधार के मुद्दे पर जनता का मत प्राप्त करे या कोई नयी दिशा में बढ़ सके। हद तो यह हैं की बिहार में भूमि के रिकार्ड का रख रखाव की स्थिति बेहद दयनीय हैं। भूदान के जमीनों का अधिकांश जिलो में कोई रिकोर्ड नहीं हैं, कई जमीनों को सर्वे के दौरान उलट पुलट कर सरकारी घोषित कर दिया गया हैं। सरकार के नियमो के तहत जमीं मालिक को स्वयं इसे साबित करना हैं। हजारो एकड़ जमीनों पर अवैध कब्ज़ा हैं। २० से ३० फीसदी खेती करने वाले दुसरो के खेत जोतते हैं। लाखो लोगो के पास रहने को घर नहीं हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6619087972201761580?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6619087972201761580/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6619087972201761580&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6619087972201761580'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6619087972201761580'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/06/blog-post_30.html' title='भूमि सुधार के मुद्दे पर  बिहारी राजनीति असमंजस में'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' 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परम्पराए टूट व् बिखर रही हैं। सवाल उपभोक्तावाद व बाजार के दायरे में रख कर समझा जा सकता हैं। किसी एक लड़की का निर्णय पुरे समाज को किसी खतरनाक निर्णय के मोड़ पर कैसे पंहुचा दे रहा हैं। स्वछंदतावाद ने समाज परिवार, कुल की अन्तत कहे तो देश कि मर्याद को तार तार कर के रख दिया हैं। क्या किसी अंकुश कि जरुरत आज के भारतीय समाज को नहीं रह गयी हैं। यह ठीक हैं कि बालिग हो चुके नौजवानों को अपने निर्णय कि छुट होनी चाहिए , उन्हें अपने भविष्य को लेकर किसी से शादी करने का पूरा अधिकार हैं। लेकिन क्या हम एक बड़े समाजिक समूह कि खुशियों को नजर अंदाज कर स्वयम खुश रह सकते हैं। क्या हम ऐसे समूहों का निर्माण करना चाहेंगे जिस में हर कोई स्वछन्द हो। अरे मेरे भाई, जानवरों से भी कुछ सीखो कि उन्होंने किस प्रकार से अपने समाज को व्य्वाश्थित कर रखा हैं । कभी उसका उल्लंघन नहीं करते। इज्जत की खातिर हो रही मौते किसी भी समाज के लिए एक कलंक हैं , इसे जायज नहीं ठराया जा सकता। हमें अपनी संतानों को समझने में कही भूल हो रही हैं। प्यार को नफरत से जीता नहीं जा सकता। इसे प्यार से ही हल करना होगा। बेतुकी बातो से ऊपर उठ कर हमें नौजवानों को नयी  दिशा देनी होगी। हमारे रीती रिवाज इतने दकियानुशी नहीं हैं जो किसी समस्या के संधान की दिशा नहीं सुझाते, जरुरत उन्हें समझाने की हैं, खुद भी समझने की .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8982628597175646874?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8982628597175646874/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8982628597175646874&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8982628597175646874'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8982628597175646874'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/06/blog-post_23.html' title='इज्जत की खातिर मौत की बढती रफ्तार'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4352694690888378684</id><published>2010-06-12T23:45:00.002+05:30</published><updated>2010-06-13T00:27:34.432+05:30</updated><title type='text'>नितीश और नरेन्द्र मोदी की तस्वीर ने बया की तल्ख़ हकीकत</title><content type='html'>हकीकत से बाबस्ता होना कभी कभी बेहद खतरनाक सिद्ध होता हैं। खासकर, राजनीतिक दृष्टी से जब सिधान्तो व् उसूलो से जब अलग रिश्तो की बाते होती हैं, तो जबाब देते नहीं बनता। आज के दैनिक में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश  कुमार की तस्वीर नरेन्द्र मोदी के साथ क्या छपी मनो भूचाल आ गया ।    छिपाए छिप नहीं रहा न दिखाए दिख नहीं रहा। भाजपा की यहाँ राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक चल रही हैं , इसमें भाग लेने भाजपा के सभी दिग्गज नेता आये हुए हैं। देश की नीतिओ के निर्धारण के लिए ये जिम्मेवार होते हैं , आपस में ये इस प्रकार अछूतों की तरह वयवहार करते हैं लेकिन जब सत्ता में साझेदारी की बाते होती हैं तो गलबहिया डालने से इन्हें इंकार नहीं होता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4352694690888378684?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4352694690888378684/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4352694690888378684&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4352694690888378684'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4352694690888378684'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='नितीश और नरेन्द्र मोदी की तस्वीर ने बया की तल्ख़ हकीकत'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1068027053898719773</id><published>2010-05-29T11:19:00.007+05:30</published><updated>2010-05-29T14:44:40.458+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सामयिक'/><title type='text'>दलाई लामा और शंकराचार्य का पटना प्रवास</title><content type='html'>बुद्ध पूर्णिमा के दिन पटना में दलाई लामा और पूरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्छ्लानंद जी पटना में थे। दलाई लामा और शंकराचार्य अलग अलग जगहों पर थे उन्होंने कई बड़े महत्व की बाते कही। दलाई लामा चूकी राजकीय मेहमान थे इसलिए उनकी बातो को मीडिया में काफी जगहे मिली लेकिन शंकराचार्य अपनी कई बाते मिडिया के माध्यम से आम जनता के बीच नहीं रख पाए। उसदिन पटना में एक भव्य स्तूप का उद्घाटन परम पावन दलाई लामा ने किया। एक और महत्व की बात हैं की बिहार फौन्डेशन के सहयोग से महाराष्ट्र से ७२ बौद्ध तीर्थयात्रियो का एक दल भी यहाँ आया था। भारत भूमि विद्वानों व धर्माचार्यो से भरी हैं । भारत में सनातन धर्म की प्रतिष्ठा किसी सत्ता के कृपा की मुहताज नहीं हैं। हा, तिन महीने में नितीश सरकार की इच्छा शक्ति से स्तूप बन सकता हैं लेकिन उसी से चार फर्लाग की दुरी पर स्थित कंकरबाग मुह्हले के लोग प्रत्येक वर्ष बरसात में डूबने को मजबूर होते हैं , तिन वर्षो से सीवरेज व् नाला निर्माण की करवाई की जा रही हैं वो आजतक पूरा नहीं हो सका। परम पावन दलाई लामा ने कहा की ध्यान केंद्र व् लाइब्रेरी बनाये लेकिन अच्छा होता की बौद्ध सायंस, फिलासफी और रिलिजन की पढाई हो। उन्होंने कहा की तिब्बत में नालंदा स्कूल के ही बुद्ध धर्म मानने वाले लोग हैं, इस नाते आप गुरु हुए हम चेला। बिहार व प्रत्येक भारतवासी को इस पर गर्व होना चाहिए कि उनके विज्ञानं व् परम्परा से दुसरे सीख ले रहे हैं। उन्होंने कहा भी कि अमेरिका व् यूरोप में मॉर्डन सायंस के तहत बौद्ध सायंस कि पढाई कि जा रही हैं। मैंने जब इश्वर तत्व की व्याख्या कोई अध्यात्मिक पुरुष कैसे कर सकता हैं पूछा तो उन्होंने सांख्य योग की विसद चर्चा की । पत्रकारों को इस प्रसन में कोई रूचि नहीं थी वे खबरों को टटोलने में लगे थे , एसा नहीं की मैंने खबर नहीं लिखी लेकिन कभी कभी जब आप महान पुरुषो के सानिध्य में होते हैं तो आपसे संजीदा रहने की उम्मीद की जाती हैं। हद तो यह हो गयी जब एक अन्य कार्यक्रम में शंकराचार्य ने धर्म और राजनीतीकी चर्चा की तब एक पत्रकार अपने ज्ञान की झलक दिखा दी। शंकराचार्य ने उसे धर्म व् राजनीती के दर्जनों पर्यायवाची शब्द और उसके अर्थ बताये। दुनिया तब भी थी जब हम और आप नहीं थे , और तब भी रहेगी जब नहीं होंगे। ज्ञान का हस्तांतरण प्रेम से हो सकता हैं , लाठी भांजने से , शोर करने से या चिल्ला कर नहीं। मिडिया कर्मी जब सूचना संग्रह कर &lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;आम लोगो के ज्ञान्बर्धन के लिए उसे प्रस्तुत करने का काम करते हैं तो उन्हें ज्यादा धैर्य धारण करने की जरुरत होती हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1068027053898719773?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1068027053898719773/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1068027053898719773&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1068027053898719773'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1068027053898719773'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html' title='दलाई लामा और शंकराचार्य का पटना प्रवास'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1890530225714677268</id><published>2010-05-17T13:30:00.002+05:30</published><updated>2010-05-17T13:57:38.843+05:30</updated><title type='text'>जातिवाद को लेकर पूरी तरह भ्रमित हैं समाज</title><content type='html'>पिछले पोस्ट को लिखने के बाद कई लोगो से बाते हुई, लोगो के अपने अपने तर्क हैं। जाति आधारित जनगणना से किसी अनजाने सच्चाई के सामने आने की उमिद्दे अधिकांश लोगो को हैं। कुछ इसे जाति के नजरिये से तो कुछ विवाह की मानसिकता से जोड़ कर अपनी तर्के पेश कर रहे हैं। आई बी एन ७ के वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष ने एक लम्बा लेख ही लिख डाला हैं। उन्होंने भारतीय मानसिकता की विवेचना करते हुए यह स्वीकार लिया हैं की हम गर्व से कहे की जातिवादी हैं। क्या दूसरी जाति में विवाह करना ही जातिवाद से अलग प्रदर्शित कर सकता हैं। सरनेम में जातिसूचक प्रतिको को हटा लेना ही इसका समाधान हैं, क्यों किसी जाति विशेष का वोट सिर्फ जाति के नेता की झोली में गिरता हैं। कई प्रश्न अनसुलझे रह्जाते हैं। जाति व्यवस्था की जड़ो को काटने की जगह एक सज्जन ने तो कहा कि होने दीजिये जनगणना , यह विकास कि दिशा में दो कदम आगे तो एक कदम पीछे जाने कि कवायद का हिस्सा हैं ।   तब तो कहना पड़ेगा कि आतंकी घटनाओ को होने दे इससे राष्ट्रिय एकता मजबूत होगी। मेरी दृष्टि से जो गलत हैं उसे गलत कहना होगा। जाति के आधार पर कोई नतीजा निकलने कि कोशिश बेमतलब होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1890530225714677268?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1890530225714677268/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1890530225714677268&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1890530225714677268'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1890530225714677268'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/05/blog-post_17.html' title='जातिवाद को लेकर पूरी तरह भ्रमित हैं समाज'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3340218822353672631</id><published>2010-05-14T12:32:00.002+05:30</published><updated>2010-05-14T13:27:41.346+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सामयिक'/><title type='text'>जातीय आधार पर जनगणना राष्ट्रहित में नहीं</title><content type='html'>भारत सरकार ने जातीय आधार पर जनगणना करने का निर्णय किया हैं जो अपने आप में दुर्भाग्य पूर्ण हैं। जिन कल्याणकारी योजनाओ को लछित करके ये सारी कवायद की जा रही हैं उन्हें पहले से ही संविधान में उल्लेखित किया जा चूका हैं। यह निर्णय असम्वैधानिक हैं। सिर्फ एक योजना का उल्लेख करना चाहता हू। नरेगा जो अब मनरेगा हो चूका हैं उसके क्रियान्वयन की जाच करा ली जाये। इसमें समाज के सबसे निचले तबके को जाति धर्म से ऊपर उठ कर रोजगार उपलब्ध करने की व्यवस्था हैं, क्या सिर्फ आकड़ो का खेल नहीं हो रहा हैं। जितनी संख्या में रोजगार मांगने वालो को उनके घर के समीप उपलब्ध होने चाहिए थे उतना मिल पा रहा हैं। आखिरकार ये राजनेता क्या चाहते हैं, देश को जाति पातीमें बाटकर मानसिक रूप से गुलाम बनाये रखा जाये। राष्ट्रीयता की भावना का क्या होगा। आतंकवाद से , बीमारियों के जंजाल से , नक्सल वाद से, बढती बेरोजगारी से कैसे निपटेगे। सिर्फ बिहार की चर्चा करे तो यहाँ ९६ फीसदी किशोरिया रक्ताल्पता से पीड़ित हैं। ९० फीसदी गर्भवती व् शिशुवती माताए अकाल मौत के कगार पर खड़ी रहती हैं। कमजोर मानव कैसे जीडीपी के विकास दर को बढ़ने में अपना योगदान दे सकते हैं । इन राजनेताओ के दिमाग को क्या होगया हैं। पता नहीं। जातीय आधार पर विकास के साधन जरुरत मंदों के बीच पहुचने की कवायद की जाति हैं तो वो क्या हैं जिस नीति के तहत करोडो -अरबो रूपये की सब्सिडी उद्योगपतियों को दे दी जाती हैं। आखिर कैसे भारत की परिकल्पना की जा रही हैं। भारत की जो जनता आतंक के विरुद्ध मोमबतिया जलाने एक साथ निकल पड़ती हैं उसे  इसप्रकार के गैर जिम्मेदराना निर्णयों के खिलाफ भी सामने आना चाहिए। भारतीय मिडिया से इस बात की उमीद करना बेमानी हैं की वो जनमत तैयार करने में अपना योगदान दे। उसे नेताओ और सत्ता की चाकरी करने से फुरसत नहीं हैं। कितने भी बड़े तीसमारखा हो वो इस बात को समझते हैं की जिस सिस्टम के वो हिस्सा बन चुके हैं उनमे अपनी बात रखना भी कितना मुश्किल भरा कार्य हो गया हैं। आवाज कही से भी उठती हो उसे अपना स्वर प्रदान करना चाहिए। अम्बेडकर हो या लोहिया , गाँधी हो या नेहरु सबने जातिविहीन समरस समाज की कल्पना की हैं । इसे जनगणना कराकर, ऐसी कमरे में बैठ कर योजनाये बनाने से हासिल नहीं किया जा सकता। आज देश में कई ऐसे किसान हैं जो वैज्ञानिको से जयादा समझ रखते हैं। इंजिनियर गाव के निपट ग्वार कहे जाने वालो के सामने पानी भरते प्रतीत होते हैं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3340218822353672631?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3340218822353672631/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3340218822353672631&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3340218822353672631'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3340218822353672631'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/05/blog-post_14.html' title='जातीय आधार पर जनगणना राष्ट्रहित में नहीं'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8125484915118687310</id><published>2010-05-06T20:54:00.002+05:30</published><updated>2010-05-06T21:19:24.086+05:30</updated><title type='text'>बेतुके सवालों पर नैतिकता बघारते मिडिया संस्थान</title><content type='html'>इन दिनों मिडिया संस्थानों में बेतुके सवालों पर नैतिकता बघारने का चलन सा चल पड़ा हैं। दिल्ली में एक पत्रकार आग की घटना का कवरेज करते हुए मर गया, उसके परिवार का क्या हुआ , उसकी मौत पर सम्बंधित मिडिया संस्थान ने क्या किया, आगे इस प्रकार खबरों की आपाधापी में किसी की मौत न हो इस पर कोई बहस नहीं चल रही, क्योकि वह आई आई ऍम सी जैसे किसी बड़े मिडिया संस्थान की उपज नहीं था, वह किसी के इश्क में गिरफ्तार नहीं था, उसकी पहुच बड़े पत्रकारिता की छवि से संबध नहीं थी, उसकी हत्या नहीं की गयी थी फिर उसके मौत में खबरों की टीआरपी बन्ने की कूबत नहीं थी इसलिए उसे भुला दिया गया। किसी लड़की की छवि को नष्ट भ्रष्ट कर, उसकी हत्या के लिए वातावरण तैयार कर, फिर उसकी मौत के बाद नैतिकता बघार कर आखिर लोग क्या चाहते हैं। किस संस्कृति की पैरवी कर रहे हैं। कई ऐसे भी हैं जो लडकियों का इस्तेमाल कर उसे प्रेम व् प्यार का नाम देते हैं, दुसरे को गरियाते फिरते हैं, उन्हें कोई नैतिक सम्बन्ध भी गलत लगता हैं ।  इनकी एक अलग दुनिया होती हैं। इसमें कोई शक नहीं की लडकिय भी जाने अनजाने उनके माया जाल में शुकून महसूस करती हैं ।  आखिर कैसे कोई अपने लिए एक अलग  दुनिया बना लेता हैं। कानून को इसकी पड़ताल करनी चाहिए, ये हत्याए किस मानसिक दशा की उपज हैं।   चाहे कोई भी दोषी हो उसे सबक सिखाना चाहिए। आजादी के नाम पर स्वछंदता, मनमर्जी की छुट नहीं दी जानी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8125484915118687310?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8125484915118687310/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8125484915118687310&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8125484915118687310'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8125484915118687310'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='बेतुके सवालों पर नैतिकता बघारते मिडिया संस्थान'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-2642585763909329968</id><published>2010-04-29T21:07:00.003+05:30</published><updated>2010-04-29T21:40:18.636+05:30</updated><title type='text'>शब्दों के खेल विचारो की जमघट, शुचिता गोल</title><content type='html'>इन दिनों मिडिया में होती प्रिंट की भूल से या वाचन में भूल से उत्पन्न स्थिति को लेकर इंटर नेट पर शब्दों  के खेल का दुखद अध्याय चल रहा हैं। इस में पत्रकारिता जगत के लोग जुड़े हैं। समय की किल्लत और टीआरपी की आपा धापी में अब कितना और स्तर गिरेगा इसे समझना मुश्किल है। क्यों इस बात को भूल जाते है &lt;span class=""&gt;कि अछर -गलत &lt;/span&gt;प्रिंट हो रहा है -को ब्रम्ह कहा गया है शब्द उस ब्रम्ह से निरसित अंश है। कई शब्द मेरे भी गलत छप जाते हैं। कई बार कोफ्त होता हैं, लेकिन यहाँ मुझे कम्पूयटर कि कम जानकारी के कारण होता हैं ।     लेकिन जब अखबार व् चैनल में बड़े बड़े पैकेज पर कार्य करने वाले, विद्वान अधिकारी इसे नहीं सुधर पाते तो क्या मशीन मैनसे या ओपरेटर से उम्मीद की जाये। शब्दों के प्रयोग के पूर्व क्या हमारी जिम्मेवारी नहीं बनती। क्या हम भूल गए पुरानी कहावत पानी पीजिये छान के, वाणी बोलिए जान के। बंद करे इस प्रकार से शब्दों की अश्लीलता व शीलता पर बहसे , इसकी शुचिता पर विचार करिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-2642585763909329968?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/2642585763909329968/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=2642585763909329968&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/2642585763909329968'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/2642585763909329968'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/04/blog-post_29.html' title='शब्दों के खेल विचारो की जमघट, शुचिता गोल'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8584157533805721456</id><published>2010-04-27T13:59:00.003+05:30</published><updated>2010-04-27T14:47:37.085+05:30</updated><title type='text'>पत्रकारिता में विचारहीनता का बढ़ता खतरा</title><content type='html'>मूल्यपरक पत्रकारिता बाजारवाद व् उपभोक्तावाद के आगे दम तोडती नजर आ रही हैं। विचारहीनता का इतना बड़ा संकट फिजा में हैं जिसके फलस्वरूप समाज का वास्तविक स्वरुप नष्ट हो रहा हैं। प्रतिदिन प्रयोग के नाम पर भोंडी बातो को मिडिया तव्वजो दे रहा हैं। पैसे का खेल न सिर्फ राजनीति, क्रिकेट बल्कि मिडिया के विकेट भी डाउन कर रहा हैं। आपके मौलिक विचारो को मिडिया में स्पेस मिलना मुश्किल ही नहीं असंभव सा होता जा रहा हैं। समाज के दबे, पिछड़े, अल्पसंख्यक व् आदिवासियों को तभी जगह दी जाती हैं जब वोट की बात हो, वे अपने हाथ में हथियार उठा ले या संघर्स के दौरान हताश हो कर आत्महत्या को मजबूर हो जाये। आपकी आवाज को इतना संगठित तरीके से कुचल दिया जाता हैं कि आपको उसका एहसास भी नहीं होता। प्रायः यह कह कर अपनी विश्वसनीयता को बचे रखने का उपक्रम किया जाता हैं कि देखीय खबरों का असर हो रहा हैं। जब आपके ऊपर विश्वसनीयता का संकट खड़ा हो जाता हैं तब उलटे सीधे प्रयोग शुरू हो जाते हैं। नियूज रूम में इतने खुरात लोगो कि भरमार हो गयी हैं कि वे अपने आगे किसी को पल भर के लिए सुनने को तैयार नहीं हैं। क्या आप आज के किसी नौजवान को अपने विचारो के साथ आगे बढ़ने देने कि कल्पना कर सकते हैं। क्यों नहीं शशि थरूर व् आईपीएल वाले मोदी जैसे लोग आनन् फानन में पैसे कमाने कि जुगत भिड़ाने में अपनी उर्जा नष्ट करे। अखबार व् सिनेमा हो या संचार क्रांति के अन्य विविध उपकरण क्या अपनी उपयोगिता समाज के व्यापक हित में प्रमाणित कर पा रहा हैं इसे सिर्फ एक तरफा विचार मानकर  ख़ारिज नहीं किया जा सकता । आज भारत में ब्लड प्रेसर मापने कि कोई अपनी तकनीक नहीं हैं, विदेशी तकनीक पर आधारित मशीनों से हम अपने स्वास्थ्य को मापते हैं, दवाए उनके अनुसार ही खाते हैं, हमारी अपनी पूरी प्रणाली ही ध्वस्त हो चुकी हैं। हम हैं कि गौरव गान में ही लगे हैं। कोसी के पीड़ित, कालाहांडी के किसान, नार्थ इस्ट के मेहनती लोगो कि पीडाए हमें नहीं दिखती। लोग नकली सामानों के उपयोग के लिए मजबूर किये जा रहे हैं, बिना भ्रटाचार कि भेट चढ़े कोई कम नहीं होता, मानसिक रूप से विछिप्त पैदा हो रहे हमारे युवा को किसी दिशा का ज्ञान तक नहीं हो पा रहा । वे अपने स्वार्थ कि खातिर कुछ भी कर गुजरने को बेहतर मान ले रहे। मिडिया व् इसके माध्यम से रोजी रोटी पाने वालो  को सजग होने कि जरुरत हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8584157533805721456?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8584157533805721456/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8584157533805721456&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8584157533805721456'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8584157533805721456'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/04/blog-post_27.html' title='पत्रकारिता में विचारहीनता का बढ़ता खतरा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4675217568400512584</id><published>2010-04-21T12:30:00.002+05:30</published><updated>2010-04-21T13:00:11.911+05:30</updated><title type='text'>आईपीएल व् बीपीएल पर भाजपा ने केंद्र को घेरा</title><content type='html'>आईपीएल के मुद्दे पर केंद्र सरकार का एक विकेट लेने के बाद अब भाजपा ने बीपीएल के लोगो के लिए मुसीबत बनी महंगाई को लेकर कांग्रेस को घेरने की कवायद शुरू कर दी हैं। आईपीएल ने खेल के नाम पर दौलत , ग्लैमर व् एयासी की जो तस्वीर देश के सामने रखी हैं उसका मिसाल मिलना मुश्किल हैं । भूख,गरीबी, अशिछा से जूझ रहे भारतवासी, नक्सलवाद से लड़ते हमारे जाबांज सिपाही क्या सोचते होंगे। हमारे राजनेताओ ने कैसे कैसे तरीके इजाद कर रखे हैं  दौलत अर्जित करने के। और तो और मंत्रिमंडल से हटाये गए विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने यह कह कर की वे अभी भारतीय राजनीति में बच्चे हैं, पुरे देश को शर्मशार कर दिया। उन्हें विदेश मंत्री बनाकर किसने अंतराष्ट्रीय राजनीति में धकेल दिया। भाजपा को लगे हाथ एक मौका भले ही मिल गया लेकिन गंभीरता से विवेचना हो तो कई लोगो के नाम सामने आ सकते हैं। आईपीएल सहित देश में खेले जा रहे क्रिकेट के सभी मैचो की जाच करायी जानी चाहिए। यह पैसे उगाही के खेल में पूरी तरह से तब्दील हो चूका हैं। हमारे राजनेता राजनीति में खेल भावना को भूल कर खेल में राजनीति की शुरुआत कर चुके हैं। इनकी गीध दृष्टि से समाज का शायद ही कोई अंग आछूता रह गया हो। महंगाई सिर्फ भाषण व् प्रदर्शन का मुद्दा भर बन कर रह गयी हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4675217568400512584?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4675217568400512584/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4675217568400512584&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4675217568400512584'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4675217568400512584'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/04/blog-post_21.html' title='आईपीएल व् बीपीएल पर भाजपा ने केंद्र को घेरा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8121017732971556350</id><published>2010-04-10T23:12:00.003+05:30</published><updated>2010-04-11T00:12:24.984+05:30</updated><title type='text'>नक्सलवाद से निबटने को तैयार हो देश</title><content type='html'>नक्सलवाद की भीषण समस्या से निबटने के लिए देश के हरेक नागरिक को तैयार होना चाहिए। यह आयातित विचारधारा देश को घुन की तरह चाट रहा हैं। हमें यह सोचना होगा की आखिर भूख व् गरीबी से निबटने की जगह आखिर कबतक देश के अन्दर सामाजिक बदलाव की हिंसक प्रवृति को झेलते रहेंगे। क्या इस देश ने बिनोबा के भूदान से सीख नहीं ली जब बड़े बड़े भूपतियो ने अपने गरीब भूमिहीन भाइयो के लिए सहर्ष भूमि का दान कर दिया। यह बेहद शर्मनाक हैं की अभी तक कई राज्यों में उन भूमियो का सही तरीके से वितरण तक नहीं किया गया। बिहार के राजनितिक इतिहास में एक वह भी घटना दर्ज हैं की कैसे स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद एक स्वतंत्रता सेनानी ने अतरिक्त भूमि पर अपने संघर्ष की दुहाई देते हुए कब्ज़ा करने का पहला हक़ करार दिया। सरकारी योजनाओ में मची लूटपाट की, गरीबो की हकमारी की लम्बी दस्ता हैं । आज नक्सलवाद स्वय में भस्मासुर बन चूका हैं। गरीबो की हक़ की बात करते हुए , उन इलाको के बच्चो की स्कुल भवनों को उड़ने में लगा हैं। कैसे स्वयं सहायता समूह के नाम पर माइक्रो वितीय प्रोग्राम किसानो को आत्महत्या पर मजबूर किये हुए हैं इस पर भी विचार करने की जरुरत हैं। थोडा ठहर कर सोचे मासूम बच्चो को हथियार उठाकर अपने ही देश की पुलिस से वे संघर्ष कर रहे हैं। उनके खून के प्यासे बने हुए हैं। राह से भटके अपने देश वासियों को मुख्यधारा में लाने के लिए हमें हर संभव उपाय करना होगा। नितीश कुमार की यह टिपण्णी की गृह मंत्री पी चिदम्बरम को काम ज्यादा बाते कम करना चाहिए, बेतुका सलाह हैं। वे नक्सल इलाको में जिस प्रकार से सबको लुट में हिस्सेदार बनाकर अपनी इमेज बिल्डिग में लगे हैं वह शोभा नहीं देता। न तो उन इलाको में सड़क पहुची हैं न ही कोई रोजगार के साधन व् अवसर उपलब्ध कार्य गए हैं। बिजली तो पुरे बिहार की समस्या हैं। यह ठीक ही हुआ की मिस्टर चिदंबरम के इस्तीफे की पेशकश को प्रधान मंत्री ने ठुकरा दिया। नितीश कुमार का यह कहना की कानून तोड़ने पर उनपर कारवाई हो, बेतुकी बात हैं। हमें हथियार के बल पर उनके दादागिरी को तोडना होगा। साथ ही साथ उनके दिलो को भी जितने का कार्य करना होगा। जखम बहुत गहरा हैं, जरा संभल कर निर्णय करे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8121017732971556350?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8121017732971556350/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8121017732971556350&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8121017732971556350'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8121017732971556350'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/04/blog-post.html' title='नक्सलवाद से निबटने को तैयार हो देश'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1011871746419089812</id><published>2010-03-27T23:27:00.002+05:30</published><updated>2010-03-27T23:54:12.099+05:30</updated><title type='text'>भारत के समुज्ज्वल भविष्य के लिए शक्ति संग्रह जरुरी</title><content type='html'>भारतीय राष्ट्रीय चेतना के विकास के लिए शक्ति का संग्रह करना जरुरी हैं। एक सबल राष्ट्र ही विश्व में अपने सर को  ऊँचा उठाकर कर चल सकता हैं। भारत के कण कण में आध्यत्मिक शक्तिया निवास करती हैं। हम अपनी सुसुप्त शक्तियों को जागृत करके एक सबल व् सुदृढ़ राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।  इसके लिए प्रत्येक भारतीय को अपने देश के प्रति अपनी निगाहों में ऊँचा उठाना होगा। हमें छोटी छोटी छुद्र भावनाओ का तिरस्कार करना होगा । क्या हम एक संप्रभु देश में निवास नहीं करते हैं। क्या देश की  अचछी बातो से जुड़ने का मतलब कुछ और हो जाना हैं। आखिर कब तक हम जाति धर्म व् दलों व् कुनबो में बटे रहेंगे। आज कौन ऐसा हैं जिसे अपने देश से मतलब नहीं हैं, कौन इससे अपने को ज्यादा महान समझता हैं। जो ऐसा समझते हैं वो भूल रहे हैं की उनके न जाने कितने पूर्वज इसी धरती के नीचे दफन किये जा चुके हैं, उनकी मिटटी मिटटी में मिल चुकी हैं। एक गिलहरी, गौरया, नदिया सभी इससे जन्म लेते हैं, फिर विलुप्त हो जाते हैं। थोड़ी सी असावधानी आपके साथ इस देश को भी खतरे में डाल सकती हैं ।  जापान से सीखे कैसे शक्ति संवर्धन की जा सकती हैं। कैसे अपने देश को समृद्ध व् सुसंगठित बनाया जा सकता हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1011871746419089812?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1011871746419089812/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1011871746419089812&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1011871746419089812'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1011871746419089812'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/03/blog-post_27.html' title='भारत के समुज्ज्वल भविष्य के लिए शक्ति संग्रह जरुरी'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4727706283960219200</id><published>2010-03-18T16:58:00.003+05:30</published><updated>2010-03-19T20:28:24.047+05:30</updated><title type='text'>नोबेल और लालटेन का विज्ञापन</title><content type='html'>नोबेल पुरस्कार और लालटेन के विज्ञापन में भला क्या समानता हो सकती हैं। शायद आप भी अचम्भित हो कर रह जाये लेकिन हैं और इसका नजारा भी देखने को मिला हैं। हैं बिलकुल खरी व् सच्ची बात। आप माने या न माने बिहार के मुख्यमंत्री, उपमुख्य मंत्री, विधान सभा के अध्यछ, विधान परिषद् के सभापति, विधान मंडल के दो सौ से अधिक सदस्यों के साथ प्रेस और मिडिया के साथियों ने भी इस सत्य को देखा हैं। दुनिया के जाने माने पर्यावरणविद और नोबेल पुरस्कार प्राप्त डाक्टर आरके पचौरी ने पटना में आयोजित एक पर्यावरण सबंधी सेमिनार में एक ओर जहा पर्यावरण की रछा पर बल दिया वही दूसरी ओर उनके साथ पहुची सहयोगी अकंछ चौरे ने उनके सहयोग से सौर उर्जा संचालित लालटेन के चार प्रकार के मॉडलो की भी चर्चा की।  बकायदा तिन और पञ्च मिनट की फ़िल्म बनाकर प्रदर्शित भी की गयी। इस सेमिनार का आयोजन बिहार विधान परिषद् की पर्यावरण सम्बन्धी समिति ने आयोजित की थी। इसमें विधान मंडल के सभी सदस्यों को आमंत्रित किया गया था। मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने उन्हें स्पस्ट किया की बिहार सरकार हर घर में रौशनी करना चाहती हैं लेकिन इसके लिए सौर उर्जा का बिहार मॉडल विकसित करना होगा। बिहार में कई बार लोगो द्वारा सौर लालटेन की गुणवत्ता को लेकर प्रश्न व् शिकायते की जाती हैं । बिहार में अमीर गरीब सब बिजली की कमी से जूझ रहे हैं। यह कैसी पर्यावरण बचने की चिंता हैं यह मेरी तो समझ में नहीं आ रहा हैं आप समझे तो जरुर बतायेंगे। डा पचौरी द्वारा कभी हिमालिय ग्लेशियर के वर्ष २०३५ तक पिघलने की बात की जाती हैं तो कभी तेल की बढती खपत पर तो कभी मांसाहार त्यागने के लिए सलाह दी जाती हैं। वे बराबर धरती पर बढ़ते बोझ को लेकर चिंतित दीखते हैं । क्या यह नोबेल पुरस्कार कभी कवि गुरु रविंद्रनाथ टैगोर को इसी लिए दिया गया  की उन्हें ठुकराने का भी फैसला करना पड़े । पाश्चात्य संस्कृति की इसी धारणा को हम तथाकथित आधुनिक कहलाने वाले लोग अनुकरण करते हैं। अगर करते हैं तो फिर भविष्य की कल्पना करे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4727706283960219200?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4727706283960219200/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4727706283960219200&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4727706283960219200'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4727706283960219200'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/03/blog-post.html' title='नोबेल और लालटेन का विज्ञापन'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6573275563098721395</id><published>2010-02-27T23:09:00.003+05:30</published><updated>2010-02-28T00:03:31.990+05:30</updated><title type='text'>मिडिया पर सरकार व् कार्पोरेट जगत का नियंत्रण</title><content type='html'>मिडिया या पत्रकारिता आज सरकार व् कार्पोरेट जगत के  शिकंजे में रहकर तड़प रही हैं। इस तड़प व् दमघोटू मौहाल से गुजरने वाला हर पत्रकार वाकिफ हैं। पत्रकारिता के नाम पर सिधांतो की बात करके व् बाजार के चलन को अपनाते हुए किसी प्रकार की उत्कृष्टता की बाते की जा सके इसकी उम्मीद करना व्यर्थ हैं। एक अवसर हमें मिलता हैं जिस पर ठरते हुए हमें विचार करने की जरुरत हैं, वह हैं अपने पेशे  के साथ  ईमानदारी बरते। होली के अवसर पर हमें यह संकल्प लेनी चाहिए की पब्लिक में बनी यह धारणा की पत्रकारिता लोक तंत्र का चौथा खम्बा हैं यह समाप्त न हो जाये। यह कोई संविधान प्रदात सुविधा नहीं हैं। यह जन आकांछा हैं। आज मुख्यमंत्री नितीश कुमार भले ही बिहार व् देश दुनिया में बेहद लोकप्रिय हैं, अपने शासन व् सोच के कारण पुरस्कृत किये जा रहे हो, लेकिन उन्हें स्पष्ट पता हैं कि  क्यों दिल्ली उनकी आवाज को नहीं सुनती। लालू का भी अपना सोचना हैं दिल्ली सत्ता कि ताकत को पहचानती हैं, फिर तो हार्वर्ड व् टेक्सास विश्वविद्यालय से कैसे मनेजमेंट गुरु कि उपाधि ली जा सकती हैंहमारे राजनेता जनभावनाओ को समझते नहीं या समझने कि जरुरत नहीं समझते हैं। इस नासमझी से फैलने वाले भरम को आम जनता भी नहीं समझती हैं। हम कहते हैं कि ये पब्लिक हैं सब जानती हैं, लेकिन भारत कि इस निरीह जनता कि पीड़ा को सुन व् समझ पाने में असमर्थ सिद्ध हो रहे हैं। इस मिडिया कि हिमाकत तो देखिये कि इसे अपने मान सम्मान कि भी चिंता नहीं हैं। एक सिख सवालाख दुश्मनों पर भारी पड़ता हैं लेकिन आज उशकी गति और मति देखिये। क्यों नहीं आतंकवाद का परचम लहराए, क्यों नहीं एक दुसरे पर कीचड़ उछलने का अवसर दे, क्यों नहीं अपने कॉलम, कौमाऔर फुलस्टाप को बेच दे। क्यों नहीं राजनेता उसे अपनी पैर कि जूती समझे, उसे क्यों नहीं सच्चाई के दम पर नाटक रचना पड़े। मिडिया में खबरे नहीं चकाचौंध, ग्लेमर बिक रहा हैं, सिनेमा इस से बहुत पहले से गुजर रही हैं, इसका वहा तो कोई हाल नहीं निकला अब आप और हम मिलकर इस पर विचार करे। शुभ होली।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6573275563098721395?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6573275563098721395/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6573275563098721395&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6573275563098721395'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6573275563098721395'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post_27.html' title='मिडिया पर सरकार व् कार्पोरेट जगत का नियंत्रण'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1867432604722480149</id><published>2010-02-19T12:47:00.002+05:30</published><updated>2010-02-19T13:35:37.083+05:30</updated><title type='text'>प्रतिभा की नहीं हैं जरूत हिंदी पत्रकारिता को</title><content type='html'>हिंदी पत्रकारिता से आज के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी या शिवपूजन सहाय या नवजागरण काल के उल्लेखनीय कोई अन्य पत्रकार-साहित्यकार होते तो उन्हें आत्म हत्या कर लेना पड़ता। उनका पूरा जीवन प्रतिभाओ को सवारने में बिता, कई नये नये तथ्यों के अनुसन्धान में वे सफल रहे, सिर्फ स्वतंत्रता संघर्ष से जोड़ कर उनके योगदानो को कमतर नहीं किया जा सकता। मै एक बानगी देना चाहता हू। मेरे एक मित्र हैं, दो-दो विश्व विद्यालयों से हिंदी में गोल्ड मेडिलिस्ट हैं। बिहार में लेक्चररो की नियुक्ति में घोर अनियमित्ताओ के कारण तत्कालीन चयन लिस्ट में उन्हें झारखण्ड के लिए अनुशंसित किया गया। अंततः नियुक्ति नहीं हुई। कोर्ट केस का अंतहीन सिलसिला शुरू हैं। खैर, इस दौरान उन्होंने दैनिक अखबारों के लिए फुटकर रचनाये भेजनी शुरू की। जीविकोपार्जन के लिए एक अखबार से जुड़े भी। स्वयं को नबर एक खाने वाले उस अखबार की कार्यशैली ने उन्हें अपने रंग में ढालना चाहा। हार कर उन्हें नौकरी छोडनी पड़ी। अखबार में आठ दिनों के उनके अनुभव पर जब भी चर्चा होती हैं, तो लगता हैं की बाजार ने अखबारों व उनमे काम करने वालो की मानसिकता ही बदल दी हैं। वह दिन दूर नहीं जब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर हाय तौबा मचाने वाले स्वयं इस पर नियंत्रण की जरुरत महसूस करने लगेंगे। फिल्मो के लिए सेंसर बोर्ड, राजनेताओ के लिए आदर्श चुनाव संहिता तो पत्रकारों के लिए भी कड़ाई से निर्धारित नियमो व् आदर्श आचरण संहिता को लागु की जानी चाहिए। यह तय होना चाहिए की कौन सी खबर प्रायोजित हैं उसका उल्लेख हो। हिंदी की टांग तोड़ने वाले हिंदी अखबारों की खबर लेनी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1867432604722480149?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1867432604722480149/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1867432604722480149&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1867432604722480149'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1867432604722480149'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post_19.html' title='प्रतिभा की नहीं हैं जरूत हिंदी पत्रकारिता को'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7711335046305850279</id><published>2010-02-12T13:52:00.002+05:30</published><updated>2010-02-12T14:54:29.927+05:30</updated><title type='text'>पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में कंजूसी क्यों</title><content type='html'>अपनी बातो को शुरू करने के पूर्व मेरी गुजारिश हैं की आप पूर्व वाले आलेख को अवश्य पढ़े जिसे वरिष्ठ पत्रकार व् चिन्तक मृणाल पांडे ने लिखा हैं। मुझे नहीं लगता की सर्वहारा वर्ग के बीच अखबारों की पठनीयता को लेकर कोई भ्रम हैं। वे अपनी जानिब विरोध या बहिष्कार नहीं कर रहे हैं। इस सर्वहारा समाज को इतना भी अनपढ़, जाहिल समझने की भूल करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। यह वही समाज हैं, जिसकी बुनियाद पर बाजार अपना विस्तार कर रहा हैं। पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में कंजूसी बरते जाने की जरुरत नहीं हैं। कुकुरमुतो की तरह उग आये पत्रकारिता संस्थानों से निकलने वाले पत्रकारों को वरिष्ठ पत्रकारों के माध्यम से ज्यादा सजग करने की जरुरत हैं। श्री मिडिया से यह उम्मीद करना की वह सर्वहारा की आवाज बुलंद करेगा, यह वक्त की जरुरत हो सकती हैं लेकिन मुश्किल हैं। इसमें शहरी वर्ग व मिडिया की अपनी जरूरते खतरे में पड़ जाएगी। कोई भी वर्ग अपनी सुविधाओ की कीमत पर किसी दुसरे वर्ग की हिमायत भला क्यों कर करेगा। पत्रकारिता की दुनिया से बाबस्ता सभी पत्रकार यह जानते हैं और महसूस करते हैं की जिसे अवस्क किस्म की लीपापोती की संज्ञा दी जा रही हैं उसका सीधा सरोकार किस्से हैं। पत्रकारिता की दुनिया में भले ही किसी आवाज या भावनाओ का गला घोट देना आसान हैं लेकिन संचार के बढ़ते साधनों के बीच अब उन आवाजो को अनसुना या नजरंदाज नहीं किया जा सकता। उतम साहित्य लेखन हो या उम्दा पत्रकारिता पहले भी बलिदानियों के रास्तो पर अपनी राह बनाती रही हैं। हर हर गंगे कह कर अपनी पीढियों के तर जाने की उम्मीद रखने वाले भले ही एक दुबकी लगा कर अपने मन को समझा ले , गोता लगाने वाले लगा भी रहे हैं , मोतिया निकाल भी रहे हैं। इन्हें किसी बात का शिकवा गिला नहीं हैं। वक्त हर बात का हिसाब किताब कर देता हैं। हमें उनसे सबक लेनी चाहिए। इसमें कोइ  शक नहीं की हिंदी पत्रकारिता खबरों की विश्वसनीयता के संकट से गुजर रही हैं। शोध व सत्यापन युक्त खबरों को प्रकाशित करने का निर्णय कौन करता हैं इस पर भी प्रकाश डाला जाना चाहिए। इनके नहीं प्रकाशित किये जाने के लिए कौन सा वर्ग जिम्मेवार हैं उन्हें चिन्हित करना चाहिए। क्या इनसे बचाते हुए सर्वहारा को पाठ पढाना उचित  हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7711335046305850279?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7711335046305850279/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7711335046305850279&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7711335046305850279'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7711335046305850279'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post_3785.html' title='पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में कंजूसी क्यों'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1434895442000246253</id><published>2010-02-12T13:44:00.002+05:30</published><updated>2010-02-12T13:51:23.850+05:30</updated><title type='text'>हिंदी पत्रकार अपनी निगाहों में अपनी खोई गरिमा पाए</title><content type='html'>डुबकीधर्मी देश में सर्वहारावाद : मेरे इस प्रस्ताव से कि हिंदी अखबारों के हर घालमेल का ठीकरा पहले वरिष्ठ संपादकीय कर्मियों पर फोड़ने और फिर उन्हीं से स्थिति बदलने की मांग करने के बजाय, क्यों न खुद आम पाठक भी जागरूक उपभोक्ता का दायित्व निभाते हुए ऐसे अखबारों का समवेत विरोध और बहिष्कार करें, एक महोदय बेहद गुस्सा हैं। उनकी राय में हिंदी अखबारों का आम पाठक तो एक 'सर्वहारा' है। पेट भरने की चिंता का उस पर दिन-रात उत्कट दबाव रहता है, इसलिए उससे लामबंद प्रतिरोध की उम्मीद करना गलत है। और उपभोक्तावाद तो नए पैसे का एक निहायत निंदनीय प्रतिफलन और उपभोग का बाजारू महिमामंडन है। इसलिए सर्वहारा को उपभोक्ता कहना उसका अपमान करना है, आदि।&lt;br /&gt;आशय यह है कि भारत में सर्वहारा एक मूक, अपढ़, अनाथ वर्ग है जो सामूहिक तौर से शेष समाज की दया और अनंत इमदाद का ही पात्र ठहरता है। और इस वर्ग के हकों का परचम उसके बजाय हमारे मुखर-पढ़े-लिखे शहरी मीडिया को ही आगे आकर उठाना चाहिए। सर्वहारा और उपभोक्तावाद की ऐसी व्याख्या के तहत 'सर्वहारा' एक बे-चेहरा मानव समूह का मूक हिस्सा बन कर रह जाता है। हर आदमी के पास अपनी जो एक बुनियादी विशिष्टता और जीवन संघर्ष के दुर्लभ अनुभव हैं, जिसके बल पर हम साहित्य में घीसू, धनिया, लंगड़ और होरी जैसे अविस्मरणीय पात्रों से रूबरू होते रहे हैं, उसके प्रति ऐसे सपाट सर्वहारावाद में एक गहरा अज्ञान झलकता है। क्या हम भारत को अपने आदर्श सर्वहारापरस्त रूप में अगर एक व्यक्ति और बाजार निरपेक्ष देश मान लें? तो फिर उस अंतर्मुखी घोंघे के भीतर दुनिया की महाशक्ति बनने की उत्कट कामना क्यों?&lt;br /&gt;आज हर व्यक्ति जो बाजार में खरीदारी करता है, भले ही वह पाव भर आटा, पचास ग्राम नमक और दो हरी मिर्चें ही क्यों न मोलाए, एक उपभोक्ता है, और बतौर उपभोक्ता वाजिब कीमत पर ठीकठाक सामान पाने का उसे पूरा हक है। फर्क यही है कि अक्सर उसे अपने इन हकों की जानकारी नहीं होती, और अगर होती भी है तो वह उनको बिना एकजुट हुए हासिल नहीं कर सकता। इसलिए गरीब उपभोक्ता को लगातार उपभोक्तावाद विषयक सटीक जानकारियां देना और अपनी विशाल बिरादरी के साथ एकजुट कानूनी गुहार लगाने का महत्व समझाना और भी जरूरी है।&lt;br /&gt;हर राज्य में हिंदी अखबार का गाहक आज औसत अंग्रेजी अखबार के गाहक से अधिक दाम देकर, अपेक्षाकृत कम पन्नों का अखबार खरीद रहा है, अलबत्ता सर्वहारा के हक के नाम पर दामन चाक करने वालों ने इस पर कुछ नहीं कहा-किया है। फिर भी बिहार के किसी छोटे से गांव से बस से शहर आकर रोज स्टाल पर रखे अखबारों में अपने काम की खबरों की तादाद चेक कर तब अखबार खरीदने वाला गरीब पाठक (यकीन मानें इनकी तादाद लाखों में है) बड़े शहर के बातों के धनी मध्यवर्गीय पाठक से तो कहीं बेहतर उपभोक्ता हैं, जो हाकर से अक्सर किसी प्रमोशन स्कीम के तहत (मुफ्त चाय या स्टील का डिब्बा या तौलिया पाने के लिए) महीनों के लिए एक अखबार बुक करा लेता है, वह पसंद हो या न हो। गांव-कस्बे का यह पाठक गरीब भले हो, पर वह अखबार का एक जागरूक पाठक है, जिसकी अपनी स्पष्ट पसंद, नापसंद है, और स्थानीय सरोकार भी। अगर वह एकजुट होकर अखबारों की ईमानदारी पर सवाल बुलंद करे, और भ्रष्ट अखबारों का बहिष्कार भी, तो स्थिति में स्थायी सुधार होगा, और जल्द होगा, क्योंकि बाजार अब तेजी से छोटे शहरों और गांवों की तरफ खिंच रहा है।&lt;br /&gt;वैसे गांधीजी के 'अंतिम सीढ़ी के व्यक्ति' की पक्षधरता जरूरी है, इस पर हमारे यहां सब प्रगतिशील लोग सहमत दिखते हैं। पर सर्वहारा नामक प्राणी को बार-बार अर्थहीन अनुष्ठानों से न्योतने के बाद भी हमारे राजनीतिक दलों के मुख्यालयों से लेकर हिंदी अखबार तक में उस गरीब की जमीनी और तात्कालिक स्थिति की गहरी, व्यवस्थित और व्यक्तितश: पड़ताल के प्रमाण हमें शायद ही मिलें। सरलीकरण, बस सर्वत्र सरलीकरण, और अंत में चंद पिटे-पिटाए निष्कर्ष।&lt;br /&gt;हम गहरे पानी में पैठ कर मोती खोजने के बजाय तट पर ही एकाध डुबकी लगा कर 'हर हर गंगे' का नारा बुलंद करने वाले देश के वासी हैं। यहां डुबकी लगा कर समय और मेहनत बचाए जाते हैं, जबकि धारा में पैठना निरंतर तैरने की क्षमता मांगता है, हजारों कष्टसाध्य, जोखिमभरी शैलियां सीखने का आग्रह करता है। हमारे पूर्वजों ने कभी सप्त सिंधु और अनगिनत महानदियों के देश में गहरे जाकर तैरने-तरने के कई लाभ भले गिनाए हों, पर सच तो यह है कि आज हम श्राद्ध से लेकर पर्व के अवसर तक तट पर खड़े हो...गंगे चैव यमुने गोदावरीसिंधुकावेरी...जपते हुए, तमाम नदियों का अपनी छोटी-सी अंजली में ही न्योत कर तृप्त हो जाते हैं। एक डुबकी लगाई और मान लिया कि सात पीढ़ियां तर गईं।&lt;br /&gt;इस वक्त जबकि खबरों की विश्वसनीयता और ढांचागत समायोजन, दोनों ही क्षेत्रों में हिंदी की पत्रकारिता एक जटिल दौर से गुजर रही है, बाजार में पाठकों के बीच भरोसा बहाली और अपने घर भीतर पत्रकारिता के स्वस्थ मानदंड पुन: स्थापित करने के लिए न्यूनतम शर्त यह है, कि पत्रकार बंधु अवयस्क किस्म की लीपापोती या सर्वहारावाद की ओट लेकर छिछोरी छींटाकशी करने से बाज आएं। क्यों न वे हिंदी अखबारों की बेहतरी पर गंभीरता से बात करें, नए बदलावों के बारे में अपने अनुभव साझा करें, पन्नों पर संपादकीय मैटर और विज्ञापन के इलाकों के बीच साफ-सुथरी विभाजक रेखाएं बनाने के लिए समवेत नीतियां रचें, ताजा खबरों के निरंतर सत्यापन और उससे जुड़े दायरों पर पत्रकारिता से इतर क्षेत्रों में हो रहे शोध की जानकारी लें, जमीनी भागदौड़ को खबरें जमा करने की बुनियादी जरूरत समझें और हिंदी को सिर्फ एक माध्यम नहीं, बल्कि जीवंत, निरंतर गतिशील कथ्य के रूप में भी देखें बरतें।&lt;br /&gt;हिंदी पत्रकारिता के संकट से निबटने के लिए क्या जरूरी नहीं कि पहले हिंदी के पत्रकार खुद अपनी निगाहों में अपनी खोई गरिमा पाएं और मनुष्य के नाते अपने आपको अपने प्रतिस्पर्धियों की बराबरी का तो महसूस करें? हिंदी अखबारों की कमजोरी की भावुक आर्थिक-समाजशास्त्रीय व्याख्याएं देना बेकार है। बेकार मन समझाने को हम क्यों कहें कि हिंदी पत्रकारिता की दुर्दशा पूरी दुनिया की पत्रकारिता के संकट का ही अंग है। पूरी दुनिया की पत्रकारिता की धारा में आए प्रदूषण से शिकायत हुई तो वह तुरंत भीतरी सफाई में जुट गई। उसने खबरों का रूप संवारा, खर्चे कम किए, बाहरी स्तर पर तकनीकी मदद के लिए वह 'एपल' की नई ई-टैबलेट से लेकर गूगल तक को टटोल रही है। उधर हम नाराज तो हैं, पर हस्बेमामूल पलायन करना चाहते हैं। इसलिए अपनी खीझ को छिपाने को हम सर्वहारा के नाम पर या बाजार के खिलाफ खूब शोर मचा रहे हैं, ताकि बाजार वालों को लगे कि हम स्थिति से जूझ रहे हैं। जबकि भीतरखाने वही ढाक के तीन (या दो) पात नजर आते हैं। इस तरह की कायर डुबकीवाद हरकतों से हम तट से रत्तीभर भी आगे नहीं बढ़ सकेंगे, डूब भले ही जाएं। साभार : जनसत्ता&lt;br /&gt;लेखिका मृणाल पाण्डे जानी-मानी साहित्यकार और पत्रकार हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1434895442000246253?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1434895442000246253/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1434895442000246253&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1434895442000246253'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1434895442000246253'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post_12.html' title='हिंदी पत्रकार अपनी निगाहों में अपनी खोई गरिमा पाए'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5148821926290386773</id><published>2010-02-09T13:21:00.005+05:30</published><updated>2010-02-09T14:36:55.811+05:30</updated><title type='text'>कांग्रेस की दोहरी नीति</title><content type='html'>देश के नीति नियंताओ की समझ और उनके निर्णय को लेकर आम जनता को हमेशा गफलत में डाला जाता रहा हैं। खासकर कांग्रेस की अदूरदर्शी नीतियों के कारण यह समझ पाना मुश्किल हैं की वो कब लॉंग प्लानिग के तहत देश को विभाजित करती तो कभी राष्ट्रवाद की पछधर हो जाती महसूस होती हैं। मनसे को मुबई में सर उठाने का मौका देना फिर उसका दुरपयोग करते हुए शिवसेना व् भाजपा को चुनावी शिकस्त देना, फिर लगे हाथ शिवसेना को उसकी औकात उसके ही गढ़ में बता देना, कोई कांग्रेस से सीखे। यह तो उपराष्ट्रवाद को नियंत्रित करने की कवायद थी लेकिन एक वर्ष में महंगाई को लेकर पुरे देश में जो अफरातफरी मची हैं, क्या अमीर और गरीब सब उससे पीड़ित हैं। कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शरद पवार एंड कंपनी को पहले तो बचने का मौका दे रही हैं, लगता हैं फिर उसका दिन फिरने वाला हैं । सचेत हो जाये शरद जी, जनता को बरगलाने की कोशिश न करे , सुगर फ्री फुड की आदत न डलवाए। पंजाब में आतंकी घटनाये हो या कश्मीर में, नार्थ ईस्ट की बात हो या महाराष्ट्र की उप राष्ट्रवाद की बलवती होती भावनाओ को बलपूर्वक कुचला जाना जरुरी हैं।राज्यों के अन्दर छोटे राज्यों के निर्माण की कई लोग वकालत करते हैं, ठीक हैं लेकिन जरा यह भी तो समझे की क्या इसी प्रकार के राजनितिक विजन व नौकरशाही को लेकर विकास के पथ पर आगे  जाया जा सकता हैं। ---&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5148821926290386773?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5148821926290386773/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5148821926290386773&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5148821926290386773'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5148821926290386773'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post_09.html' title='कांग्रेस की दोहरी नीति'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3587194619312808227</id><published>2010-02-02T13:05:00.002+05:30</published><updated>2010-02-02T13:52:07.272+05:30</updated><title type='text'>राहुल के बिहार दौरे का निहितार्थ और कांग्रेस</title><content type='html'>राहुल गाँधी  के दो दिवसीय बिहार दौरे ने बिहार के युवाओ में एक बार फिर कांग्रेस के प्रति उत्सुकता बढ़ा दी हैं। वे यहाँ कांग्रेस के युवा कार्यकर्ताओ में संभावित उमीद्वारो की तलाश करने और कांग्रेस की नब्ज टटोलने आये थे। बिहार की राजनीति से कांग्रेस के निर्वासन का लगभग दो दशक बीतने को हैं। गलाकाट आन्तरिक कलह व सुविधाभोगी राजनीति ने जेपी के चेलो को अवसर प्रदान किया। समाजवादी विचारो को लेकर चाहे लालू हो या नीतीश दोनों सता के केंद्र बिंदु बन गए। रामविलास पासवान ने स्वयं को केन्द्रीय राजनीति में ला कर चाहे जिस की भी सरकार रही उसे शुद्ध भाषा में कहे तो सिर्फ अपना उल्लू सीधा किया। राहुल के आने के समय बिहार की युवा पीढ़ी के विचारो में आमूलचूल परिवर्तन आ चूका हैं, कांग्रेस को बिहार की जरूरतों को समझाना होगा। जब कांग्रेस शासित राज्यों में उत्तर भारतीयों खासकर बिहारियों को प्रतारित किया जायेगा, बिहार की केन्द्रीय योजनाओ में मिलने वाली हिस्सेदारी में कटौती की जाती रहेगी, प्रति वर्ष आने वाली बाढ़ से निजात नहीं दिलाया जाता जिसमे केंद्र की भूमिका महत्वपूर्ण हैं तबतक बिहारी युवाओ की पीठ पर कांग्रेस की सवारी करना मुश्किल हैं। बिहार की सम्पूर्ण राजनीति के कुछ अपने अन्तर्विरोध भी हैं , इसे राहुल को समझना होगा । राहुल ने बुजुर्ग कांग्रेसियों को सन्देश दे दिया हैं की राजनीति हो या खेलनीति युवाओ को तरजीह दिए बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। राहुल ने महात्मा गाँधी की कर्मस्थली भितिहरवा से अपनी यात्रा शुरू की, लेकिन गाँधी से महात्मा की राह आसान नहीं। राहुल बाबा बहुत कठिन हैं डगर पनघट की.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3587194619312808227?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3587194619312808227/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3587194619312808227&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3587194619312808227'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3587194619312808227'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='राहुल के बिहार दौरे का निहितार्थ और कांग्रेस'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5181734967849103026</id><published>2010-01-30T17:54:00.002+05:30</published><updated>2010-01-30T18:18:19.192+05:30</updated><title type='text'>कैसे हैं जनाब, थ्री इडियट से क्या हुई मुलाकात</title><content type='html'>सडक पर, रस्ते में, राजनीति में ,पत्रकारिता में  हर जगह आपको थ्री क्या फोर, फाइव, सिक्स इडियट मिलते होंगे, लेकिन उनसे आपने क्या कभी कुछ सिखने की कोशिश की। आइये परदे पर थ्री  इडियट हमें कुछ बता रहा हैं उसे जानने की कोशिश करते हैं। यह सही हैं की कैरियर को लेकर दिल की बाते सुनने की बाते, खास कर गुरुकुल के जमाने में बच्चो को उनके अनुरूप वातावरण उपलब्ध करा कर उनकी प्रतिभा में निखार लाया जाता था। इन्हें हम योग की भाति ही भूल गये थे, जिसकी याद बाबा रामदेव जी ने कराया हैं। हमारी नई पीढ़ी को भूलने की आदत होती जा रही हैं। मै कई ऐसे बच्चो को जानता हु जिन्हें टीवी पर दिखने वाले हिरन और बकरी में विशेष अंतर समझ नहीं आता। गाँधीजी के योगदान तो छोड़ दे, उनकी खिचाई करते किशोर व युवा मिल जाते हैं। दिल की सुनने वाले इडियट, आवारा, दीवाना कहे जाते हैं। नई  लकीर खीचने वाले को अपनी वजह साबित करने  में लम्बा वक्त लग जाता हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5181734967849103026?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5181734967849103026/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5181734967849103026&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5181734967849103026'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5181734967849103026'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/01/blog-post_30.html' title='कैसे हैं जनाब, थ्री इडियट से क्या हुई मुलाकात'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1721689943860633180</id><published>2010-01-11T18:04:00.002+05:30</published><updated>2010-01-11T18:16:00.196+05:30</updated><title type='text'>नव वर्ष नूतन सन्देश</title><content type='html'>आज हम जो भी सोचते हो, कल जरुरी नहीं वैसा ही हो। जीवन की नयी प्रणाली, नई विधा विकसित करने का अवसर हो, जीवन को अपने निर्धारित लछय की ओर ले जाने का इरादा हो तो हम जरूर कामयाब हो सकते हैं। क्या हम बेहतर भारत का निर्माण नहीं कर सकते हैं। आइये, बेहतर समाज के निर्माण में हम अपना योगदान दे सके, ऐसा कुछ करे। मानसिक रूप से विकलांग हो चुके लोगो के प्रति संवेदना रखते हुए कुछ नया करे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1721689943860633180?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1721689943860633180/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1721689943860633180&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1721689943860633180'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1721689943860633180'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='नव वर्ष नूतन सन्देश'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-116389344398935684</id><published>2009-12-12T22:47:00.002+05:30</published><updated>2009-12-12T23:35:00.344+05:30</updated><title type='text'>फिल्म पा ने मनोरंजन के साथ दिए गंभीर संकेत</title><content type='html'>कला मर्मज्ञ व् उसकी बारीकियों की समझ रखने वाले भी इस बात की गवाही देंगे कि फिल्म  पा ने मनोरंजन के साथ साथ बिमारियों के प्रति समाज की समझ को गंभीरता प्रदान की है। अमितजी की अभिनय के प्रति समर्पण देखते बनती है। खैर, आज की हिन्दी फिल्मो को लटके झटके से दूर गंभीर मसलो के प्रति ध्यान देने के लिए बखूबी प्रयास शुरू कर दिया गया है। खासकर, आमिर खान की कमजोर मानसिक बचचो को लेकर कुछ दिनों पूर्व आई फिल्म तारे जमी पर इसी तरह की एक संवेदनशील तस्वीर प्रस्तुत करती थी ।   जब हमारे फिल्म निर्माता करोडो रुपया फिल्मो के निर्माण में लगाते है तो उन्हें एक बेहतर समाजोपयोगी फिल्मो के निर्माण से गुरेज क्यूकर होता है समझ में बात नही आती। अच्छे भवन निर्माण की सभी तारीफ करते है, चाहे उसमे रहने वाले हो या उसे बहार से निहारने वाले। खासकर समाज के सबसे उपेछित विकलांग चाहे वह मानसिक हो या शारीरिक उनके भावनाओ व् संवेदनाओ को जब जब आवाज दी जाती है, समाज का हर वर्ग उससे अपना लगाव महसूस करता है। हद तो यह है की सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों में एक मानसिक विकलांग आरोग्यशाला स्थापित करने का निर्देश दे रखा है लेकिन कई ऐसे राज्य है जहा यह सुविधा सरकारों के द्वारा मुहैया नही करायी जा सकी है। हम रोजाना न जाने कितने ऐसे मामले रोज देखते है और सुनते है, लेकिन विकलांगो पर रहम बस उस श्मशान की अनुभूति मात्र होती है जैसे एक लाश फुकने के बाद शायद अब हमें तो मौत आयेगी ही नही। शारीरिक सौन्दर्य की अपनी एक सीमा है, लेकिन मानसिक तौर पर असुंदर लोगो की पहचान कौन करेगा , उन्हें स्वास्थ्य और सुंदर होने को कौन प्रेरित करेगा। हमें अपनी ओर और अपने आसपास भी नजर दौड़नी चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के पटना दौरे की कवरेज करने के बाद थक सा गया हु, उनके विचारो पर भी खासा लिखना चाहता था, फिर कभी .....&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-116389344398935684?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/116389344398935684/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=116389344398935684&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/116389344398935684'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/116389344398935684'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='फिल्म पा ने मनोरंजन के साथ दिए गंभीर संकेत'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' 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बिना उसकी सूचना को कैसे सरकारे लिक करती है यह सरकार की गतिविधियों की निगरानी करने वाले पत्रकार बेहतर जानते है। अपने विरोधियो पर नियंत्रण करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टियों द्वारा किए जाने वाले कुकृत्यों पर एक सम्पूर्ण किताबे लिखी जा सकती है। सामना में समानांतर मिडिया का दुरपयोग करते हुए जिस प्रकार शिव सेना अपनी खुराफातो का इजहार कर रही है, उस पर प्रेस कोंसिल ऑफ़ इंडिया को भी कड़ा रूख अपनाना चाहिए। कभी सचिन तेंदुलकर तो कभी किसी को निशाना बनाने वाले को सबक सिखाने की जरुरत है। सत्ता जिस प्रकार अपने साधनों का दुरपयोग करती है इस पर विचार करने की जरुरत है ।   जिस देश की आधी से अधिक आबादी भूख, अशिछा,स्वस्थ्य सुविधाओ से वंचित हो वहा इस प्रकार की ओछी हरकते करने वाले को  जनता अपने मताधिकार के माध्यम से सबक सिखाये। जनता को हर पल जागृत करने में युवा राष्ट्रिय्वादियो को सामने आना चाहिए। याद रखे देश के स्वाभिमान से खिलवाड़ करने वालो को इतिहास कभी माफ नही करेगा। बलिदानियों के इस देश में भारतीय मनस्विता उचतम स्तर की है, पहाड़ो की कन्दरा में निवास करने वाले, चीथडो में लिपटे रहने वाले लोगो के पास असीम उर्जा का स्रोत है। इनके ह्रदय में छिपे आग को हवा देने की हिमाकत कोई भी राजनितिक दल न करे। गरीबो की आह उन्हें ले डूबने के लिए काफी है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1897309671322577981?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1897309671322577981/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1897309671322577981&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1897309671322577981'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1897309671322577981'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/11/blog-post_23.html' title='प्रतिक्रियावादियों पर कार्रवाई हो, राष्ट्रीय एकता पर कर रहे घात'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6054010658776853883</id><published>2009-11-16T13:46:00.004+05:30</published><updated>2009-11-16T17:18:27.040+05:30</updated><title type='text'>साहित्य का महादलित परिवार है पत्रकारिता</title><content type='html'>हिन्दी साहित्य के बड़े परिवार में हिन्दी पत्रकारिता महादलित परिवार है। बहुत खूब मृणाल जी ने पटना में तिन दिन पहले कहा की, हमारा समाज जिस तेजी से प्रगति कर रहा है, उस तेजी से पत्रकारिता का विकास नही हुआ है। हिन्दी में शपथ लेने पर भले ही अबू आजमी को पीडा झेलनी पड़ी लेकिन इस प्रकरण में हिन्दी और रास्ट्रीय एकता मुखर हुई है। देश के लगभग सभी उर्दू अखबारों ने मनसे की कारगुजारियों की भर्त्सना तो की ही साथ ही रास्ट्र भाषा के सम्मान के प्रति भी अपनी चिंता प्रगत की। हिन्दी पत्रकारिता के महादलित होने का ही परिणाम है की हिन्दी के प्रति चंद बयानबाजी को प्रकाशित कर अपने कर्तब्यों की इतिश्री समझ ली। यह हिन्दी पत्रकारिता का ही कमाल है की बजार के समछ घुटने टेकते हुए हिन्दी के मानदंडो को दरकिनार करते हुए उसने भाषा का पुरा रूप ही बिगाड़ कर रख दिया है। हर भाषा की अपनी खुबशुरती होती है, उसमे लालित्य होता है उसे नस्त भ्रष्ट कर दिया गया है। राजनीति किसी को कभी अछूत समझती है तो कभी उसे हरिजन, अब तो उसे दलित बताया जा रहा है। इन के पीछे दौड़ती हिन्दी पत्रकारिता को पता नही की वो किसे अपनाए और किसे छोड़ दे। सुप्रसिद्ध आलोचक  नामवर सिंह को पटना में ही कहना पड़ा की अब तो पुस्तक विमोचन करते करते हाथ घिसा जा रहा है।यही होता है जब आप अपने पैनेपन को धर देते देते थक जाते है तो समाज आपकी भूमिका तय कर देता है । हिन्दी साहित्य व पत्रकारिता ने अपने अबतक के सफर में बहुत  परिवर्तन देखे है । साहित्य की भूमिका समाज का मार्गदर्शन करना है, बाजार के दबाब के बीच नए रास्ते तलाश करना है , न की बाजार के आगे घुटने टेकना है। साहित्य को अपने महादलित परिवार के बारे में भी सोचना होगा। पत्रकारिता का काम जनमत का निर्माण करना है । बाजार के आगे घुटने टेक देने से वह अपनी कमजोरी को ही प्रदर्शित कर रहा है । राजनेताओ को लिखने पढने से कोई वास्ता तो रह नही गया है, और वह कोई मार्गदर्शन व सलाह पर चलने को तैयार नही है। भद्र लोगो ने बोलना कम कर दिया है। वो भी पत्रकारिता के बदली हुई भूमिका से वाकिफ है। दो दिन पूर्व जब सचिन ने स्वयं को पुरे देश का चहेता बताया तो बालासाहेब के कलेजे पर साप लोट गया। अमिताभ बचचन भी सार्वजानिक मुद्दों पर बच कर बोलते है। लता मंगेशकर भी उतनी रूचि नही दिखाती । क्या मुठ्ठी भर गुंडों व मवालियों के डर से हर खासो आम सहमा रहे तब सरकार, कानून व संविधान की जरूरत ही क्योकर है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6054010658776853883?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6054010658776853883/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6054010658776853883&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6054010658776853883'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6054010658776853883'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='साहित्य का महादलित परिवार है पत्रकारिता'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-9007250903244112202</id><published>2009-10-31T22:30:00.003+05:30</published><updated>2009-10-31T23:37:47.284+05:30</updated><title type='text'>कांग्रेस की सफलता और बीजेपी खस्ताहाल</title><content type='html'>राहुल गाँधी ने जबरदस्त चुनावी प्रबंधन किया, कांग्रेस को खेमेबाजी से बचाते हुए राज्यों को विकास के सपनो से जोड़ा। हालत उनके लिए भी कम मेहनत व जद्दोजहद वाला नही था। भारतीय जनता पार्टी ने मौका गवा दिया। उनकी आपसी फूट व कलह ने तीन राज्यों के चुनाव में पहले ही कांग्रेस को वाक ओवर दे दिया । पार्टी विथ डिफ़रेंस की छवि धूमिल होती जा रही है। कांग्रेस के वंशवाद, परिवारवाद, सत्तालोलुपता के विरूद्व धारदार अभियान चलाने में नाकाम रहे भाजपा नेतृत्व को अपनी अपनी कुर्सी की ही पड़ी थी। संघ नेतृत्व के प्रति आस्था जताने वालो ,उनसे सर्जरी की मांग करने वालो, जसवंत प्रकरण पर अपनी बेचैनी प्रदर्शित करने वालो की कोई कमी पार्टी में नही रही। बिना मजबूत विपछ के सत्ता व शासन में रहने वाली सरकार का नजरिया जनता के प्रति कैसी हो सकती है, इसकी उम्मीद पाठक कर सकते है। कांग्रेस ने बड़ी सोच समझ कर खासकर मुबई में राज ठाकरे को पुष्पित पल्वित होने दिया। शिव सेना के बड़बोले पण की हवा निकाल दी। आरुनाचल में कांग्रेस की सफलता लगभग तय थी। उतर पूर्वी राज्यों की और देश की शेष दछिन पंथी पार्टियों के बीच अब भी दुरी बनी हुई है। यह खतरनाक स्थिति है। वाम पंथी नक्सली संगठनो द्वारा नेपाल से बिहार, उडीसा होते हुए आन्ध्र प्रदेश तक बनाया गया रेड कारीडोर भारतीय एकता व अखंडता के लिए गंभीर चुनौती है। राजनीतिक दल खास कर राष्ट्रीय पार्टिया आपसी खीचतान में न उलझ कर राष्ट्रीय समस्याओ के प्रति गंभीर हो तो कोई बात  बने। जिस देश में लाखो गरीबो के घर बच्चो को अब भी भर पेट भोजन नही मिल पा रहा हो वंहा  आपसी फुट व अंतर्कलह से आख़िर हम किसे मुर्ख बनाते है। कलयुग में दरिद्रनारायण के घर ही नारायण का अवतार होने वाला है। जो सही मायनो में हमारा पथ प्रदर्शक, दुखो को हरने वाला होगा। हमारी गति मति यह है की हम इन्हे ह्रदय से लगाते चले। याद रखे की इस देश में कितने बादशाओ , शहंशाओ को इतिहास ने अपने पैरो तले  कुचल दिया है। आपकी सारी  नफरते, क्रोध, बेईमानी धरी की धरी रह जाएँगी। अपने साथ समाज व समुदाय का भला नही सोचने वालो का जीवन व्यर्थ ही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-9007250903244112202?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/9007250903244112202/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=9007250903244112202&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9007250903244112202'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9007250903244112202'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='कांग्रेस की सफलता और बीजेपी खस्ताहाल'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6897653720265256300</id><published>2009-09-23T15:47:00.005+05:30</published><updated>2009-09-23T16:32:02.605+05:30</updated><title type='text'>हिन्दी पट्टी की संवेदनाओ को कब मिलेगी जुबान</title><content type='html'>हिन्दी दिवस बीत गया, कई लोगो ने इस दिवस के नाम पर अपने अपने तरीके से कर्मकांड को पुरा किया। भाषा की पीडा को समझाने व् समझाने में अपनी उर्जा झोक दी। हिन्दी पट्टी की समस्याओ और भाषा के संकट के मध्य संबंधो को जोड़ने में असफल रहे।  आखिरकार कब हिन्दी स्थानीय समस्याओ और पीडा को दूर करने का सशक्त माध्यम बनेगी। नवजागरण काल का तेवर हिन्दी में कब लौटेगा। माना की उस वक्त आजादी सम्पूर्ण राष्ट्रीय आन्दोलन का लक्छ था हिन्दी उसकी वाहिका थी, लेकिन आज जब दूसरी आजादी की जरुरत महसूस की जा रही है, क्या हिन्दी को अपनी भूमिका नही बदलनी चाहिए।  हिन्दी अखबारों ने अपनी भूमिका बदल ली है लेकिन दुसरे संदर्भो में, वह विशुद्ध तौर पर वयवसाय से जा मिली है। वहा कारपोरेट कल्चर हावी होता जा रहा है। उसे आम आदमी की पीडा सोने के बढ़ते घटते भावः से कमतर महसूस होता है। महानगरीय कल्चर उसे अपनी ओर खीच रहा है। उसे हर आदमी मशीन में तब्दील होता दिख रहा है। हिन्दी के साथ नये प्रयोग किए जा रहे है जहा हिंगलिश में उसका नया रूप देखने को मिल रहा है।  हिन्दी पहले भी देश की आत्मा थी, कल भी रहेगी, कोई इस मुगालते में न रहे की पल पल मरती अन्य भाषाओ की भाति इसकी मौत होने जा रही है। लेखको को जनसरोकारों वाले मुद्दों को साहित्य का अधर बनाना होगा, रोमांटिक खयालो में आम आदमी की पीडा को नजरंदाज नही किया जा सकता। मंचीय कविताओ को भौदेपन से मुक्त कर धार देनी होगी। भाषा के साथ जीना होगा , उसमे संवेदनाओ की प्रबल हिस्से को महसूस करना होगा। आईये, इस ओ़र हम अपने कदम को आगे बढाये, उस पुण्य के भागी बने जिसे हमारे पूर्वजो ने अपने खून और पसीने से सीचा है। थोड़ा सा प्रलोभन या पुरस्कार हमें अपने मार्ग से नही डिगा सके।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6897653720265256300?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6897653720265256300/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6897653720265256300&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6897653720265256300'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6897653720265256300'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/09/blog-post.html' title='हिन्दी पट्टी की संवेदनाओ को कब मिलेगी जुबान'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-94100443242072207</id><published>2009-08-27T12:37:00.003+05:30</published><updated>2009-08-27T13:41:42.566+05:30</updated><title type='text'>भाजपा आज नही जनसंघ के ज़माने से ही भटक चुकी है</title><content type='html'>आप कभी नवजागरण कालीन हिन्दी पत्रकारिता पर नजर डाले। पुरानी फाइलों को खंगाले। आप देखेंगे की भाजपा आज नही जनसंघ के ज़माने से ही भटकी हुई है। मेरी समझ जित्तनी है, उसके मुताबिक अटलजी भारतीय सनातन राजनीतिक परम्परा के अन्तिम राजनेता है। सबको साथ लेकर चलने की समझ न तो जनसंघ ही विकसित कर सका न ही भाजपा उस परम्परा का निर्वाह कर सकी है। भारतीय राजनीति की दिशा व् दशा तब से ही बदलनी शुरू हो चुकी थी जब कांग्रेस में गर्म व् नरम दल के बीच मत्भिनता चरम पर थी। १९३० के पूर्व गांधीजी के कई प्रयोग असफल सिद्ध हो चुके थे। गाँधी भारतीय समाज की धड़कन को समझाने का प्रयास कर रहे थे। जिन्ना को लेकर पब्लिशिटी बटोरने के इक्छुक राजनेताओ को जनसंघ के पूर्व की हिंदूवादी सहिष्णु विचारधाराओ का भी विश्लेषण करना चाहिए। उसमे आए भटकाव की भी चर्चा करनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए की कैसे ब्रिटिश सरकार ने रास्ट्रवादी पत्रकारों व् लेखको को मौत के घाट पहुचा दिया। कई लोग जेलों की सजा काटे। क्यो गणेश शंकर विद्यार्थी को बीच सड़क पर दंगा फसाद करने वालो ने कानपूर में मार गिराया। जिन्ना को उर्वर भूमि प्रदान करने वालो में क्या बड़े राजनेताओ के साथ भारतीय मानसिकता में आ रहे परिवर्तन की भूमिका नही थी। इस देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है की हम हरे चश्मे से लाल देखना चाहते है। अपनी गौरव गाथा को भुलाना कोई हम से सीखे। आज कितने घर है जहा बच्चो कों भारतीय वीरो की गाथा, भगत सिंह,असफाक , बिस्मिल की कहानिया सुनाये जाते है, शिवाजी, राणा प्रताप, सावित्री, लक्छमी बाई, सरवन कुमार की जानकारिया दी जाती है। बाजार की भाषा में बात करे तो अच्छे प्रोडक्ट के लिए थोडी तयारी तो करनी ही होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' 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मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5368705829702421320</id><published>2009-08-11T13:37:00.003+05:30</published><updated>2009-08-11T15:35:00.140+05:30</updated><title type='text'>पीठ पीछे वार कर रहा बाजार हमारी जेब पर</title><content type='html'>महंगाई को लेकर पुरे देश में हाय तौबा मची है। सुखा व् बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे लोगो के ऊपर महंगाई की मार तेज है। स्वैईन फ्लू ने अपने पाव जमने शुरू कर दिए है। मिडिया सब कुछ को हलके में ले रही है सिर्फ स्वैईन फ्लू को छोड़ कर। अपनी प्रथामिकताये तय करने मिडिया का कोई जबाब नही है। तथ्यों के पीछे न जा कर हलके में कोई बात कैसे की जाती है यह इसे  वर्तमान समय में सिखा जा सकता है। जब अमेरिका, जापान सहित एनी देशो में  लाखो लोग स्वैईन फ्लू से पीड़ित है और मरने वालो की संख्या कही ८५ तो कही ३०० के आसपास है। फिर भारत में इसको लेकर हाय तौबा मचाना कहा की फितरत है। शहरो में मरने वाले लोग मिडिया कोई दिख जाते है, लेकिन दूर गाव में जो भूख से मर रहे है, उन्हें प्रशासन भी रोग से मौत बता देता है। चीनी की कीमत ३२ रूपये हो गई है तो दाल आम आदमी केथाली से गायब होता जा रहा है। इथनौल के उत्पादन को लेकर पहले तो चीनी के उत्पादन पर झटका लगा, फिर बिक्री कैसे हो। हद तो यह है की बिहार जैसे सर्वाधिक गन्ना उत्पादक राज्य में भी दुसरे राज्यों की तरह धन अर्जित करने को लेकर सरकार के स्तर से ही गन्ना से सीधे इथनौल बनने की अनुमति देने की मांग की जा रही है। कई बड़ी कंपनियों ने तो हजारो करोड़ के प्रस्ताव भी दे रखा है ।   राज्य सरकार भी केन्द्र की ओर उम्मीद लगाये बैठी है । विकास की  नीति बनाने वालो को धरती पर रह कर सोचना होगा। चीनी के बाद गुड की सोचे तो, सरकारी नीतियों की पोल ही खुल जाती है। गाव चौबारे में गुड आज की तारीख में दुर्लभ चीज हो गई है। गुड उत्पादन पर इतने तरह के प्रतिबन्ध लगा दिए गए है की कोई किसान सोचता तक नही, अगर उत्पादन करता भी है तो सिर्फ अपने उपयोग भर ही। कई खाद्य पदार्थ तो खेत खलिहानों से गायब होती जा रही है। कोई इस पर शोध करे तो कई रोचक जानकारिया प्राप्त हो सकती है। आप कविताये लिख कर या कंप्युटर चलाकर ही अपने पेट नही भर सकते, हमें अपने अन्दताओ    की ख़बर रखनी ही होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5368705829702421320?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5368705829702421320/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5368705829702421320&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5368705829702421320'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5368705829702421320'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/08/blog-post.html' title='पीठ पीछे वार कर रहा बाजार हमारी जेब पर'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7666994995848685000</id><published>2009-07-25T22:31:00.003+05:30</published><updated>2009-07-25T23:14:19.831+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तात्कालिक'/><title type='text'>लूटती रही अस्मत, न्यूज़ रूम में शुरू हुआ विश्लेषण</title><content type='html'>पटना के भीड़ भरी सड़क पर गुरुवार को एक महिला की अस्मत लुटती रही। उसके कपड़े  तार तार किए जाते रहे,&lt;br /&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;जैसे ही अखबार के दफ्तर में ख़बर पहुची सन्नाटा पसर गया। सब ख़बर के हर पहलु को जानने को बेताब हो उठे। फिर शुरू हुआ विश्लेषण का सिलसिला। कोई महिला को बाजारू बता रहा था तो कोई पुलिस प्रशासन की गर्दन नाप रहा था। कोई इस बात को समझने को तैयार नही था की एक औरत की सरेआम हो रही बेइज्जती, हम सबो के गाल पर एक करार तमाचा है। मानसिक रूप से विकलांग हो चुके युवक या एक स्त्री के बाजार तक पहुचने के  पीछे हम सबो की कोई सामाजिक जिमेमेवारी है भी या नही । हद तो यह है की एक दो सज्जन तो तीसरे दिन यानि आज सरकार द्वारा भारी सामाजिक  दबाब में आने के बाद आईजी से लेकर छोटे पदाधिकारियों का तबादला कर दिए जाने को भी एक ग़लत महिला के चच्कर में की गई कार्रवाई बताते  रहे। प्रेम के नाम पर, पैसे के नाम पर महिलाओ  का मानसिक  शारीरिक शोषण करने वाले लोगो की कमी नही है। उन्हें दुनिया के हर संबंधो में सिर्फ व सिर्फ सेक्स की बू आती है। कोई मजबूर महिला मिली नही की उसका शोषण किया जाने लगता है। हद तो यह है की इसके बीच पड़ने वालो को ही बाद में अपने जान की बन आती है। व्यक्तिगत तौर पर लोगो ने किसी सामाजिक बुराई को रोकने के लिए हस्तछेप करना बंद कर दिया है। लेकिन बीच सड़क पर किसी के साथ अनहोनी होती रहे और लोग तमाशबीन बने रहे यह पचने वाली बात नही है । यह सामाजिक नपुंसकता को दर्शाता है। माना की कोई महिला ग़लत हो सकती है, लेकिन  उसके साथ भी शारीरिक बल का प्रयोग करना, बीच रास्ते पर नंगा करने की कोशिश करना इसे किसी भी  सूरत से उचित नही ठराया जा सकता है । शर्मनाक घटनाओ की भर्त्सना की जानी चाहिए न की उसे किसी की गलती का नाम देकर उससे पीछा छुडाना या हलके में लेना चाहिए ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7666994995848685000?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7666994995848685000/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7666994995848685000&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7666994995848685000'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7666994995848685000'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/07/blog-post_25.html' title='लूटती रही अस्मत, न्यूज़ रूम में शुरू हुआ विश्लेषण'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7632920653230154480</id><published>2009-07-24T18:44:00.002+05:30</published><updated>2009-07-24T18:58:39.758+05:30</updated><title type='text'>सच का सामना कितना सच</title><content type='html'>इनदिनों बिंदास बोली, रहन सहन , फिल्म,  प्रदर्शन , मिडिया के नाम पर अर्ध सत्य को सत्य बनाने की हर सम्भव कोशिश की जा रही है ।  एक निजी चैनल पर संचालित किए जा रहे सच का सामना शीर्षक कार्यक्रम में जी प्रकार के साक्छात्कार दिखाए जा रहे है उसे बदलती मानसिकता के नम पर परोसा जन किसी भी दृष्टी से उचित नही है। बाजार आपके घर को नंगा व् बेपर्द करता जा रहा है इसकी समझ भी रखनी होगी। सच के नम पर पोल्योग्रफिक मशीन के सहारे उलुलजुलुल प्रश्नों को रखना, उसे प्रसारित करना ग़लत है प्रवृति को बढ़ावा देना होगा। आप आखिर क्या चाहते है, सभ्य समाज की रूप रेखा आपके दिमाग में क्या है , इसे तो पहले स्पस्ट करना होगा। क्या मर्यादाओ का उलाघन ही हमारी आजादी की परिचायक है। अपने अर्ध्य सत्य को हम कबतक मशीनों के शेयर सत्य साबित करते रहेगे ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7632920653230154480?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7632920653230154480/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7632920653230154480&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7632920653230154480'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7632920653230154480'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/07/blog-post_24.html' title='सच का सामना कितना सच'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6921340050815196270</id><published>2009-07-20T17:47:00.002+05:30</published><updated>2009-07-20T18:14:23.949+05:30</updated><title type='text'>खाद्य आपूर्ति की प्रणाली ध्वस्त</title><content type='html'>राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य वितरण की जनवितरण प्रणाली ध्वस्त हो चुकी है। गरीबो और निम्न मध्यम स्तर के लोगो के जीवन के लिए यह महत्वपूर्ण योजना है। जिस देश में ७० फीसदी आबादी प्रतिदिन १६ रूपये पर गुजरा करता हो, महंगाई चरम पर हो , वहा  इस प्रमुख योजना का बेमौत मरना शोक का विषय है। हल ही में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश दी पि बढावा की अध्छ्ता में एक कमिटी का गठन कर इसकी जाच कर अपनी अनुशंसा करने को कहा है।  बधवा कमेटी ने पॉँच राज्यों का दौरा क्र के अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौप दी है। शेष राज्यों का दौरा कमेटी कर रही है। आयोग का स्पस्ट मानना है की पुरी प्रणाली को दुरुस्त करने की जरूत है। बीपीएल, अन्त्योदय के नम पर गरीबो को सस्ता अनग सुलभ करना सपना हो गया है। मध्यम वर्गीय परिवारों की आधी से अधिक कमाई दो जून की रोटी के जुगाड़ में ही चुक जा रही है। अनाज के गोदाम भरे है , विदेशो से अनाज मंगाया जा रहा है, लोगो को राशन की लम्बी लाइनों में राशन किराशन नही मिल पा रही है । धोदा इधर भी देखिये।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6921340050815196270?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6921340050815196270/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6921340050815196270&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6921340050815196270'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6921340050815196270'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/07/blog-post_20.html' title='खाद्य आपूर्ति की प्रणाली ध्वस्त'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6863166362291713770</id><published>2009-07-03T16:44:00.004+05:30</published><updated>2009-07-03T17:22:16.276+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तात्कालिक'/><title type='text'>समलैगिकता को लेकर हो रहे सब गुमराह</title><content type='html'>समलैगिकता को लेकर इन दिनों गली कूचो, कोर्ट व  धार्मिक संगठनो, नेताओ के मध्य हरतरफ चर्चा हो रही है। मनोवैज्ञानिको की थ्योरिया बताई जा रही है।  हर कोई अपने अपने तरीके से इसकी व्याख्या कर रहा है। कई बार हमें लगता ही नही की हम आखिर कौन सी विरासत आने वाले समय के लिए छोरे जा रहे है। जिस देश में आधी से अधिक आबादी गरीबी रेखा से निचे गुजरबसर अपना जीवन करती हो, वहा न्यायालयों, संसद, और विद्वद समाज की उर्जा समलैगिकता को अनुमति देने या न देने के निर्णय के बीच व्यय हो रही है। यौन संबंधो की उच्सृखालता न केवल सार्वजानिक तौर पर देखि जा रही है बल्कि इसने अब अनिवार्य रूप से मांगो का, धरना, प्रद्र्सनो को अपना हथियार बना लिया है। प्रकृति के नियमो का उल्लंघन करने की सजा भुगतने के लिए तैयार रहे। आपके विचारो का वहा कोई देखने वाला  नही होगा। भारतीये समाज का यह विभत्स्य रूप सायद ही कभी देखने को मिला हो ।  धारा ३७७ को लागु करने वाला लार्ड मैकाले माना भारतीय ज्ञान व् व्यवहारों का विरोधी था लेकिन उसे इतनी समझ जरूर थी, की इस समाज के लिए  क्या  उचित है और क्या अनुचित। जानवर भी अपने सामान जीव के साथ  सामान्तया यौन व्यवहार नही करते। असामान्य तौर पर तो कोई भी कुछ भी करने को स्वतंत्र है। १८६० इसवी से अबतक आईपीसी की धारा ३७७ लागु है, अंग्रेजो से ज्यादा खुलापन शायद देखने को मिलता है, क्या फिर से हम किसी गफलत के  शिकार होने नही जा रहे है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6863166362291713770?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6863166362291713770/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6863166362291713770&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6863166362291713770'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6863166362291713770'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='समलैगिकता को लेकर हो रहे सब गुमराह'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5698406398893563664</id><published>2009-06-09T22:02:00.002+05:30</published><updated>2009-06-09T22:21:26.525+05:30</updated><title type='text'>बात दुःख या खुश होने की नही</title><content type='html'>बेवजह टिपण्णी किए जाने को लेकर साथियों के विचारो का स्वागत है। बात दुःख या खुश होने की नही है । सर्वप्रथम मै स्पस्ट कर दू की लिखने के बाद मै किसी से अपने विचारो की सहमती या असहमति की उम्मीद नही रखता । न ही किसी के टिपण्णी को लेकर मुझे शिकायत है । अति उत्साह में आप या हम अपनी समझ को ही प्रर्दशित कर देते है । ब्लॉग लेखन मेरे लिए रोग या नशा नही है। कोई मेरे ब्लॉग पर आए या नही इसकी भी उम्मीद नही रखता। हा, अच्छे विचारो का स्वागत है । कई लोग बेहतर लिख रहे है, उन्हें किसी के हिट्स की चिंता नही है। हमें उनसे प्रेरणा मिलती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5698406398893563664?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5698406398893563664/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5698406398893563664&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5698406398893563664'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5698406398893563664'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/06/blog-post_09.html' title='बात दुःख या खुश होने की नही'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3204827229252362740</id><published>2009-06-08T14:43:00.003+05:30</published><updated>2009-06-08T14:56:53.457+05:30</updated><title type='text'>टिपण्णी करने में संयमता का अभाव</title><content type='html'>बहुत दुखद बात हैं लेखन की स्वतंत्रता ने ब्लोगरो को उच्च्श्रीन्ख्ल बना दिया हैं । खास कर विषय की गंभीरता को समझे बिना ही टिपण्णी तक कर दी जाती हैं । ऐसे लोगो को अपने आसपास नजर दौड़नी चाहिए । टिपण्णी सकारात्मक हो विषय को स्पस्ट करने में सहायक हो तो बात समझ में आती हैं ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3204827229252362740?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3204827229252362740/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3204827229252362740&amp;isPopup=true' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3204827229252362740'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3204827229252362740'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/06/blog-post_08.html' title='टिपण्णी करने में संयमता का अभाव'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1207822237690662944</id><published>2009-06-06T18:39:00.003+05:30</published><updated>2009-06-06T21:59:35.841+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चर्चा में विकास'/><title type='text'>गरीबो की सुनो वो तुम्हरी सुनेगा</title><content type='html'>सर्व प्रथम बहुत दिनों बाद ब्लॉग पर आने के लिए माफी चाहता हु। मारकेश के प्रभाव से गुजरने का ताजा अनुभव हुआ है। लोकसभा चुनाव की भागमभाग अलग रही। कई विचारो के बीच से गुजरता रहा। काफी कुछ जीवन में अनुभव हुआ। फिलवक्त सरकारी तंत्रों के क्रिया कलाप की चर्चा करूँगा। अकसर ही हमारे द्वारा चुनी गई सरकारे अजीबो गरीब प्रथामिक्ताये तय करती है । शहरों के लिए बिजली पानी आवास की जुगाड़ सरकार करे हम अपने अपने कामो में दौलत अर्जित करने में लगे रहे । देहातो में अवश्यक सुविधाओ के लिए लोग तरस जाए । गावो के विकास की बात होती है तो कहा जाता है की वहा सुविधाओ के विकाश के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। गाव के लोग स्वयं ही अपनी सुविधाओ की देख रेख करेंगे। शहरो के लिए कर्मचारियों की फौज हो और गाव के लोग अपनी देखभाल ख़ुद करे। यह कैसा विकास है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1207822237690662944?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1207822237690662944/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1207822237690662944&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1207822237690662944'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1207822237690662944'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/06/blog-post.html' title='गरीबो की सुनो वो तुम्हरी सुनेगा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7155112824600724770</id><published>2009-04-25T18:46:00.003+05:30</published><updated>2009-04-25T19:15:07.441+05:30</updated><title type='text'>कैसे करे नेताओ पर भरोशा</title><content type='html'>१५ वी लोकसभा के गठन के लिए चुनाव अभियान तेज हैं ।  नेताओ के बीच गलाकाट प्रतिस्पर्धा जारी हैं । इनके बयानों के निहितार्थ निकलना मुश्किल हैं। जनता की मुलभुत समस्याओ से अलग बोलने में ये माहिर हैं। इनके चाल व् चरित्र को जागरूक मतदाता समझ रहे हैं। कई नामचीन नेता लाखो करोडो रूपये मतदाताओ के बीच वाट रहे हैं। कोई देखने वाला नही हैं। नोटों पर बिकने वाली जनता को इनके द्वारा किए जाने वाले लूट पर बोलने का क्या अधिकार हैं । जनता को प्रतिकार की भाषा सिखानी होगी। उन्हें मतदान के दौरान मतदान अधिकारी से किसी भी पसंदीदा उमीदवार के न होने पर अपना अभिमत दर्ज करना चाहिए  आख़िर नेताओ पर जनता कैसे भरोसा करेराजनितिक दलों ने गठबंधन तैयार करे लिया हैं सत्ता में हिस्सेदारी के लिए   । दुर्भाग्य यह हैं की किसी भी गठबंधन की और से कोई संयुक्त घोसना पत्र जारी नही किया गया हैं । कौन चुनाव बाद किस करवट बैठेगा कहना मुश्किल हैं । भारतीय लोकतंत्र के तारीफ करने वाले ग्रामीण  क्षेत्रो में जाकर मतदान के पूर्व की हालातो का जायजा लेना चाहिए ।  २३ को  मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र में  था । जार्ज को कैसे राजनितिक रूपसे भुला दिया गया&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7155112824600724770?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7155112824600724770/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7155112824600724770&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7155112824600724770'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7155112824600724770'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/04/blog-post_25.html' title='कैसे करे नेताओ पर भरोशा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1302782015745026369</id><published>2009-04-08T01:08:00.001+05:30</published><updated>2009-04-08T02:17:07.561+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='त्वरित टिपण्णी'/><title type='text'>नोट, जूता और भारतीय राजनीति</title><content type='html'>सर्दियों का मौसम समाप्त हो चूका है, गर्मी का प्रकोप बढाने लगा है. चुनाव के इस मौसम में क्या नेता क्या पत्रकार सभी की त्योरिया चढी हुई है. अभिनेता परदे पर चरित्र बदलते थे, अब तो लगे हाथ उन्हें भी पाला बदलने का मौका मिल गया है .कई दिनों से चुनाव कवरेज़ में लगे होने के कारन ब्लॉग के लिए अलग से लिखना मुस्किल हो रहा था. खैर, नेताओ के नोट बदलते हाथो के बीच एक पत्रकार के हाथो में जूता देख कर मन ग्लानि से भर गया. इसी तरह से देश का हर नागरिक अपनी मर्याद की सीमाए लांघता फिरेगा तो काहे का लोकतंत्र व काहे का चुनाव.  हथियार उठाने वाले हाथो को जूता उठाने वाले हाथ भला कैसे रोक सकते है. राष्ट्रिय राजनीति तथा पत्रकारिता की नीव हमारे पुरखो ने इसी लिए रखी थी. अब तो सोचने का वक्त आ गया है की, २५ करोड़ की आबादी के लिए अपनाया गया लोकतंत्र क्या एक अरब से अधिक भारतीयों के लिए मुनासिब नहीं रह गया है. पश्चिम से क्या जूता संस्कृति तक आयात करने की मानसिकता वाले हम हो गए है.सत्य का सामना करने का साहस हमारे अन्दर नहीं रह गया है. देश का सौभाग्य है की १५ वी लोकसभा के लिए सबसे अधिक मतदाता युवा वर्ग से है. क्या एक बार अपनी मातृभूमि के लिए अपने आने वाले सुनहरे कल के लिए जाति,संप्रदाय, छुद्र राजनीति से ऊपर उठाकर देश के नव उत्थान के लिए संकल्पित हो कर स्वच्छ छवि के उम्मीदवार को संसद के अंदर भेजने का प्रयास नहीं कर सकते.  नोट बाटने वाले हाथो से धन लेकर फिर उन्हें सार्वजानिक धन लुटने का अवसर प्रदान करना कितना खतरनाक है इसकी कल्पना करना मुश्किल है. भ्रष्टाचार को सार्वजनिक व सामूहिक रूप प्रदान करना राष्ट्रद्रोह है. भूख,गरीबी व लाचारी को पैसे से कीमत अदा कर के अपने निजी उपयोग में लाना, ओछी मानसिकता है. चुनाव आचार संहिता का बार बार उलंघन किया जाना संगेये  अपराध घोषित किया जाना चाहिए. किसी जर्नलिस्ट को भी किसी व्यक्ति विशेष के साथ आभ्द्रतापूर्वक पेश आने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है. महात्मा गाँधी, राजेंद्र प्रसाद सहित कई शहीद पत्रकारों ने अपने खून पसीने से पत्रकारिता को सीचा है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1302782015745026369?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1302782015745026369/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1302782015745026369&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1302782015745026369'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1302782015745026369'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='नोट, जूता और भारतीय राजनीति'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-544988164853060560</id><published>2009-03-12T15:45:00.004+05:30</published><updated>2009-03-13T13:05:24.880+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चुनाव'/><title type='text'>लोकसभा चुनाव में कैसे नेताओ का हो चयन</title><content type='html'>होली की खुमारी ख़त्म होने के बाद अब सभी का ध्यान आगामी लोकसभा चुनाव पर होगा । कई सियासी पार्टिया पूर्व से ही जोड़ तोड़ में जुट गयी हैं । भारतीय लोकतंत्र के इस महापर्व में सबो की भागीदारी हो, सचरित्र राजनेता संसद में पहुचे , इसकी भी जिम्मेवारी हम सभी को लेनी होगी ।&lt;br /&gt;एक हास्य कवि महोदय ने फरमाया की जब मतदाता सूचि में गडबडी के कारण फुआ मौसा जी के साथ होगी, पत्नी की जगह पडोसन और बहन के स्थान पर बीबी का नाम होगा तो मतपेटी से सचरित्र नेता भला कैसे जन्म लेगा  बात    भी सही हैं । हमारे लिए सभी काम निहायत जरुरी हो जाते  हैं जबतक वे निजी प्रतीत होते हैं लेकिन जब देश की बात आती हैं तो तरह तरह की परेशानी व पीडा होने लगती हैं । मुख्य चुनाव आयुक्त ने पिछले दिनों पटना में कहा की मतदाताओ में मतदान के प्रति रूचि जागृत करने के लिए अभिनेताओ का सहयोग लिया जायेगा । मुझे इस पर कोई आपति नहीं हैं लेकिन जरा सोचिये की कितनी भयावह  परिस्थिति    हैं । कम पढ़े लिखे, मजबूर,गरीब मतदाताओ को उपकृत करके उन्हें अपने पछ में वोट देने को मजबूर किया जाता हैं, लेकिन जो सछम हैं , वे अगर अपनी जिम्मेवारियों के प्रति लापरवाह हैं तो उसका दोष किसे दिया जाये । देश की मौजूदा परिस्थिति को देखते हुए हम सब का दायित्व हैं की नेताओ के चयन में सतर्कता बरती जाये ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-544988164853060560?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/544988164853060560/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=544988164853060560&amp;isPopup=true' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/544988164853060560'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/544988164853060560'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/03/blog-post.html' title='लोकसभा चुनाव में कैसे नेताओ का हो चयन'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-219689675957209230</id><published>2009-02-24T11:59:00.004+05:30</published><updated>2009-02-24T12:28:42.442+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='टिप्‍पणी'/><title type='text'>स्‍लमडॉग मिलेनियर को आस्‍कर  भारतीय सिनेमा के लिए चुनौती</title><content type='html'>मैं यह नही कहता कि दूसरों के द्वारा की जाने वाली तारीफ बुरी होती है। किसी भी कार्य का मूल्‍यांकन स्‍वयं तब समझ में आता है, जब दूसरे उसकी तारीफ करते है।  लेकिन जब आपके कार्यो को दूसरे अर्थो में तारीफ के काबिल बना दिया जाए तो थोडी देर के लिए ठहरकर सोचना पडता है। प्रसन्‍नता के साथ हमें आत्‍म विश्‍लेषण करना होगा। यह पुरस्‍कार भारतीय सिनेमा के लिए एक चेतावनी की माफिक है। भारतीय सिनेमा के लिए जो अस्‍प़श्‍य चीज है गरीबी  उसने दो करोड की राशि जी‍ती है। मैं यह नही कहता की भारतीय सिनेमा गरीबी को प्रदर्शित करने में नाकाम रही है। लेकिन यार्थाथ से कटती जा रही हिंदी सिनेमा को देखना होगा कि आखिर भारतीय दर्शकों को हम क्‍या देखने को मजबूर किये जा रहे है। ग्‍लोबलाइजेशन का मंत्र ही यही है कि जो सबसे अधिक जानकारी अपने अनुभवों से रखेगा वही सफल होगा।  स्‍लमडॉग के प्रदर्शन से भद्र लोगों को शक है कि उसने चीटिंग की है। भारतीय फिल्‍मों पर आप गौर करे तो पायेंगे कि यह स्‍टॉर आधारित है। यहां के स्‍टार बडे बडे लोकेशनों पर विदेशों में शुटिंग करना बेहतर समझते है।  गजनी का हीरो अपनी  प्रेमिका की हत्‍या का बदला लेने के लिए तत्‍पर रहता है। वह अपनी प्रेमिका को मुगालते में रखना चाहता है इसलिए टेम्‍पों पर चढता है, अविश्‍वनीय तरीके से खलनायक के डेन में बिना हथियार के प्रवेश कर जाता है। रब ने बना दी जोडी में भी नायक स्‍टार है। आप सोचे कि बिजली विभाग का कर्मचारी क्‍या किसी सूमों पहलवान से लडकर पत्‍नी के प्रेम को पाने की जुरूत कर सकता है। बिल्‍लू बार्बर भी नायक बनता है तो इसीलिए कि सुपरस्‍टार उसका दोस्‍त है.  भारतीय सिनेमा अंडरवर्ल्‍ड, भूत, महानगरीय जीवन, सेक्‍स, विवाहेत्‍तर संबंध जैसे विषयों पर सिमट कर रही गयी है. इनका उदेश्‍य एक साथ दो हजार स्‍क्रीन पर मल्‍टीप्‍लेक्‍सों पर प्रदर्शित किया जाना मात्र रह गया है.  गरीबी के प्रदर्शन के अपने मायने है. हमें अपने फिल्‍मों को उन परिस्थितियों से संबंद्व करना होगा जहां जाकर आम आदमी उससे अपना जुडाव महसूस कर सके.  सच्‍चा पुरस्‍कार आम आदमी के समर्थन से मिलता है. किसी आस्‍कर द्वारा समर्थन दिये जाने के बाद उसको अंगीकार करना और उसपर झूमना मुर्खता हो सकती है. हमें अपनी प्रतिभा पर भरोसा रखना होगा. निसंदेह एआर रहमान, गुलजार प्रतिभावान है. बालीवुड में अगर वे अपनी ओर से कुछ ऐसा जोड सके जिससे उसकी मुख्‍य धारा में परिवर्तन हो, वह आम आदमी से जुड सके तो यह प्रशंसनीय होगा.  दूसरों की तारीफ के बाद अपनी पीठ ठोकना उचित नही है.   पिंकी के लिए यह पल यादगार बन गया। उसने विदेशी चकाचौंध को अपनी आंखों से देखा। इसके पूर्व भी हमें कई आस्‍कर मिले है, लेकिन इस बार भी जो सम्‍मान मिला उससे कही कोई लगाव महसूस कर पाना मुश्किल है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-219689675957209230?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/219689675957209230/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=219689675957209230&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/219689675957209230'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/219689675957209230'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/02/blog-post_24.html' title='स्‍लमडॉग मिलेनियर को आस्‍कर  भारतीय सिनेमा के लिए चुनौती'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1106029268036944692</id><published>2009-02-21T01:07:00.003+05:30</published><updated>2009-02-21T02:23:22.015+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विचार बिन्दु'/><title type='text'>मौत का लाइव टेलीकास्ट सभ्य समाज के मुह पर एक तमाचा</title><content type='html'>अभी अभी यह जानकारी मिली की जेड़ गुडी जो की एक रियलिटी शो में शिल्पा शेट्टी को लेकर कभी नस्लीय टिपण्णी कर बैठी थी, उनकी संभावित मौत को लाइव टेलीकास्ट करने की तयारी की जा रही है। जेड़ गुड्डी कैंसर से पीड़ित है । उनकी मौत को टीवी पर सीधा प्रसारित करने के अधिकार किसी चैनल ने प्राप्त कर लिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जेड़ गुड्डी ने भी अपने दो छोटे छोटे बच्चो की परवरिश की खातिर धन की जरूरत का हवाला देते हुए एक अच्छी खासी रकम प्राप्त करने के लिए अपनी मौत का लाइव टेलेकास्ट कराने को तैयार हो गई है । मानव समाज इतना निष्ठुर हो चुका है की किसी की जान  जाए तो जाए उसे तो अपनी मस्ती व मनोरंजन की ही पडी है। हद तो यह है की पथ भ्रष्ट हो चुकी मिडिया भी अपने दायरे को भूल मौत को तमाशा बनाने में लगी है। यह सामाजिक पतन की पराकाष्ठा है । एक सज्जन ने फरमाया की भारत में तो मृत्यु के बाद वर्षो तक पंडित, ठाकुर, व गाव समाज  के लोग जश्न मनाते है। मरने वाले के नाम पर पुरिया तोडी जाती है । कई लोगो की आजीविका चलती है । पंडे पिंड दान के नाम पर मजे करते है । एसे में जेड़ गुड्डी का अपने बच्चो की खातिर मौत के लाइव टेलीकास्ट का अधिकार बेचना सही है। क्या इंग्लैंड की जनता इतनी निक्कमी है की वह दो बच्चो का भरण पोषण नही कर सकती। उस समाज की संवेदनाये इतनी मर चुकी है की अब उनमे धन के लिए मौत के खौफ का भी असर जाता रहा । क्या भारतीय कर्म कांड व सनातन संस्कृति में किसी की मृत्यु को इसप्रकार से हास्यास्पद बनाया गया है । यह तो वह भूमि है जहा स्वमेव समाधि ले ली जाती है। किसी महिला के देह का  दर्शन करते हुए उसके जीवन भर उसे सो बिजनेस का साधन बना देना, फिर उसकी मौत का तमाशा बना देना पश्चिम की  देन हो हो सकती है , हमारी अपनी भूमि में यह निंदा का karan ही हो सकती  है।  अब कल को कोई कह दे की bachche का जन्म लाइव होगा, कितनी ghatiya bate होगी।  अपने को सभ्य कहने वाली prajati और वह समाज, wha की मिडिया इतनी nikrist हरकत karegi यह aaklpaniya है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1106029268036944692?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1106029268036944692/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1106029268036944692&amp;isPopup=true' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1106029268036944692'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1106029268036944692'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/02/blog-post_21.html' title='मौत का लाइव टेलीकास्ट सभ्य समाज के मुह पर एक तमाचा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6925181431311758301</id><published>2009-02-12T12:43:00.004+05:30</published><updated>2009-02-12T13:41:25.343+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='तत्‍कालिक'/><title type='text'>वेलेन्‍टाइन और युग भ्रम</title><content type='html'>'' वेलेन्‍टाइन डे'' हर वर्ष देश में एक नये आतंक का आगाज कर रहा है। कोई इसके पक्ष में तो कोई इसके विपक्ष में स्‍वयं को खडा कर अपने को समय सापेक्ष घोषित करने में लगा है। नये युग में नयी नयी सामाजिक दूश्‍चक्र व विक़तियां उत्‍पन्‍न हो रही है। इसमें स्‍वयं को उलझा कर देश का युवा वर्ग अपने आपकों नये संकट व तनावों की ओर ले जा रहा है. 21 सदी के युवा इस प्रकार के युग भ्रम का शिकार न हो, राष्‍ट्रीय मर्यादा व उन्‍नति की दिशा में अग्रसर हो कुछ ऐसा होना चाहिये। मर्यादा पुरूषतोम श्रीराम के नाम पर संगठन खडा करना, उसके बाद हिंसा उत्‍पन्‍न कर समाज के एक वर्ग में आतंक पैदा करना, फिर गलथेथरई करते हुए अपने आपकों धर्म के साथ जोडना जहां विक़त मानसिकता का द्योतक है, वही युवाओं के किसी समुह विशेष्‍ा का उसके प्रतिरोध में गुलाबी चडढी अभियान चलाना स्‍वयं में हास्‍यास्‍पद है। आखिरकार, इसका प्रतिफल क्‍या होगा। बाजार तो नये नये अवसर खडा करने की ताक में रहता ही है, आप किसी भी अभियान का हिस्‍सा बने, वह आपके आर्थिक सामाजिक दोहन में कब लग जाता है आपको पता भी नही चलता। सामान्‍य आदमी जिसे न तो वेलेन्‍टाईन से मतलब है न किसी सेना व संगठन से वह हंसता रहता है। देखिए ये दोनों किस प्रकार की मुर्खता उत्‍पन्‍न कर रहे है. कई बार हम पश्चिम सभ्‍यता की अच्‍छी बातों को नजर अंदाज करते हुए,उसकी बुराईयों की आकर्षित होते चले जाते है. संस्‍कार,शुचिता व सभ्‍य आचरण को अपने जीवन का आधार बनाने वाला भारतवर्ष, वीर बलिदानियों का देश अपना भारत, मर्यादा पुरूषोत्‍तम, भगवती सीता की भूमि, नानक व कबीर की भूमि, हीर व रांझा की भूमि,सोनी व महिवाल की भूमि में वेलेन्‍टाइन के बिना प्रेम की कोई परिभाषा नही हो सकती । क्‍या भगवान क़ष्‍ण से बढकर भी कोई प्रेम के प्रतीक हो सकते है। जिनकी बांसूरी की धून पर नर नारी, जीव जंतू, पशु प‍क्षी सब मदहोश हो जाया करते थे। वह अलौकिक प्रेम जो भगवतसता से तादात्‍मय स्‍थापित करा देता है, जहां जन्‍म जन्‍म के बंधन टूट जाते है. संत वेलेन्‍टाईन कोई त्‍याज्‍य व्‍यक्ति नही है. लेकिन सोचिए कि क्‍या प्रेम का प्रदर्शन सिर्फ गिफट लेने व देने से संपूर्ण होता है, खुले आकाश या झाडियों में बाहुपाश में बंधने से होता है, स्‍वतंत्र विचारधारा के नाम पर मर्यादा को ताक पर रखने से होता है। अगर ऐसा है भी तो क्‍या हम माने कि प्रेम प्रदर्शन की चीज है। हवा को सिलेंडर में भरकर आप आक्‍सीजन नाम देकर किसी को जरूरत मंद को जीवन प्रदान कर सकते है लेकिन जिसे स्‍वच्‍छ वायु में श्‍वास लेना हो वह सिलेंडर ढूंढे तो उसे क्‍या कहेंगे. विश्‍व को मागदर्शन देने की तैयारी में खडा भारत अगर इसी प्रकार के विरोध व तनावों में उलझा रहेगा तो अनावश्‍यक समय व उर्जा की बर्बादी से कुछ खास हाथ लगने वाला नही. आईए इससे इतर हम वसुधैव कुंटुबकम को अपनाते हुए पूरी मानवता को प्रेममय कर दें.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6925181431311758301?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6925181431311758301/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6925181431311758301&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6925181431311758301'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6925181431311758301'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/02/blog-post_12.html' title='वेलेन्‍टाइन और युग भ्रम'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5495257879591163894</id><published>2009-02-02T23:31:00.002+05:30</published><updated>2009-02-02T23:51:02.499+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चिंताएं'/><title type='text'>बदलते समाज में सर्वहारावर्ग की चिंताएं</title><content type='html'>वक्‍त बदल रहा है। कल तक जो चेहरे सामान्‍य दिखते थे, उनके उपर बडी बडी कंपनियों की क्रीम पुत गयी है। जीवन जीने की जददोजहद बढ गयी है। उदारीकरण के दौर में जहां सभी देश एक दूसरे की ओर निहारा करते थ्‍ो, आज एक साथ मंदी की चपेट में लुढकते नजर आ रहे है। अमेरिका के राष्‍ट्रपति का चेहरा ही सिर्फ नही बदला है बल्‍िक पहले अश्‍वेत बराक ओबामा के आने से दलितों व अभिवंचित समुदाय में उम्‍मीदें बढी है। अपने देश भारत में भी 19 वीं शताब्‍दी में समाजवाद का दौर चल रहा था। आम लोगों को ध्‍यान में रखकर नीतियां गढी जा रही थी। आज उदारीकरण के दौर में प्रवेश करने के बाद हम उद्योगपतियों का ख्‍याल रख रहे है। हमें डर है कि गरीबों की ओर हमने मुख किया तो हमारी सारी प्रगति व विकासवाद का पैमान टूटकर बिखर जायेगा। सर्वहारावर्ग आज दो दो कौडियों को जोडने में अपनी सारी उर्जा लगा रखा है। उसे पता है कि अपना बेटा अगर कंप्‍यूटर नही सीखेंगा, मोबाइल का प्रयोग करना नही जानेगा तो आने वाले समय में उसके लिए जीवन जीना और भी कठिन हो जायेगा। चांदी व सोने के चमचमाते मेडलों को खेल के मैदान में जीतने के लिए उसे कब्‍बडी, खो खो, या अपने देशी खेलों की जगह क्रिकेट, टेनिस या शूटिंग के कारनामे सीखने होंगे। उसके लिए न तो घर में न समाज के किसी भी हिस्‍से में अपनी उपयोगिता नजर आती है. बढती स्‍पर्द्वा के बीच उसकी हौसलाअफजाई के लिए भी कोई सामने नही आता. कोई आता भी है तो कारपोरेट बाबाओं की टोलीयां आती है. उन्‍हें रंगीन स्‍क्रीन पर अपने मीठे बोलों को सुनाने से फुसरसत कहां है. प्रभु को भी कैसे सीडी व बिडियों में बांध दिया गया है. साहित्‍य की जितनी विधाएं थी, सस्‍ती पु‍स्‍तकों की उपलब्‍धता थी वह दूर की चीज हो गयी है. अब प्रेमचंद को पढने के लिए, निराला को गुनने के लिए, विश्‍व साहित्‍य की सर्वश्रेष्‍ठ क़तियों को आत्‍मसात करने के लिए उत्‍तम साधनों का अभाव हो गया है, यह आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गयी है. यही कारण है कि ईदगाह का हामिद अब नही मिलता, झूरी के दो बैल आपस में नही बतियाते. वक्‍त बदल रहा है. नि संदेह प्रेम की गाथाएं नयी गढी जा रही है लेकिन कभी वो मटुकनाथ तो कभी चांद मोहम्‍मद के अंजाम पर जाकर स्थिर हो जाती है. अब तो श्‍वास लेना भी मुश्किल होता जा रहा है. नवजागरण कालीन पत्रकारों की देश भक्ति, अपने समाचार पत्रों के प्रति समर्पण लुप्‍त होता जा रहा है. कारपोरेट कंपनियों की भांति परिवार भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदल रहे है. आज समझौता है कल टूटा तो अपनी राह इधर से उधर. भगवान बुद्व ने अंगुलीमाल डाकु के सामने आ गये थे, उनसे उसने कहा था ठहरो. बुद्व ने ठहरते हुए कहा था मै तो ठहर गया तुम कब ठहरोगे. आज भी यही शास्‍वत प्रश्‍न है. सब कुछ बदल रहा है हम कब ठहरेंगे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5495257879591163894?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5495257879591163894/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5495257879591163894&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5495257879591163894'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5495257879591163894'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/02/blog-post.html' title='बदलते समाज में सर्वहारावर्ग की चिंताएं'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6330536243549247084</id><published>2009-01-30T21:41:00.004+05:30</published><updated>2009-01-30T22:00:40.742+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पत्रकारिता'/><title type='text'>ट्रस्‍टी बनाम फ्रस्‍टी जर्नलिस्‍ट</title><content type='html'>पत्रकारिता की दूनिया में अजीबो गरीब घटनाएं होती रहती है। कई बार आम आदमी को इससे कोई मतलब नही होता, उन्‍हें प्रकाश में भी अमूमन नही लाया जाता। इन घटनाओं की फेहरिस्‍त सामने आ जाये तो दूनिया को मौजूदा पत्रकारिता के उनसे संबंद्व पत्रकारों की सोच व समझ में खालीपन की अनुभूति हो सकती है। हाल ही में पटना के पत्रकारों ने या यूं कहे कि जर्नलिस्‍टों ने ट्रस्‍ट बनाकर प्रेस कल्‍ब आफ पटना की स्‍थापना करने की सोची। राज्‍य के मुखिया के कानों तक यह बात पहुंची,उन्‍होने झटपट इस पर अपनी सहमति प्रदान करते हुए अधिकारियों को एक अदद अच्‍छे भवन सुसज्जित करने का निर्देश दे दिया. स्‍थान भी चिन्हित कर लिया गया. भवन में तेजी से कार्य शुरू हो गये. रंग तब जमा जब ट्रस्‍ट के साथ राज्‍य के सूचना जनसंपर्क विभाग ने बैठक कर उसे सौंपे जाने को लेकर वार्ता शुरू की. बैठक में मौजूद कई पत्रकारों ने जमकर ट्रस्‍ट के पत्रकारों की खबर ली. बात तू तू मैं मैं तक पहुंच गयी. अधिकारी हक्‍के बक्‍के थे. अब क्‍या होगा इनका. जो पत्रकार वहां धीरे धीरे पहुंच रहे थे उनसे पूछा जाने लगा की आप ट्रस्‍टी है या फ्रस्‍टी. फ्रस्‍टीयों की जमात अधिक थी. बहरहाल बैठक में सर्व सम्‍मति से निर्णय किया गया कि एक समिति बनायी जाये,जो लोकतांत्रिक तरीके चुनाव कर क्लब के संचालन की जिम्‍मेवारी ले. इसके लिए सूचना जनसंपर्क के अधिकारियों को अधिक़त किया गया कि वे समिति का गठन करें. बैठक के बाद बाहर निकल कर अलग अलग पत्रकारों की राय भिन्‍न भिन्‍न थी. उन रायों में जाने का कोई मतलब यहां नही है, अनावश्‍यक आप भी परेशान  होंगे। वैसे, आकलन करें कि अचानक नयी सरकार के विकासवाद से प्रभावित होकर क्‍यूं प्रेस क्‍लब के स्‍थापना की सूझ जगी. वह भी वैसे पत्रकारों को जो इसके लिए बनाये गये स्‍व निर्मित ट्रस्‍ट के आजीवन सदस्‍य बने हुए थे. कही यह नीतीश जी के गले की हडडी न बन जाए.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6330536243549247084?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6330536243549247084/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6330536243549247084&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6330536243549247084'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6330536243549247084'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/01/blog-post_30.html' title='ट्रस्‍टी बनाम फ्रस्‍टी जर्नलिस्‍ट'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5201932926278961946</id><published>2009-01-29T16:41:00.004+05:30</published><updated>2009-01-30T21:40:55.497+05:30</updated><title type='text'>श्रीलंका सरकार की कार्रवाई से सबक ले भारत</title><content type='html'>भारतीय नीति निर्धारकों को श्रीलंका में लिटटे के खिलाफ के विरूद्व छेडे गये अभियान से सबक लेनी चाहिये। श्रीलंका सरकार द्वारा चलाये जा रहे अभियान का दूरगामी असर होगा। किसी भी मूल्‍क में आतंकवादी गतिविधियों, उग्रवादी गतिविधियों के संचालन को जोरदार तरीके से कुचल देना चाहिये। ये कौन लोग है जो मनमाफिक परि‍णामों को प्राप्‍त करने के लिए एक बडी आबादी को निरीह जनता को आतंक व भय के साये में रहने को मजबूर कर देते है। हमारी सेना व नीति निर्धारकों के बीच बेहतर तालमेल की बात की जाती रही है, निसंदेह ऐसा है भी तभी भारतीय लोकतंत्र 60 वर्षो के बाद भी अपने पैरों पर मजबूती से खडा है। लेकिन यहां गौर करने की बात यह है कि जम्‍मू कश्‍मीर हो या आसाम,जहां वर्ष भर युद्व व तनातनी की स्थिति बनी होती है. झारखंड व छतीसगढ के जंगलों में पल रहा उग्रवाद हो जिसका शिकार न केवल सरकारी मशीनरी होती है बल्कि आम जनता भी तबाह व बरबाद होती है. उनकी ओर भी ध्‍यान दिया जाना आवश्‍यक है. लोकसभा चुनाव होने को है एक बार फिर भारतीयों को अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का अवसर प्राप्‍त होगा। क्‍या हम इस दिशा में कुछ नहीं सकारात्‍मक कार्य कर सकते है। अच्‍छे लोगों की राजनीति से दूराव न हो बल्कि वे सामने आकर राजनीति के समक्ष खडी चुनौतियों का सामना करें। ऐसा प्रयास नही किया जाना चाहिये। बुद्विजीवी वर्ग क्‍यों नही अपने देश के युवाओं को भरोसे में लेकर उन्‍हें आगे बढने का मौका देता है। इतना तो निश्चित है कि युवा वर्ग अपनी परेशानियों को निकटता से महसूस कर रहा है। उसे पता है कि श्रीराम सेना के नाम पर आतंक फैलाने वाले व तालिबानी मानसिकता से ग्रसित लोगों में क्‍या समानताएं है. हद तो यह है कि हमारे देश में लोकतंत्र के चारों प्रहरी विधायिका, कार्यपालिका, न्‍यायपालिका व प्रेस अपने वजूद के संकट से जूझ रहे है, उन्‍हें यह एहसास ही नही हो रहा है कि जिसे हम आम आदमी कहते है उसके जीवन की रोजमर्रा की जरुरते कैसे पुरी हो,उसमें उनका क्‍या योगदान हो सकता है. हम जिसे चाहे गालियां दे ले, चाहे जितनी भी शिकायते कर ले, लेकिन हमें थोडी थोडी ही सही अपने लिए न सही उन आम आदमियों के लिए ही सही करने का प्रयास करना चाहिये जिनकी आंखों के आंसू रुकते नही, सूख जाते है, इसी आशा में कि कोई तो तारनहार आयेगा, उनकी परेशानियों को समझेगा, उन्‍हें अपने मूल्‍क व अपने परिवार के लिए कुछ करने की थोडी स्‍पेश, स्‍थान प्रदान करेगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5201932926278961946?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5201932926278961946/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5201932926278961946&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5201932926278961946'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5201932926278961946'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/01/blog-post_29.html' title='श्रीलंका सरकार की कार्रवाई से सबक ले भारत'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8789350430793446195</id><published>2009-01-27T01:16:00.006+05:30</published><updated>2009-01-27T03:07:39.042+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम सामयिक'/><title type='text'>थोडी सी शर्म व आत्मालोचन</title><content type='html'>इस देश को कौन संचालित करेगा गणतंत्र या भीड़तंत्र या इन सब से इतर छिपे हुए चेहरों के बीच अपने असली चेहरों को भूल गये लोग. अगर आपका अंतःकरण अशुद है तो बाहरी आवरण बहुत दिनों तक किसी को उल्लू नही बना सकता. अजब सी सियासत है इस देश की जब आतंकी वारदात के खतरों से देश जूझ रहा हो,सीमा पार से गर्म हवाए आ रही हो, गणतंत्र दिवस के अवसर पर शहीदों को अशोक चक्र व अन्य सम्मान प्रदान किये जा रहे हो, नासिक के एक विद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह को तोड़ फोर कर बंद करा देना,महज इस लिए की भोजपुरी गीत की प्रस्तुति हो रही थी,बडे ही शर्म व शोक की बात है- कैसे किसी का दिल इस बात की गवाही देता हैं की जिस घर में हम रहे उसी घर में अपने हाथो से आग लगा दे । इस देश को ऐसे लोगो से निजात मिलनी चाहिए,जो किसी भी प्रकार की वैमनस्यता फैलाते हो । ६० वे गणतंत्र को करीब से जी भरकर देख लो, इसकी हड्डियों में भरपूर जवानी हैं, यह वही मुल्क हैं जहा ८० वर्ष के बाबु वीर कुवर सिंह ने अंग्रेजो के दांत खट्टे का दिए थे, १८५७ की क्रांति में एक बड़े भूखंड को विजित कर अपने प्राण त्यागे थे। अब हमें उन कमजोरियों की पहचान करनी चाहिए की कौन से तत्व हमें अन्दर व बाहर से खोखला बना रहा हैं। बंद करे यह भाषा, प्रान्त, मजहब और निर्ल्लाजता की बाते। देश की ६० फीसदी आबादी में शामिल युवा किसी भी देशद्रोही को बर्दाश्त कराने की हालत में नही हैं। यहाँ आपको तय करना होगा की आने वाली संतति को आप कैसा मुल्क सौपना चाहते हैं। क्या सुभाष ने इसीलिए अपना घर बार त्यागा था। गाँधी ने रामराज्य का सपना देखा था। बिस्मिल की कुर्बानी यु ही जाया हो जायेगी। विचारे, क्यों सच्चा देश भक्त मुस्लमान भी दहशत गर्दी के विरूद्ध जुबान खोलने में समर्थ नही पाता,क्यों किसी भी खास भाषा प्रान्त के नाम पर भीड़ तंत्र अँधा बन कर विवेक खो बैठती हैं, गणतंत्र किनारे खड़ा सिसकता रहता हैं। हम अपना अनुशासन कहा भंग करते हैं। कभी इस देश की गरीबी के आकडे इक्कठे किए जाते हैं, उन्हें गीत ,कला , अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर बेचा जाता हैं, तो कभी कभी अनकर देखही लाल आपण फोरी कपार को प्रदर्शित किया जाता हैं ।हम अपने आप पर इस देश पर यहाँ की मिटटी पर कब गर्व करना सीखेंगे.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8789350430793446195?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8789350430793446195/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8789350430793446195&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8789350430793446195'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8789350430793446195'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/01/blog-post_27.html' title='थोडी सी शर्म व आत्मालोचन'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7613574837501399076</id><published>2009-01-10T11:53:00.003+05:30</published><updated>2009-01-10T22:28:07.553+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चिंतन'/><title type='text'>मीडिया की भूमिका पर उठते सवाल</title><content type='html'>हिंदी पत्रकारिता अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है. सारे सिद्वांत व नियम बाजारवाद के आगे नतमस्‍तक हो गये है. दिग्‍गज पत्रकारों को भी नही सूझ रहा कि आखिर इसका क्‍या समाधान होगा. स्‍टील, प्‍लास्टिक, आयल,फूड प्रोडक्‍ट की तरह ही बाजार हिंदी पत्रकारिता को अपने अनुरूप मोड रही है. ऐसा नही कि इससे मनोरंजन व सूचना से संबंद्व अन्‍य उद्योग जैसे फिल्‍म, टेलिविजन व संचार कंपनियां प्रभावित नही हो रही है. उनमें भी इसका खासा असर दिख रहा है. आम आदमी अपनी पहचान इनमें तलाशने की कोशिश कर रहा है. सावधान हो जाये, अगर एक आम आदमी गति मति बिगडेगी तो शायद उससे इतर खास आदमी प्रभावित नही होगा ऐसा नहीं है. समाज की एक कडी कमजोर होगी या टूटेगी तो दूसरा पक्ष निसंदेह प्रभावित होगा. खासकर, राष्‍ट्रीय मुददों पर हिंदी मि‍डिया के रूख्‍ा को समझना मुश्किल हो रहा है. पूरे तथ्‍य अब खुल कर सामने आ रहे है. चैनलों पर आतंकवाद के विरोध में भले ही चिल्‍लाकर अपनी प्रतिबद्वता को प्रदर्शित करने का दौर जारी है किन्‍तु यह भी सत्‍य है कि आम हो या खास मीडिया के रवैयें से स्‍वयं आतंकित है. उससे नही लगता कि मीडिया के पास जाकर किसी की समस्‍या का सामाधान ढुढा जा सकता है. चाहे अपराध की बात हो या ज्‍योतिषीय समाधान की यह समझ से परे है कि कैसे चंद मिनटों के प्रदर्शन के बाद किसी को भी कैसे खबर का असर प्राप्‍त हो सकता है. जब तक मूल समस्‍याओं को निबटाने को लेकर राष्‍ट्रीय नीतियों पर तीखे चोट करने,उसकी अच्‍छाईयों को जन जन तक प्रसारित करने की दिशा में कार्रवाई नही की जायेगी तब तक समस्‍याएं मुंह बाये खडी रहेंगी. आतंकवाद एक बडा मुददा है. यह पूरे देश को अपनी आगोश में लेने के लिए बेताब है. पडोसी मूल्‍कों से हमारे संबंध पुराने ढर्रे पर बने हुए है. इनकी लगातार समीक्षा होनी चाहिये. अटल जी ने क्‍या खूब कहा था कि हम नये नये दोस्‍त बना सकते है लेकिन पडोसी नही बना सकते. हमें अपने पडोसियों के सुख दूख उनकी समस्‍याओं में साझीदार होना सीखना होगा. मीडिया को इस दिशा में भी फोकस करनी चाहिये कि पडोसी मूल्‍कों में कौन कौन सी समस्‍याएं है. उनके समाधान की दिशा में अंतर्राष्‍‍ट्रीय प्रयासों को भी बल देना होगा. मीडिया एक ओर आम आदमी से आतंकवाद के विरूध खडे होने की अपील कर रहा है ऐसे में उसे आम आदमी के विश्‍वास को भी जीतना होगा. वैसे भी निजी प्रक्षेत्र के इलेक्‍ट्रानिक मीडिया की पहुंच मध्‍यम वर्ग में भी फिलवक्‍त शतप्रतिशत नही है. अखबारों को अपने तेवर में परिवर्तन लाने के पूर्व ठहर कर सोचना होगा कि बाजारवाद कही देश को पतन की गर्त में लेकर न चला जाये. हमें पश्चिमी मूल्‍कों में पूंजीवाद के विकास के दूष्‍परिणामों की ओर भी देखना होगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7613574837501399076?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7613574837501399076/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7613574837501399076&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7613574837501399076'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7613574837501399076'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/01/blog-post_10.html' title='मीडिया की भूमिका पर उठते सवाल'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6189770157062705894</id><published>2009-01-03T13:24:00.002+05:30</published><updated>2009-01-03T14:00:43.341+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='समसामयिक'/><title type='text'>नव वर्ष में अज्ञात भय से मुक्‍त हो</title><content type='html'>नव वर्ष का आगाज हो चुका है, बीते वर्ष की बिदाई व नये वर्ष के आगमन के बीच कई लोगों ने अपनी अपनी प्राथमिकताएं तय की होगी. बीते वर्ष की समाप्ति आतंकवाद के भीषण रुप को सामने लेकर आया. जबकि कई अच्‍छी बातें भी देखने को मिली थी. अच्‍छी बातों को याद करने से प्राय लोग कतराते है. खैर, आम मानसिकता की तरह ही हम भी उसी पर बातें करते है. प्राय देश के खास ओ आम लोगों के मन में पाकिस्‍तान की बातें आते ही,अपने देश में निवास करने वाले अल्‍पसंख्‍यकों को लेकर धारणाएं बनने बिगडने लगती है. हद तो यह है कि कई बार अल्‍पसंख्‍यकों के मन में ऐसा अज्ञात भय पैदा हो जाता है, मानों उनका भारतीय गणतंत्र से कोई वास्‍ता नही है. जाति व धर्म से उपर उठ कर सोचने व विचार करने का जज्‍बा अब भी अपनी शैश्‍वावस्‍था में ही है.  वेद व कुरान की गुढ बातें न तो बहुसंख्‍यक समझते है, न अल्‍पसंख्‍यक. चूंकि अल्‍पसंख्‍यको में मुसलमान निशाने पर होते है, इसलिए पहले हम जान ले कि मुसलमान वस्‍तुत है कौन. मुसलमान, मुस्‍सलसल हो ईमान जिसका वही सच्‍चा मुसलमान है. जो अपने ईमान पर अडिग रहता हो. आप स्‍वयं देखें कि कितने ऐसे मुसलमान है जो अपने ईमान पर कायम रहते है. खासकर, अल्‍लाह( ईश्‍वर ) पर ईमान लाने वाला व्‍यक्ति कैसे बिना सिर पैर की सोच रख सकता है. दूसरा, वेद की ऋचाएं व कुरान की आयतों को गौर से पढे. कई बातें एक दूसरे को दुहराती प्रतीत होती है. वेद के अंतर्गत सूर्योपासना पर बल दिया गया है तो सूर ए जिन की चर्चा किस कदर उससे अभिन्‍न है यह भी देखें. खैर, गुढ रहस्‍यों की विवेचना यहां मेरा उदेश्‍य नही है. यह जो अज्ञात भ्‍ाय है उससे कैसे हम निकल सकते है, इस पर हमें विचार करना चाहिये.  हमें इस पर विचार करना चाहिये कि जिस इस्‍लाम में ढुढ ढुढ कर बुराईयों की खोज की जाती है, उसी के मानने वाले पीर व फकीरों के दरबार में क्‍यों जाति और मजहब भूलकर सभी बंदे अपना सिर झूकाते है. क्‍यों वहां हर हदय भयरहित हो जाता है.  क्षेत्रीयता, भाषाई संकीर्णता, धार्मिक कटटरता, आतंकवाद इत्‍यादि हमें थोडी देर के लिए भले ही डराते हो, इससे खबराना नहीं है. भारत भूमि पवित्र आत्‍माओं की निवास भूमि है.  यही कारण है कि शक, हूण, कुषाण से लेकर इस्‍लाम व ईसाईयत ने भी यहां आकर अपना बसेरा बनाया है. आप और हम रहे न रहे यह मूल्‍क रहेगा. इसकी खुशबू दिनों दिन विश्‍व में बिखरती रहेगी, बशर्ते हम अपनी भावनाओं में पवित्रता, भाईचारगी, खुदा ईश्‍वर, गुरू, जिसे भी आप अपना पथ प्रदर्शक मानते हो उनमें आस्‍था बनायें रखे. प्राचीन भारत के अंश भाग चाहे गंधार अब अफगानिस्‍तान, बन जाये या गुरू नानक की जन्‍मभूमि ननकाना साहिब पाकिस्‍तान का अंश हो जाये, बुल्‍लेशाह के भजन हो या मीरा की भूमि उसकी गूंज बहरे को भी ईश्‍वर का ध्‍यान कराती रहेगी, आईए इस नये वर्ष में हम भयमुक्‍त होकर जीना सीखें. ऐसे किसी भी तत्‍व को प्रश्रय न दे जो देश की एकता व अखंडता को खतरे में डालने का प्रयास करता है. आर्यावर्त की इस भ‍ूमि पर भरत बचपन से ही शेर के मूंह में हाथ डालकर उसकी दांतें गिना करता है. अपनी संवेदनाओं को जाग्रूत करें, वतन पर कुर्बान होने का मौका विरले को ही प्राप्‍त होता है. अमर शहीदों की इस भूमि अशफाक, भगत सिंह, महात्‍मा गांधी, विवेकानंद की भूमि के कण कण में शक्ति विराजमान है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6189770157062705894?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6189770157062705894/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6189770157062705894&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6189770157062705894'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6189770157062705894'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2009/01/blog-post.html' title='नव वर्ष में अज्ञात भय से मुक्‍त हो'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-9029750702577499711</id><published>2008-12-27T12:40:00.004+05:30</published><updated>2008-12-27T13:27:37.471+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सामयिकी'/><title type='text'>मीडिया की मजबूरी या देश की जरूरत है युद्व</title><content type='html'>आज भारत पाकिस्‍तान के रिश्‍ते में तल्‍खी है, एक आतंकवाद के खात्‍मे के लिए देश दूनिया में अपनी आवाज बुलंद कर रहा है तो दूसरा उसका पोषक बनने के लिए किसी भी सीमा तक जाकर अपनी युद्व की ज्‍वाला को शांत करना चाहता है. उसे युद्व लडकर विश्‍व की सहानुभूति प्राप्‍त करना श्रेयस्‍कर महसूस हो रहा है. मीडिया इसमें अपनी भूमिका तलाश कर रहा है. उसे बाजार को उपलब्‍ध कराने के लिए दमदार खबरे परोसने का मौका मिल गया है तो दूसरी ओर यह कमोबेश देश की जरूरत भी बतायी जा रही है. समय समय पर कुटनीतिज्ञों को आमंत्रित कर तरह तरह के विचार प्रसारित कर जनता को भ्रम की स्थिति में डाला जा रहा है. भारत द्वारा दिये गये 30 दिनों के अल्‍टीमेंटम के बाद भी पाकिस्‍तान अपनी स्थिति से टस से मस नही हो रहा है. पाकिस्‍तान के हिताकांक्षी राष्‍ट्रों में इसको लेकर भले ही बाहर से कोफत बढती द‍िख रही हो लेकिन अब भी चीन, साउदी अरब सहित अन्‍य पाकिस्‍तान परस्‍त राष्‍ट्रों ने अपनी स्थिति साफ नहीं की है. यह तो तय है कि पाकिस्‍तान के साथ युद्व हुआ तो इस बार उसका बजूद ही खतरें में पड जाएगा. फिर हमें अपनी सेना को विजित क्षेत्रों को वापस लौटने के बजाय व़हतर भारत के परिकल्‍पना को साकार करने के एजेंडे पर लगा देना होगा. आज पख्‍तुन, सिंधी पाकिस्‍तानी हुकमरानों के दोरंगी नीतियों के सबसे बडे पीडित है उन्‍हें लोकतांत्रिक अधिकारों से महरूम किया जा चुका है. पश्चिम पाकिस्‍तान में तालिबान का कब्‍जा है. वहां महिलाओं को शिक्षा प्राप्‍त करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है,वही मनोरंजन के साधनों का खात्‍मा कर दिया गया है. क्‍या इस्‍लाम की इस तरह की व्‍याख्‍या करने वालों से स्‍वयं इस्‍लामी जगत के रहनुमा निबटने में अक्षम है. प्रश्‍न यह उठता है कि क्‍या हम मीडिया के दबाब में युद्व की रणनीति अपनाए या किसी सार्थक समाधान की दिशा तलाशे. भारत सरकार की विदेश नीति पर पहले भी सवाल खडे होते रहे है, आज हमारा देश आजादी के 60 वर्षो के बाद इतना सशक्‍त हो चुका है कि विश्‍व के किसी भी दबाब से निबटने में सक्षम है. मीडिया को हमें अपनी ताकत के मूल्‍यांकन में सहयोग कर देश को भरोसे में लेने का प्रयास करना चाहिये न कि युद्व की बदलती व बढती भूमिका को स्‍पष्‍ट करने में अपनी उर्जा को खपाना चाहिये. हमारे देश में अब भी नीति निर्धारकों के बीच बेहतर सामंजस्‍य है, हमें उन पर भरोसा करना भी सीखना होगा. मीडिया को सलाहकार की भूमिका में ही रहना शोभा देता है वह निर्णायक बनने का प्रयास न करें.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-9029750702577499711?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/9029750702577499711/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=9029750702577499711&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9029750702577499711'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/9029750702577499711'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/12/blog-post_27.html' title='मीडिया की मजबूरी या देश की जरूरत है युद्व'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1631028637563343128</id><published>2008-12-21T22:40:00.003+05:30</published><updated>2008-12-21T23:49:32.406+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सम सामयिक'/><title type='text'>युद्ध या कूटनीति</title><content type='html'>&lt;span &gt;देश आज किन भूल-भूलियो में भटक रहा है यह तो नियंता ही जाने यह स्पस्ट है कि आतंक से मुकाबला करने कि लिए युद्ध या कूटनीति में से तत्काल एक को चुनना होगा.  युध का रास्ता अपनाने कि पहले हमे अपनी कूटनीति की ओर देखना होगा.यह हमें भटकाने वाला नही होगा बल्कि ठीक निशाने को भेदने में सहायक होगा.  भारत में चन्द्रगुप्त मौर की विजय पताका लहराने वाला मगध साम्राज्य का इतिहास इसका गवाह है की कैसे युद्ध लड़ी जाती है.कैसे अपने देश कि एकता की बदौलत दुश्मन को परस्त किया जाता है. एक अदना सा दिखने वाला गुरु चाणक्य ने बालक चन्द्रगुप्त को देश का सम्राट बना दिया.टुकडो में बिखरे भूखंड को गुलसन बना दिया.इंदिरा जी ने पाकिस्तान से युद्ध करने कि पूर्व अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भावनाओ से अवगत कराया था. पाकिस्तान ने माना तो ठीक ,नहीं तो उसे दुरुशत कर दिया.पाकिस्तानी कट्टर पंथियों ने सबसे अधिक अत्याचार सिंधियों पर कर रखा है. उसे मुक्ति दिलाना जरुरी है. &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1631028637563343128?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1631028637563343128/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1631028637563343128&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1631028637563343128'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1631028637563343128'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/12/blog-post_21.html' title='युद्ध या कूटनीति'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6666966829249882247</id><published>2008-12-10T12:38:00.004+05:30</published><updated>2008-12-10T13:20:59.920+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विश्‍लेषण'/><title type='text'>आतंकवाद का सरलीकरण,भाजपा की शिकस्‍त</title><content type='html'>हाल ही में पांच विधान सभा चुनावों के परिणाम सामने आये। यह संयोग ही है कि मुंबई की आतंकी घटनाओं के बीच पांच राज्‍यों छतीसगढ, मध्‍यप्रदेश, राजस्‍थान,मिजोरम व दिल्‍ली में चुनावों के दौरान राजनेताओं की सरपट दौड जारी थी। कमोबेश जम्‍मु कश्‍मीर में भी चुनाव के दौरान राजनेताओं की अच्‍छी खासी भागेदारी रही है. इन सभी स्‍थानों में जनता ने बडी ही बारिकी से राजनीतिक दलों का चुनाव अभियान को देखा. भारतीय जनता पार्टी को पांच राज्‍यों के चुनाव परिणामों में थोडी निराशा हाथ लगी है। इस पर भी वो अगर समय रहते सचेत नही होती तो संभव है एक बार फिर  लोकसभा के चुनाव में अगले पांच वर्षो के लिए हासिए पर ही स्थिर रह जाए। दरअसल भाजपा ने विध्‍ाान सभा चुनाव में आतंकवाद को प्रमुख मुददा बनाया. पोटा कानून को हटाये जाने तथा अफजल को अबतक फांसी नहीं दिये जाने के मामले को हवा दी. आतंकवाद को इतना सरलीकरण आम जनता को तनिक भी नही भाया।आखिर हम कबतक इतने अगंभीर तरीके से किसी बडी समस्‍या को देखते रहेंगे. देश की एक अरब से अधिक की आबादी में मुसलमानों का हिस्‍सा 18 फीसदी के करीब है,शेष अन्‍य अल्‍पसंख्‍यक समुदाय की आबादी भी शामिल है. क्‍या देश के बहुसंख्‍यकों द्वारा अल्‍पसंख्‍यकों के मन से भय,डर व शक को बिना हटाये देश की राष्‍ट्रीय समस्‍याओं  से निजात पाया जा सकता है। बहुलतावादी संस्‍क़ति वाले इस देश में हमारी एकजुटता ही विकास व समस्‍यों से मुक्ति का वायस बन सकती है।  चाहे जो भी राजनीतिक पार्टी हो अल्‍पसंख्‍यकों की तुष्टिकरण करके सत्‍ता के गलियारे में पहुंचना चाहती हो, या बहुसंख्‍यकों की भावना को भडका कर अपना उल्‍लू सीधा करना चाहती हो, आने वाले समय में उन्‍हें घोर निराशा ही हाथ लगने वाली है। भारतीय गांधी युग में भी न इतने तंगदिल थे, न नेहरू युग में,अब तो देश के बंटवारे, राजनीतिक उथल पुथल, दंगे फसादों के दूष्‍परिण्‍ााम झेलते झेलते इतनी समझ विकसित कर चुकी है कि उसे आसानी से बरगलाया नही जा सकता। मुंबई में हुए आतंकवादी घटनाओं के बाद तो वह इतनी सर्तक हो चुकी है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस,भाजपा,सपा या अन्‍य क्षेत्रीय दलों द्वारा किये जाने वाले कवायद को धूल चटा सकती है। राजनीतिक दलों पर नैतिक दबाब बन सकता है कि वे अच्‍छे उम्‍मीदवार दें, प्रशासन में पारदर्शिता लाए। राष्‍ट्रीय महत्‍व के प्रश्‍नों को गंभीरता से हल करें। इस बार के विधान सभा चुनावों ने राजनीतिक दलों को सचेत हो जाने का एक बार फिर मौका दिया है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6666966829249882247?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6666966829249882247/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6666966829249882247&amp;isPopup=true' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6666966829249882247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6666966829249882247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/12/blog-post_10.html' title='आतंकवाद का सरलीकरण,भाजपा की शिकस्‍त'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7847677939399048029</id><published>2008-12-02T12:13:00.001+05:30</published><updated>2008-12-02T12:14:51.791+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='चना चबेना'/><title type='text'>जरा सोंचे विचारें</title><content type='html'>हमारे देश की हरी भरी वसुंधरा को आतंकियों की नजर लग चुकी है। हम इतने लाचार साबित हो रहे है कि दुश्‍मनों के ठिकानों पर नजर तक नहीं जा रही है। सरहद के उस पार आतंकी बैठे कुचक्र रचते है,इस पार की सरकार तमाशबीन बनी होती है।कुटिनीतिक व राजनीतिक विफलता का ऐसा दुर्लभ नमूना अन्‍यत्र देखने को कम ही मिलता है। यह वही देश है जहां पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी शक्ति का लोहा पूरे विश्‍व को मनवाया था, विपक्ष्‍ा के नेता ने उन्‍हें दूर्गा के संबोधन से पुकारा था। क्‍या आज राष्‍ट्र की सुरक्षा व संरक्षा की कीमत पर ऐसी रणचंडी बनने का सौभाग्‍य किसी में नही है। हमारे देश की प्रथम नागरिक तथा यूपीए सरकार की निर्मात्री दोनो महिलाएं है।शायद इतिहास को इससे सुनहरा अवसर नही मिल सकता जब ठोस निर्णय लेकर देश के समक्ष एक अनुपम उदाहरण प्रस्‍तुत किये जा सके। हमारे देश में राजनेताओं के प्रति गुस्‍से का इजहार लगातार किया जा रहा है, ये नेता है कि मानते नहीं। क्‍या करना चाहते है व क्‍या बोल बैठते है. भारतीय लोकतंत्र बडी त्रासद स्थिति से गुजर रही है. आजादी के दीवानों ने ऐसा सोचा भी नही होगा कि एक अरब की आबादी इस कदर घुटने टेककर सिर्फ तमाशबीन बनी रह सकती है. देश की उन्‍नति की चाह रखने वाले दीवानों को अपने देश पर गर्व था, वे सर कटाना जानते थे, देश की आन बान व शान पर खतरा होने पर दुश्‍मनों को मुहं तोड जबाब देना भी जानते थे। क्‍या हिंदू क्‍या मुसलमान क्‍या सिख व क्‍या इसाई हमें अपने मादरे वतन से लगाव नही तो धर्म व अपने धर्म गुरूओं के उपर क्‍या सम्‍मान व लगाव होगा। जब हमीं न होंगे तो कौन हमारे धर्म व संस्‍क़ति की रक्षा करेगा। हमने साथ साथ जीना सीखा है साथ मरना भी जानते है। बहुत ही खूब भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने इंदिरा जी के एक प्रश्‍न का जबाब देते हुए अंतरिक्ष से कहा था अपना हिंदूस्‍तान उपर से सारे जहां से अच्‍छा दिखता है। इस धरती की खुबसुरती न केवल देखने में है, बल्कि की इसकी आत्‍मा भी उतनी ही सुंदर है। कुछ जयचंदों के होने से हम इसे कलुषित न होनें देंगे।  सुरक्षा को लेकर पैसे वाले पावर वाले लोगों को कोई चिंता भले ही स्‍थायी न हो किंूत भारतीय आम नागरिक सहमे सहमे से नजर आ रहे है। आने वाले चुनाव में इस खामोशी का इजहार होना जरूरी है। भारतीय जनता के पास लोकतंत्रिक अधिकार के नाम पर वोट देने की प्रमुख शक्ति है। सारे मीडिया के आकलन व नौकरशाहों की कारगुजारियों के बावजूद, राजनेताओं को जो देश की अस्मिता के साथ खिलवाड करते नजर आते है,उन्‍हें बख्‍शा नही जाना चाहिये। हमें यह स्‍पष्‍ट संकेत देना होगा भारतीय राजनीति को कि इस्‍तीफे व गैर जिम्‍मेदारी भरे बयानात के आधार पर राजनेताओं को बचने का रास्‍ता अब नहीं दिया जा सकेगा। संकट की घडी में हमने यह स्‍पष्‍ट जाना है कि चमकने वाले चेहरों के भीतर कितना डरवाना चेहरा छिपा है. ये किस कदर सिर्फ व सिर्फ स्‍व हित के प्रति सोचते व विचार करते रहते है. वेशर्मी की हद तो यह है कि ये शहीदों को भी नही बख्‍शतें है. वतन पर मिटने वालों के साथ उनके परिवारों के साथ इस कदर बर्ताव करते है कि उन्‍ा पर कुछ भी टिप्‍पणी किया जाना अपने आप में शर्मनाक है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7847677939399048029?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7847677939399048029/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7847677939399048029&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7847677939399048029'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7847677939399048029'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/12/blog-post.html' title='जरा सोंचे विचारें'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-8044057230239306955</id><published>2008-11-30T23:52:00.000+05:30</published><updated>2008-11-30T23:53:36.784+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='त्‍वरित टिप्‍पणी'/><title type='text'>आतंकवाद और हमारी जबाबदेही</title><content type='html'>मुंबई में आतंकवादी हमले के कारण जो स्थिति बनी उसका असर प्रत्‍येक भारतीय जनमानस पर पडा है, इसे कमोबेश सभी प्रमुख ब्‍लॉगों पर प्रमुखता दी गयी है। खासकर, सिनेमा से संबंद्व प्रमुख कलाकारों के द्वारा लिखी गयी पंक्तियों को मीडिया ने भी तवज्‍जों दी है। सुपर स्‍टार अमिताभ बच्‍चन ने जहां एक ओर स्पिरिट आफ मुंबई कहना बंद करने की सलाह दी है, तो आम‍िर खान ने कहा कि आतंक का कोई धर्म नही होता। इसी प्रकार मीडिया से संबंद्व सभी स्‍तर पर लोगों ने चंद आतंकवादियों को खुलेआम तीन दिनों तक हंगाम,बर्बादी व तबाही का मंजर फैलाते देखा सुना। पिछले तीन दिनों तक हमें यह दिखा की आज भी राजनेताओं से ज्‍यादा हमारे देश की चिंता हमारे सुरक्ष्‍ाा बलों को है। वे अपने प्राण न्‍योच्‍छावर कर के भी लोगों को दहशतगर्दी से निकालना जानते है। हमारे राजनेताओं को इससे सीख लेनी चाहिये क्‍योकि अंतत यह देश ही हमारे आने वाली पीढियों के लिए,हमारे स्‍वजनों व परिजनों के जीवनयापन व विकास का साधन होगा। न तो भविष्‍य में जो आज काम आए उस सुरक्षा बलों के जवान रहेंगे, न अपने को निर्णायक व महत्‍वपूण् मानकर देश की शांति व सम़द्वि में हस्‍तक्षेप करने वाले राजनेता रहेंगे। यह ठीक है कि लोकतंत्र में सुरक्षाबलों व सेना के उपर जनता के प्रतिनिधि होने चाहिये ताकि जनपक्षीय दबाब उनपर बना रहे वे निरंकुश न हो, किंतू हमें यह भी तय करना होगा कि उन्‍हें देश व समाज हित में कार्य करने की पुरी स्‍वतंत्रता भी हो। सुरक्षा एजेंसिया अपने भीतर ही नियंत्रण की प्रणाली विकसित करें ताकि कार्य में लापरवाही बरते जाने वालों व देश की अस्मिता के साथ खिलवाड करने वालों से निबटा जा सके। उन्‍हें हुकूम का गुलाम बनाकर रखना देश के साथ धोखा है। इतना तो निश्चित है कि जो कौमें अपनी सुरक्षा के प्रति लापरवाह होती है उन्‍हें मिट जाना चाहिये। प्रक़ति ने एक चींटी को भी इतना ताकतवर बनाया है कि जब वह हाथी की सुंढ में घुस जाए तो उसकी मौत का वायस बन जाती है। हमें यह देखना होगा कि समाजिक संरचना का विकास हम किस प्रकार कर रहे है,उनमें राजठाकरे टाईप लोगों,सांप्रदायिक विद्वेष फैलाकर अपनी रोटी सेकनें वालों के उभरने की कितनी संभावनाएं है। पोटा या अन्‍य कानूनों की बात करने वालों को यह भी गौर करना चाहिये कि पहले से लागू किये गये कानूनों का क्‍या ह्रस हो रहा है। क्‍या सुरक्षा को लेकर हमने अपनी जिम्‍मेवारियों को समझा है. पूरे भारतीय परिवेश में मुंबई इन दिनों प्रतीक के रूप में उभरा है. कभी यहां शिवसेना की सांप्रदायिक राजनीति हावी होती है तो कभी राजठाकरे की क्षेत्रीयतावाद की राजनीति तो कभी अंडर वर्ल्‍ड के खौफ के साए में लोग दहशत में रहते है. यहां मीडिया का रोल भी कमोबेश उजागर हुआ है. तरूण भारत ने जहां हेमंत करकरे के पुत्र द्वारा नशीली दवाओं के सेवन करने संबंधी खबरे दी तो सामना ने हिंदू विरोधी अधिकारियों के नाम पते उजागर करने व शिवसेना कार्यकर्ताओं द्वारा उन अधिकारियों के घरों के बाहर प्रदर्शन करने संबंधी खबर प्रकाशित की. हद तो यह है कि हमेशा तेज गति से आगे रहने वाली इलेक्‍ट्रानिक मीडिया भी घंटों बाद इतने बडे हमले को समझ सकी. देश भक्ति का जजबा तो उनमें दूसरे तीसरे दिन ही आया. एक चैनल ने तो आतंकवादियों की तस्‍वीरे तक दिखा दी. खबर है कि जब बाहर पुलिस अधिकारी आतंकवादियों के शिकार हुए तो ताज के अंदर छिपे आतंकी जश्‍न मना रहे थे। सूचना के इस कदर लापरवाह होने का नतीजा यह भी हो सकता है कि विदेशों में बैठे आका इससे अगली रणनीति तय कर रहे हो। हमें अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी स्‍तर पर लापरवाही नही बरती चाहिये,खासकर यह जिम्‍मेदारी तय होनी चाहिये कि राष्‍ट्रीय विपत्ति के क्रम में,आतंकवादी गतिविधियों या बाहय आ‍क्रमण के समय बरती जाने वाली कोताही को किसी सूरत में बख्‍शा नही जायेगा। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक पूरे देश को ग़ह मंत्री शिवराज पाटिल के इस्‍तीफे व वित्‍त मंत्री रहे पी चिदंबरम द्वारा पदभार संभाले जाने की सूचना आ चुकी है। क्‍या यह वह समय नही है जब सिर्फ इस्‍तीफे को अपनी जिम्‍मेवारी से बचने का माध्‍यम भर न माना जाये बल्कि इस प्रकार की लापरवाही बरते जाने के लिए राजनेताओं को भी दोषी बनाया जाये. अतंत देश सबका है, देश की सुरक्ष्‍ाा की जिम्‍मेवारी सब पर है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-8044057230239306955?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/8044057230239306955/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=8044057230239306955&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8044057230239306955'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/8044057230239306955'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_30.html' title='आतंकवाद और हमारी जबाबदेही'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5943522162658263434</id><published>2008-11-29T16:43:00.005+05:30</published><updated>2008-11-29T18:00:28.618+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='त्‍वरित टिप्‍पणी'/><title type='text'>वह पल जो ठहर सा गया...... कब रुकेंगे राजनेता</title><content type='html'>मुंबई में हुई आतंकवादी घटना को देख व सुनकर पूरा देश स्‍तब्‍‍ध रह गया।तीन दिनों तक राष्‍ट्र की धमनी में दौडता रक्‍त ठहर सा गया,एक एक पल आत्‍मचिंतन व चुनौतियों के प्रति अपनी जिम्‍मेवारी का एहसास कराता प्रतीत हुआ। क्‍या राजनेता, क्‍या अभिनेता,व्‍यवसायी,चिंतक,आम नागरिक सभी यह सोचने को बाध्‍य हो गये कि हमारे राजनेता आखिर कौन से कार्य में व्‍यस्‍त है जो उन्‍हें देश की आंतरिक सुरक्षा के प्रति लापरवाह बनाये हुए है. वैदेशिक नीति के उपर टीका टिप्‍पणी लगातार की जाती रही है किंतू क्‍या हम सचमुच बाहय आ‍क्रमण को झेलने के लिए सामर्थ्‍यवान है।आंतरिक सुरक्षा की बदहाल स्थिति को लेकर क्‍या ठोस रणनीति बनायी जा सकती है,इस पर कभी विचार किया गया है भी या नही।थोडी देर के लिए अपने नेत़त्‍वकर्ताओं के प्रति अपने मन को शिथिल भी कर ले तो क्‍या देश का प्रत्‍येक नागरिक इन आतंकवादी घटनाओं से मुकाबले के लिए मानसिक रुप से तैयार है. यह चिंता लगातार व्‍यक्‍त की जा रही है कि मुंबई में तीन दिनों तक आतंकवादियों द्वारा दहशत का महौल बनाये रखने के पीछे लंबी व ठोस रणनीति अपनायी गयी होगी। तो क्‍या हमारे लिए यह जानना जरूरी नही कि ऐसे मौकों पर हमें किस प्रकार प्रतिक्रिया देनी है। आक्रमण हमारी नीति नही हो सकती लेकिन क्‍या जो आक्रमण करें उसे चिन्हित करते हुए उस पर प्रत्‍याक्रमण करना हमारी नीति नही हो सकती। जो कायर कौमे होती है,वही इससे इंकार कर सकती है। भारतीय रक्‍त में इस प्रकार की कायरता का कोई स्‍थान नहीं है।हमें वैसे देशों को जो आतंकवाद या आतंकवादी गतिविधियों को प्रश्रय दे रहे है खासकर, हमारे पडोसी मुल्‍क उनको स्‍पष्‍ट रुप से यह एहसास दिलाया जाना जरूरी है कि वे संभल जायें अन्‍यथा परिण्‍ााम के लिए तैयार रहें। भारतीय सीमा में पहली बार किसी आतंकवादी गतिविधि के लिए सेना के अधिकारी पर लगातार किये जा रहे आरोप प्रत्‍यारोप, एक प्रांत के लोगों को दूसरे प्रांत में अपमानित किया जाना,आतंकवादी गतिविधियों के लिए चिन्हित किये जा रहे लोगों के साथ नरमी का रुख हमें लगातार कमजोर बनाता जा रहा है। क्‍या सिर्फ वोट व सत्‍ता की खातिर एक अरब लोगों का यह मुल्‍क इतना कमजोर हो सकता है। राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्‍वकाल में श्रीलंका में जितनी जल्‍दी सेना को भेज कर सफलता पायी गयी थी,या मालदीव में हुए तख्‍त पलट को जिस कदर त्‍वरित गति से सुलझाया गया था,क्‍या वह आज 08 आते आते इतिहास के पन्‍नों में गुम हो गया। देश के खुफिया संगठन को क्‍यो कमजोर बनाया जा रहा है,उन्‍हें स्‍वतंत्रता देकर क्‍यो नही उनकी रिपोर्टो पर आक्रमक रुख अपनाया जाता है. राज्‍यों की अपनी खुफिया विभागे है जो लुंज पूंज स्थिति में है. उन्‍हें आधारभूत सुविधाएं दी जानी चाहिये या नहीं इस पर क्‍यो नही महत्‍वपूर्ण निर्णय लिए जाते. मुंबई पुलिस की स्‍कॉटलॉड यार्ड से तुलना की जाती है,वह एक राहुल राज की हत्‍या करने में स्‍वयं को जाबांज घोषित करती है लेकिन मौका देश के दुश्‍मनों से भिडने का हो तो तीसरी पंक्ति में नजर आती है। मुंबई के राजनेता जो मराठी गैर मराठी के नाम की कुछ दिनों पूर्व तक माला जप रहे थे,उन्‍हें सांप सूंघ गया है। हिंदू मुस्लिम व अन्‍य कौमों में नफरत की आग उगलने वाले,फतवा देने वाले तथाकथित संप्रदायिकता विरोध के नाम पर अपना उल्‍लू सीधा करने वाले आज किस दूनिया में है यह किसी को पता तक नही है. क्‍या देश सिर्फ उनका है जो हाथों में हथियार लेकर देश के नाम पर शहीद होने के लिए तैयार है, या उनका भी है जो उनके परिवार के साथ शांति से समय गुजारना पसंद करते है. क्‍या देश के नीति नियंताओं को यह नही सूझता कि इस देश में शांति व सदभाव के बिना किसी प्रकार का विकास नामुमकिन है।वोट व सत्‍ता के पीछे पागल बने लोगों को अपने हाथों को मजबूत बनाने के लिए दूसरे विकसित देशों से उद्वाहरण लेना उचित नही प्रतीत होता. हम संविधान का निर्माण उधार लेकर दूसरे मुल्‍कों से कर सकते है,उसपर इतरा सकते है कि देखों दूनिया के बेहतरीन प्रणाली को हमने अपनाया है. तो क्‍या देश के दूश्‍मनों से निबटने के तरीके से नही सीख सकते,शांति व सदभाव से रहना नही सीख सकते, विज्ञान व तकनीक की प्रगति के लिए किये जाने वाले उपाय नही सीख सकते. आखिर कबतक हम अपने कांधों पर लाशों को ढोने के लिए मजबूर होंगे. मुंबई की घटना पर टिप्‍पणी करते हुए अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ ने क्‍या खूब कहा कि वर्तमान भारतीय ग़हमंत्री बेहद कमजोर है। उनसे ऐसी घटनाओं से निपटने को लेकर या पूर्व की तैयारी को लेकर बेहतर उम्‍मीद नही की जा सकती। यूपीए हो या एनडीए दोनों धडों को कम से कम देश हित में एक सुस्‍पष्‍ट नीति आतंकवाद को लेकर विकसित करनी चाहिये ताकि अव्‍वल तो ऐसे हालात न पैदा हो या संकट आए भी तो उससे कडाई से निपटा जा सके। गोली का जबाब गोली से देने की घोषणा करने वाले क्षेत्रीय राजनेताओं  को भी सर्तक होकर अपने बयान देने चाहिये। प्रांत कमजोर होता है तो देश कमजोर होता है, लोगों को नागरिक अधिकारों के साथ कर्तव्‍यों की भी जानकारी देनी चाहिये। हमें छोटी छोटी बातों से उपर उठना सीखना होगा। कभी कभी तो अपने देश के लोगों के विचारभिन्‍नता को देखकर लगता है कि सचमूच यह कुपमंडूकता से उबरने में अभी तक नाकाम साबित होता रहा है. कोई तो हो जिसे राष्‍ट्रीय व जातीय श्रेष्‍ठता का अभिमान हो,सिर्फ मुठठी भर लोगों के द्वारा राष्‍ट्रगान गाये जाते रहे, या सिर्फ स्‍वतंत्रता अथवा गणतंत्रता दिवस के अवसर पर औपचारिकता निबाहे जाते रहे तो इन हालातों से निबटना मुश्किल है. अपने देश के स्‍कूल व कॉलेजों में नौजवानों को सैन्‍य प्रशिक्षण देने के लिए नेशनल कैडेट कोर एनसीसी की स्‍थापना की गयी है। यह प्रशिक्षण सुविधा देने मात्र का संगठन नहीं है बल्कि अपने देश को करीब से जानने व महसूस करने वाला संगठन है। आज राहुल गांधी को घूम घूमकर अपने देश को समझना पड रहा है काश, वे इसके माध्‍यम से प्रशिक्षित होते तो संभवतया उन्‍हें सैन्‍य बारिकियों के साथ,अपने देश की विविधता में छिपी एकता के भी दर्शन हो गये होते। कोई आवश्‍यक नही कि एनसीसी प्रशिक्षित सैन्‍य सेवा में ही जाये, देश के किसी भी भाग में, किसी भी कार्य में लगे युवाओं के जीवन में, व्‍यक्तित्‍व में यह युगांतकारी परिवर्तन ला देता है। सेना,पुलिस  या वर्दी खौफ व आतंक पैदा नही करती बल्कि देशद्रोहियों, समाजविरोधियों का सर कुचलने में सहायक सिद्व होते हुए प्रतीत होती है.यह अच्‍छे राजनेता भी हमें दे सकती है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5943522162658263434?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5943522162658263434/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5943522162658263434&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5943522162658263434'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5943522162658263434'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_29.html' title='वह पल जो ठहर सा गया...... कब रुकेंगे राजनेता'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3687668457907823067</id><published>2008-11-13T13:29:00.002+05:30</published><updated>2008-11-13T13:48:10.317+05:30</updated><title type='text'>सोने की चिडिया स्‍वीस बैंक में कैद</title><content type='html'>भारत को कभी सोने की चिडियां कहा जाता था, यहां दूध की नदियां बहती थी,यह मात्र कपोल कल्‍पना भर नही थी। सचमुच उस समय भारत धन धान्‍य से भरपुर था।यहां से मसाले,सुती वस्‍त्र,स्‍वर्ण आभूषण,आयुर्वेदिक दवा इत्‍यादि कई अन्‍य जरूरत की चीजों का निर्यात किया जाता था। भारतीय व्‍यापारियों को बडे स्‍वागत के साथ विदेशों में आमंत्रित किया जाता था। आज का भारत इसके ठीक उलट है। आज भारतीय अर्थव्‍यवस्‍थ्ा विकास के घोडे पर सवार होने के बावजूद गरीबी का अभि शाप ढोने को अभिसप्‍त है। सोने की चिडियां आज स्‍वीस बैंक में कैद है। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार स्‍वीस बैंकों में जमा राशि के पांच बडे स्रोतों में शामिल भारत के 1,456 अरब डॉलर,रूस के 470 अरब डॉलर,यूके के 390 अरब डॉलर,उक्रेन के 100 अरब डॉलर तथा चीन के 96 अरब डॉलर की मुद्रा स्‍वीस बैंक में कैद है। क्‍या ऐसा हमारे देश के नियति नियंताओं के सहयोग के बिना हो सकता है। क्‍या इसके लिए हमारे देश की आर्थिक नीतियां जिम्‍मेवार नही है। हद तो यह है कि स्‍वीस बैंकों में जमा राशि भारत के कुल राष्‍ट्रीय आय से डेढ गुना ज्‍यादा है तो भारत के कुल विदेशी कर्जो का 13 गुना है। इस राशि को वापस लाकर देश के 45 करोड गरीबों में बांट दिया जाये तो सब को कम से कम एक लाख रुपये मिलेगा।ऐसा नहीं कि इसमें सिर्फ बेईमान राजनेताओं के धन जमा है, इसमें उद्योगपतियों, फिल्‍म कलाकार, क्रिकेट खिलाडियों के साथ कई लोगों की राशि भी शामिल है। प्राप्‍त जानकारी  के अनुसार इन बैंकों की खासियत यह है कि इसमें जमा राशि पर कोई टैक्‍स नही लगता, न ही  जमाकर्ताओं के नाम व नंबर सार्वजनिक किये जाते है। अब आप ही विचार करें कि ऐसे बैंकों के कर्ताधर्ताओं को क्‍या कहा जाए देश के सुधारक, विकास की ओर ले जाने वाले पुरोधा, देश के आईकॉन, या गरीबों का रक्‍तचूषक. आज आप राजनीतिक उठापटक के बीच जो भी घात प्रतिघात कर लें, मुलायम कहें की सत्‍ता में आने पर मायावती की मूर्ति उखाड देगे, तो अगला कहेगा कि मुसलमानों को जन्‍नत नसीब करा देंगे,गरीबों को लॉलीपाप बांटेंगे, लेकिन सच यही होगा कि ये सब बरगलाने वाली बातें है. इनका न तो गरीबों के बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य,शिक्षा, उनके जीवन स्‍तर में सुधार से कोई दूर दूर तक संबंध है, न ही उनके माता पिता की आय में सुधार, उनका देश के विकास में सक्रिय भागदारी निभाने के अवसर प्रदान किये जाने से है. ये जो मिडिया हाउस है,भले ही गला फाड कर चिल्‍लाये कि ये हो रहा है, वो हो रहा है लेकिन सच्‍चाई इससे कोसों दूर है. हमारे जनप्रतिनिधियों के ड्राइंगरुम से निकलकर कोई बात आगे नही जाती.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3687668457907823067?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3687668457907823067/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3687668457907823067&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3687668457907823067'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3687668457907823067'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_13.html' title='सोने की चिडिया स्‍वीस बैंक में कैद'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6105056958383995539</id><published>2008-11-08T14:51:00.001+05:30</published><updated>2008-11-08T14:51:52.288+05:30</updated><title type='text'>ब्‍लॉग लेखन क्‍या मीडिया के गटर की गंगा है</title><content type='html'>मेरी नजर अचानक एक ऐसे लेख पर पडी जिसमें ब्‍लॉग को मीडिया की गटर गंगा का हिस्‍सा बताया गया है. ऐसे में प्रश्‍न यह उठता है कि क्‍या ब्‍लॉग लेखन सचमुच इतना गंभीर नही है, इसके पाठक इसके बारे में क्‍या राय रखते है, इसकी समझ अब तक नहीं बन पा रही है. दूसरे अर्थो में यही समझा जा रहा है कि ब्‍लॉग सिर्फ मन की भडास मात्र है. मेरी राय में ऐसा नहीं है. खासकर, जब कोई पत्रकारिता जगत का व्‍यक्ति ब्‍लॉगिंग से जुडता है तो निसंदेह मेन स्‍ट्रीम में छुट जाने वाली बातों को रखने का प्रयास करता है. ये छूट गयी बातें मीडिया की गटर से निकली नहीं होती न ही गटर में फेंके जाने योग्‍य ही होती है. यह समझने वालों का भ्रम हो सकता है. साहित्‍य व पत्रकारिता के मेन स्‍ट्रीम में भी ऐसी बातें पायी जाती है, जो न सिर्फ गटर में फेंकी जाने वाली होती है बल्कि लगता है कि गटर से ही निकली हुई है. पाठक उसे वैसे ही ग्रहण करते है जिसके योग्‍य वो रचना होती है या उसकी अधिकारी होती है. कई ऐसे ब्‍लॉग है जो कई नई व रोचक जानकारी देते है. हमारा ज्ञानवर्धन करते है, कई ब्‍लॉग तो अपने आप में वि शद जानकारी तक उपलब्‍ध कराते है. जहां तक पत्रकारों के द्वारा अपने मन की खटास को इसमें टांके जाने की बात है, यह पत्रकार की अपनी अभिरुचि या क्षमता पर नि र्भर करता है कि वो अपने मन के  वि ष, जहर को किस प्रकार औरों के लिए अम़त बना पाता है. हलाहल पीने वाले ही यह समझ सकते है कि अंम़त की जरूरत किसी कदर लोगों को होती है. जो अच्‍छा पढना, लि खना व समझना चाहते है, उन्‍हें ब्‍लॉग लेखन निश्चित रुप से अपनी ओर खींचता है, यह चालू भाषा में कहे तो बाथरूम सिंगर को गाने का एक बेहतर मौका फराहम करता है. यह समझने की बात है कि आप उस संगीत को कैसे लेते है. आपकी मौलिक प्रति भा का कैसे विकास होता है. कैसे आप अपनी जगह बना पाते है. पत्रकारिता के मेन स्‍ट्रीम में या सक्रिय लेखन के क्षेत्र में, कला साहित्‍य से इतर प्रत्‍येक कार्य में यही जददोजहद कार्य करती है. यही किसी को महान तो किसी को शैतान बनाता है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6105056958383995539?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6105056958383995539/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6105056958383995539&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6105056958383995539'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6105056958383995539'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_5878.html' title='ब्‍लॉग लेखन क्‍या मीडिया के गटर की गंगा है'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1537248807682102055</id><published>2008-11-08T14:06:00.003+05:30</published><updated>2008-11-08T14:18:21.688+05:30</updated><title type='text'>टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद</title><content type='html'>समाज में,साहित्‍य में, साहित्‍य के मंच पर जो कुछ घटता है उसे अपने नजरिये से मैने सामने रखा. निसंदेह उनपर अलग अलग टिप्‍पणियां होगी. जहां तक एक टिप्‍पणी कर्ता द्वारा उठाये गये प्रश्‍न की बात है, इतना निश्चित जानिये कि सबका अपने दायरे में काम करना ही अच्‍छा लगता है. आप किसानी बेहतर करते हो, साथ ही आपसे उम्‍मीद की जायें कि आप सेटेलाइट के भी ज्ञाता हो यह मुश्किल है. मैने कथाकार की पीडा को अभिव्‍यक्‍त करने का प्रयास किया. अब आगे बढने वाले सह़दय लोगों के हाथों से उम्‍मीद बनती है कि वे ऐसा कुछ करें ताकि कथाकार महोदय अपने कष्‍टों से उबर सकें. मेरा आशय किसी एक का कथाकार का नही ऐसे कई विद्वान व आचार्य धक्‍के खाते फिर रहे है उनकी नोटिस तक नही ली जा रही,पहले उन्‍हें नोटिस में लाना जरूरी हैं. क़पया इसमें कोताही नहीं की जानी चाहिये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1537248807682102055?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1537248807682102055/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1537248807682102055&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1537248807682102055'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1537248807682102055'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post_08.html' title='टिप्‍पणी के लिए धन्‍यवाद'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-837961220238534455</id><published>2008-11-01T18:49:00.004+05:30</published><updated>2008-11-01T19:08:53.313+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='त्‍वरित टिप्‍पणी'/><title type='text'>हिंदी वालों की आंखों का पानी गायब</title><content type='html'>आज हिंदी प्रदेश के हिंदी सेवियों के आंखों का पानी गायब हो गया है. यह सब लि खते हुए ह़दय को बहुत कष्‍ट हो रहा है जो आज मैने अपने आंखों देखी है. आज दोपहर में पटना में साहित्‍य के नामचीन आलोचक व साहित्‍यकार डा नामवर सिंह द्वारा बिहार के तेजतर्रार मंत्री के प्राइवेट से‍केट्री अशोक कुमार सिन्‍हा लि खित पिता नामक पुस्‍तक का लोकापर्ण किया गया. इसमें साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार प्राप्‍त कवि अरुण कमल सहित कई ख्‍यात स्‍थानीय साहित्‍यकार व आलोचक शामिल थे. डा नामवर सिंह ने अपने संबोधन में स्‍पष्‍ट भी किया कि वे पूर्व से अशोक जी को नही जानते, आलोचक नंद कि शोर नवल जी के द्वारा जानकारी मिलने पर मैने इन्‍हें जाना. इस समारोह में बिहार के पांच से सात प्रमुख एमएलसी, वि धायक भी उपस्थित थे. पुरी गहमागहमी के साथ कार्यक्रम चला. मैं उस पर नही जाना चाहता कि किसने क्‍या कहा और बातों ही बातों में कटाक्ष के कितने दौर चले. लेकिन जो मूल बात है कि इसी समारोह में ख्‍यात कथाकार मधुकर सिंह भी उपस्थित हुए. हाल ही में उन्‍हें पक्षाघात की शिकायत हो गयी है. साहित्‍य प्रेम व कुछ मजबूरी और उम्‍मीदों के साथ वे समारोह में अपने पोते के साथ पहुंचे. उनके हाथों में मुख्‍यमंत्री व मंत्री के नाम पत्र था. उनकी इच्‍छा थी कि शायद उसपर कुछ लोग अपने हस्‍ताक्षर कर दें ताकि सरकार के पास भेजा जाये तो कुछ आर्थिक सहायता मिले ताकि रोग से लड सके,थोडी सी जीवन मिल जाये, कुछ और साहित्‍य को दे सके. लेकिन हाय, रे हिंदी के सुधी श्रोता व दर्शक सब के सब उस भीड में शामिल थे जिनके लिए नामवर के दर्शन मात्र से ही पूर्व कर्मो का पाप मिटने का भरोसा था. किसी ने भी मधुकर सिंह की ओर ध्‍यान नही दिया. धीरे धीरे सीढियां उतर कर वे अपनी राह चले गये.उनके कापतें हाथों से छडी कब छुट जायेगी यह किसी ने नही महसूस की. हिंदी प्रेमियों की यह ह़दयहीनता समझ से परे है. हिंदी वालों की आंखों में अब पानी सिर्फ तारीफ व तालियों के साथ प्रशंसा के सूनने के लिए ही रह गया प्रतीत होता है. मैं ये नहीं कहता कि समारोह न हो, लेकिन सिर्फ कुडा कर्कट के लिए नामचीन लोग सामने आ जाये और जो बेहतर ल‍ि खे जा रहे हो उन्‍हें प्रशंसा के शब्‍द तो छोडिये उन्‍हें कोई पूछने वाला न हो उधर आलोचक अपनी भ़कुटी ताने रहे यह सब हिंदी में ही देखने को मिलती है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-837961220238534455?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/837961220238534455/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=837961220238534455&amp;isPopup=true' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/837961220238534455'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/837961220238534455'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/11/blog-post.html' title='हिंदी वालों की आंखों का पानी गायब'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6083895210097748400</id><published>2008-10-27T14:01:00.004+05:30</published><updated>2008-10-27T17:06:29.608+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पत्रकारिता'/><title type='text'>रिपोर्टिंग ऐसी जो पाठक मन भाये</title><content type='html'>वर्तमान हिंदी पत्रकारिता का परिद़श्‍य कुछ इस तरह बन चुका है कि पाठक के मन को लुभाने वाले समाचार को परोसने के नाम पर उलूलजूलल तथ्‍य परोसे जा रहे है. यह ध्‍यान रखा जा रहा है कि वह किसी को नुकसान न पहुंचायें चाहे वह भ्रष्‍टाचारी हो, अत्‍याचारी हो या देशद्रोही. आज की खबरों से न तो किसी का नुकसान पहुंचता है न वि शेष फर्क ही. पत्रकारित से प्रतिबद्वता,समर्पण व त्‍याग जैसे शब्‍द गायब हो चुके है. इसका प्रयोग किया भी जाता है तो प्रबंधकीय मिटिंगों में पत्रकारिता के तेवर को बचाये रखने के नाम पर पत्रकारों को घुटटी पिलाने मात्र के लिए ही. समाचार पत्र को संपादक नही बल्कि ब्रांड मैनेजर तय करने लगे है. ये ऐसे मैनेजर है जो नये संस्‍थानों से एमबीए की डिग्री लेकर बाजार में आ रहे है. इन्‍हें संस्‍थान को मुनाफे लाने के लिए किसी भी बात से गुरेज नही है. इन्‍हें इससे कोई खास मतलब नही कि रिपोर्ट से किसी की नींद उड जाती है या दिन का चैन खो जाता है. किसी भी भाषा वि शेष के पत्र हो उन्‍हें आप देख ले. उसमें खबरें कम चटपटी मसालेदार लटके झटके खुब दि खेंगे. एक पत्र में 25 खबरें हो तो कम से कम 40 विज्ञापन देखने को मिल जायेंगे. उनकी सफलता का मूल पाठकीयता कम दर्शनियता ज्‍यादा होती है. हिंदी पटटी में तो समाचार पत्रों को कबाडा ही बना दिया गया है. भाषा के नाम पर ऐसे प्रयोग किये जा रहे है कि किसी भी हिंदी प्रेमी के आंखो से बरबस आंसू निकल पडे. शिट,फन,फूड,फंडा को युवा के बीच लोकप्रिय मानकर खबरों के बीच उडेला जा रहा है.यहां पेज 3 पत्रकारिता भी स्‍वयं शरमा जाती है. यूथ व विमेंस के नाम पर प्रयोग इस तरह से किये जा रहे है कि भाषा विश्ेषज्ञ पानी भरने लगे.धार्मिक, सामाजिक व सांस्‍क़तिक रुपों को दर्शाने के चक्‍कर मे भाई बहन के रिश्‍ते हो या सास बहु के रिश्‍ते सब के बीच मीडिया पहुंच कर अपनी दखल बनाने में लगा है. संपादक की दखल मीडिया में नाम भर को रह गयी है.कई नामचीन अखबार तो अब बस मैनेजरों के सहारे ही अखबार को खींचने में अकलमंदी समझते है. पत्रकारिता मनोरंजन उद्योग का हिस्‍सा बन गयी है. मीडिया संचालको को पता तक नही कि पाठक जो चाहते है, वह उन्‍हें मिल भी रहा है या नही. उनके लिए विज्ञापन प्रदान करने वाली  पठनीय या देखने की सामग्री उससे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण होती है. स्‍वतंत्रता के समय स‍मर्पित पत्रकारों की जो त्‍याग व सेवा भावना थी, वह स्‍वतंत्रता प्राइज़ के कुछ दिनों बाद तक बनी रही लेकिन 80 के दशक के बाद यह लुप्‍त प्राय हो चुकी है. मिडिया के सभी बडे दिग्‍गज इससे वाकिफ है लेकिन बाजारवाद के आगे सब के सब नतमस्‍तक हो चुके है. पत्रकारिता के प्रशिक्षण के दौरान भले ही सिद्वांत कितनी पढा दी जाये, व्‍यवहार में आने पर सब कुछ बदल जाता है. प्रशिक्षितों की टीम प्रशिक्षण के नाम पर ब्रांड के लिए पेशेवर तेवर बनाने व किसी को नुकसान न हो ऐसी खबरें गढने के लिए प्रेरित करती है. मीडिया हमेशा सत्‍ता की धूर विरोधी रही है चाहे वह जैसे भी हो. क्‍योकि सत्‍ता हमेशा अपने हिसाब से काम करती है, जनता उसके बीच से हासिये पर ढकेले जाते है,ऐसे में पत्रकारिता ही उनकी भावनाओं की रक्षा करती है. यह सही है कि जनांदोलनों के अभाव से वर्तमान मीडिया भ्रमित हो चुकी है. स्‍वयं मिडियां के क्षेत्र में भी समान विचारों वाले लोगों को आंदोलन के रूप में सामने आकर भावी पीढी को मागदर्शन करने की जरूरत है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-6083895210097748400?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/6083895210097748400/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=6083895210097748400&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6083895210097748400'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/6083895210097748400'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_27.html' title='रिपोर्टिंग ऐसी जो पाठक मन भाये'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5475842239494040225</id><published>2008-10-24T18:48:00.002+05:30</published><updated>2008-10-24T18:59:38.043+05:30</updated><title type='text'>ठाकरे की राजनीति व नपूंसकों की जमात</title><content type='html'>इन दिनो मीडिया व देश का बच्‍चा बच्‍चा राज ठाकरे नाम के शख्‍स की चर्चा में मसगूल है. गोया ऐसी बात नही कि वह गांधीजी का उत्‍तराधिकारी हो गया है,बल्कि उसने देश को अंधकार के गर्त में ले जाने का ऐसा घिनौना प्रयास किया है जिसकी जितनी निंदा की जाये कम है. यह शख्‍स जब कल तक अमिताभ परिवार को अपना टारगेज बनाये हुए था,तब लोग उसके वि षय में तरह तरह के अर्थशास्‍त्र की व्‍याख्‍या कर रहे थे, अमितजी ने उससे माफी मांगने में ही अपनी भलाई समझी, इसके पूर्व भी जब ठाकरे के गंूडों ने बिहारी छात्रों व उत्‍तर भारतीयों को टारगेट में लेकर हमला बोला तो महाराष्‍ट्र सरकार व केंद्र सरकार इसे अगंभीरता पूर्वक ले रही थी. लेकिन अब तो सर से पानी उपर हो गया है. इस देश में राजठाकरे जैसे राजनेताओं को पनपने देने वाले वही नपूसंक नेता है जो कभी अपराधियों व गूंडों को संसद तक पहुंचाने में स्‍वयं को गर्वान्वित महसूस करते रहे है. पैर के घाव को ठीक करने के बाद जरूरी है कि सर के धाव को भी ठीक किया जाये.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5475842239494040225?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5475842239494040225/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5475842239494040225&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5475842239494040225'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5475842239494040225'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_24.html' title='ठाकरे की राजनीति व नपूंसकों की जमात'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-3534413513240923601</id><published>2008-10-17T13:30:00.002+05:30</published><updated>2008-10-17T13:41:07.300+05:30</updated><title type='text'>दौडती भागती जिंदगी में पीछे छूट रही संवेदनाएं</title><content type='html'>आज की दौडती भागती जिंदगी में हमारी संवेदनाएं पीछे छूट जा रही है. एक ओर जहां ग्‍लोबलाइजेशन के दौर में स‍बकुछ सिमटा प्रतीत हो रहा है तो वही, कई भावनाएं विरले ही देखने को मिलती है. सत्‍ता का गलियारा हो या विश्‍वविद्यालय का कैंपस, अस्‍पताल की सेवा भावना हो या नगर निगम की गतिविधियां हर ओर आप नजर दौडाएं कहीं कोई तारतम्‍यता दि खाई नही देती है. लगता है मानो सब अपने अपने काम निपटाये जाने में ही भरोसा करते है. छोडिये इनकों साहित्‍य, पत्रकारिता, कला व फिल्‍म की ओर भी देखे तो मानों कही कोई सामान्‍य द़ष्टि देखने को नही मिलती जहां आम आदमी अपने वजूद को तलाश सके. इसलिए अब वहां भी कोई सर्वमान्‍य लेखक,पत्रकार या सुपर स्‍टार देखने को मिलता. इन सब के बीच आप अपने राष्‍ट्रीय पहचान को देखे तो सब कुछ अलग थलग दि खता प्रतीत होता है. क्‍या इसे सिर्फ द़ष्टि भ्रम कहकर आगे बढ जा सकता है. यह ठीक है कि पूर्व की सामाजिक गतिविधियों से वर्तमान की सामाजिक गतिविधियों में स्‍पष्‍टता व खुलापन आया है, लोगों की देखने की द़ष्टि बदली है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-3534413513240923601?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/3534413513240923601/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=3534413513240923601&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3534413513240923601'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/3534413513240923601'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_17.html' title='दौडती भागती जिंदगी में पीछे छूट रही संवेदनाएं'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-4218957484990631417</id><published>2008-10-14T00:30:00.003+05:30</published><updated>2008-10-14T01:58:10.140+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='पत्रकारिता'/><title type='text'>तोल मोल की बाते</title><content type='html'>कैसे भी कुछ भी विचार आ जाते हो विचार अभिव्यक्ति की खुली छुट ने हिंदी ब्लॉग की दुनिया में सब कुछ जल्दी से उगल देने बडा अवसर उपलब्ध करा दिया है. हिंदी समाचार पत्रों ने अपने सामने एक लक्छामन रेखा   खीच  रखी  है इसलिए वहा एसा कुछ कर पाना मुश्किल है.वहा तो सड़क पर एक गुमनाम मुशाफिर की मौत होने पर सिंगल कालम तो किशी नामचीन की मौत हो ने पर डबल कालम की परिपाटी चलती है.किसी नामचीन नेता ने कुछ उगला तो उसे तिन कालम तक जगह दी जा सकती है . एक औरत की इज्जत सरेआम लुटती है तो फिर उसीतरह से भेदभाव किया जाता है जैसे की गैंग रेप के मामले अलग तरह से. खबरों को लिखते समय यह देखना ज्यादा जरुरी समझा जाता है की उसका पाठक वर्ग कितना है ,किन पाठको को कितना ग्राम समाचार चाहिए. जितना ही ज्यादा कुंठित पाठक वर्ग होता है उन्हें उनके लायक खबरे परोसी जाती है. मनोरंजन के नाम पर तो लुट की खुली छुट है, कुछ कुछ हमारे ब्लोगर  बंधू भी ऐसा एसा ही प्रस्तुत कर रहे है.मस्तिस्क के विकारों को निपटने का ग़ालिब ये ख्याल अच्छा है.किसी भी समाचार या विचार को पढ़ कर आप को मति भरम की शिकायत हो जाये तो बिहार वालो के पास एक बड़ी ही बेशकीमती बुधिवर्धक चूर्ण मिलाती है उसकी इस्तेमाल करना न भूले.हिंदी के सु लेखको को तथा प्रकाशको को आलू प्याज की तरह अपने लिखे व् छापे गए सामग्री की कीमत वसूल किये जाने मात्र से मतलब है. व्यक्ति का चरित्र तो खो ही रहा है राष्ट्र का चरित्र भी धूमिल हो रहा है. समाजिकता समाप्त हो रही है व्यकितिवाद हावी हो रहा है.हमारी निजता ,मौलिकता,विचारो की सुदृढ़ता ख़तम हो रही है.जोजेफ मेजनी के शब्दों में शिछा, स्वदेशी तथा स्वराज्य राष्ट्रीयता  के तीन  प्रधान स्तम्भ है. पता नहीं की आज जो पढाई हमें लाखो रूपये की नौकरी उपलब्ध करदेती है वह एक अच्छा इन्सान क्यों नहीं बना पाती है . स्वदेश व राष्ट्र के प्रति प्रेरित क्यों नहीं कर पाती है.स्त्री पुरुष,जाती धर्मं से ऊपर उठाकर दिन दुखियों की सेवा के लिए आगे क्यों नहीं बढ़ पाती है. आज से सात दशक पूर्व गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने प्रताप में लिखा था - आदर्शो पर मरना और उनके लिए जीना उन लोगो की दृष्टि में केवल मुर्खता है जिन्हें सुगमता प्रिय है और जो हाथ के पास का लाभ देख सकते है और जिनकी संख्या अब दिन दिन बढती जाती है.  गौर से हम देखे तो आज भी गुलामी से बेहतर नहीं है खाने को हम स्वतंत्र है लेकिन मानसिकता अब भी गुलामो वाली ही है. २१ वी सदी में भी वही जिसे पिटे लकीरों को हम पिट रहे है जो कब का ख़त्म हो जाना चाहए था. हिंदी पत्रकारिता व लेखन में जो परिवर्तन दिख रहे है उससे क्या आप और हम संतुष्ट है - विचार किया जाना चाहिए.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-4218957484990631417?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/4218957484990631417/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=4218957484990631417&amp;isPopup=true' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4218957484990631417'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/4218957484990631417'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_14.html' title='तोल मोल की बाते'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-473127552232069048</id><published>2008-10-11T22:05:00.004+05:30</published><updated>2008-10-11T22:34:33.476+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='साहित्‍य'/><title type='text'>साहित्‍य लोगों के अं‍तर्मन से दूर हो रहा है</title><content type='html'>इन दिनों हिंदी साहित्‍य लेखन आम जनों के अ‍तर्मन से दूर होता जा रहा है. शायद हिंदी के लेखक व सुधी पाठकों के बीच मौजूद भ्रम को छोड दे तो ऐसा मालूम होता है कि साहित्‍य अब ज्‍यादातर स्‍व चिंतन व सुख के लिए लि खी जा रही है. अपने विचारों को थोपनें के चक्‍कर में  कई बार अच्‍छे अच्‍छे लेखक भी भटकाव के शिकार हो रहे है. पिछले दिनों पटना में दिनकर जयंती के अवसर पर साहित्‍य अकादमी,नई दिल्‍ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बरबस साहित्‍य के प्रति घटती रूचि को लेकर प्रख्‍यात साहित्‍यकार,आलोचक व कवि अशोक बाजपेयी को कहना पडा,ऐसी भीड बिहार में ही देखने को मिल सकती है, साहित्‍य के प्रति ऐसा लगावा हिंदी भाषी अन्‍य प्रदेशों यूपी,राजस्‍थान या मध्‍य प्रदेश में भी देखने को नही मिलती. जब उनसे मैने पूछा कि हिंदी कविता को गद्य बनाने के पीछे कौन सी विवेक बुद्वि है तो उन्‍होने कहा कि हिंदी गद्य व पद्य को करीब आना ही चाहिये. दूसरी ओर साहित्‍य अकादमी के वरीय पदाधिकारी ब्रिजेंद्र त्रिपाठी का कहना था कि अकादमी अपनी ओर से प्रयास कर रहा है कि हिंदी कविता में पुन लय व छंदों को प्रमुखता मिले. जब हिंदी वाले ही अपने आप में यह तय नही कर सकते कि कौन सी चीज पाठकों को रूचिकर लगेगी और कौन सी नही, अथवा कैसे लेखन को वरीयता दी जानी चाहिये तो फिर भला आम पाठक अपनी समस्‍या को कहा रखें. वैसे निश्चित है कि प्रत्‍येक पाठक अपने प्रिय रचनाकार को बार बार अवश्‍य ही पढना चाहेगा. कार्यक्रम के दौरान जब हिंदी कविता में नारी विमर्श जैसी चीजें शामिल हो रही है या नही यह पुछे जाने पर कवियत्री अनामिका ने कहा कि कविता चौराहे पर होने वाली बातचीत की तरह हो चुकी है.सब कुछ सुख व दुख बांटना चाह रही है. निश्चित तौर पर इसमें नारी विमर्श के पुट भी शामिल हो रहे है. खैर, इतना तो सत्‍य है कि आज जो भी महत्‍वपूर्ण पुस्‍तकें प्रकाशित हो रही खासकर, हिंदी भाषा में उनकी पांच सौ से तीन हजार प्रतियां ही प्रारंभ में छपती है,फिर उसके आठ दस पुनर्प्रकाशन के बाद उसकी सफलता का बखान किया जाता है. जबकि आज भी विदेशों में या अंग्रेजी भाषा के साहित्‍य की लाखों प्रतियां प्रकाशित होती है व प्रशंसित होती है. स्‍व भाषा या कहें राष्‍ट्रभाषा के संबंध में हमारी उदासीनता किस कदर है,इसकी परख करना मुश्किल है. आज से सात दशक पूर्व ही इस संबंध में गणेश शंकर विद्यार्थी जी ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए प्रताप में लि खा था कि जब किसी साम्राज्‍यवादी शक्ति द्वारा दूसरे देश पर कब्‍जा करने की कवायद की जाती है तो सबसे पहले उसकी भाषा के पर कतर दिये जाते है. भाषा के बिना कोई राष्‍ट्र अपने संपूर्ण शक्ति का उपयोग नहीं कर सकता. आज भी हम भले ही हिंदी के विस्‍तार, वैश्विक होने, बाजारवाद के लिए आवश्‍यक समझे जाने अथवा अन्‍य कारणों को लेकर हिंदी भाषा का गुणगान कर ले,यह कहने में जरा भी अतिश्‍योक्ति नही बरते कि हिंदी विश्‍व की किसी भी अन्‍य भाषा के समक्ष खडी होने की ताकत रखती है किंतू यह सत्‍य है कि हिंदी के प्रति लगाव व भाषा की समझ हममें विकसित होनी अब भी शेष है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-473127552232069048?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/473127552232069048/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=473127552232069048&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/473127552232069048'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/473127552232069048'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_11.html' title='साहित्‍य लोगों के अं‍तर्मन से दूर हो रहा है'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5314751509333412310</id><published>2008-10-06T16:38:00.002+05:30</published><updated>2008-10-06T16:51:30.173+05:30</updated><title type='text'>हिंदी पत्रकारिता की दूर्दशा व दशा</title><content type='html'>मौजूदा समय में हिंदी पत्रकारिता की दूर्दशा से सभी लोग परिचित है चाहे वे पत्रकारिता जीवन में शामिल है या उसके सामान्‍य पाठक. यहां मैं सिर्फ इतना भर कहना चाहता हूं कि पत्रकारिता जीवन को लेकर आज से 77 वर्ष पूर्व 1930 इसवीं में दैनिक प्रताप के संपादक व हिंदी पत्रकारिता के युग पुरूष गणेश शंकर विद्यार्थी ने जाे भी आशंकाएं व संभावनाएं व्‍य‍क्‍त की थी उससे एक इंच भी आगे नही बढ पायी है. क्‍या गजब की सोच उन्‍होने व्‍यक्‍त की थी, पत्रकारिता जीवन का कैसा मापदंड तय किया था,सामाचार पत्रों के संचालन के संबंध में विचार व्‍यक्‍त किया था,आज भी कमोबेश वैसे ही हिंदी पत्रकारिता चल रही है. बलिदानी पत्रकार गणेश जी की मौत उस समय हुई थी जब वे कानपुर में फैले दंगे के बीच जाकर बीच बचाव का कार्य कर रहे थे. लोगों को आपस में कटने भीडने से रोक रहे थे. आज कैसे कोई पत्रकार उस स्थिति में जाना स्‍वीकार कर सकता है जबतक की उसमें उतना नैतिक बल नही हो. आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेद्वी, महामना मदनमोहन मालवीय जैसे संपादकों के साथ कार्य कर चुके गणेश जी ने तब कहा था कि अहिंसा हमारी नीति है धर्म नही. महात्‍मा गांधी के विचारों से प्रभावित उनके अनुयायी की द़ढ भावना ही थी कि उन्‍होने अपने प्रताप के माध्‍यम से भगत सिंह , विस्‍मल जैसे क्रांतिकारियों के विचारों को प्रमुखता दी,आज उनके विचार एक लेखक पत्रकार के रूप में हम देख परख सकते है. हद तो यह है कि गणेश जी एक ऐसे इंसान थ्‍ो जिन्‍होने अपने जीवन में पहली बार जेल यात्रा ब्रि‍टि श सरकार की खिलाफत के कारण नही बल्कि स्‍थानीय जमींदार के द्वारा किये जा रहे अत्‍याचार की आंखों देखी रिपोर्ट प्रताप में प्रकाशित किये जाने को लेकर करनी पडी थी.आज किसी संपादक की जेल यात्रा की इस प्रकार का कारण होना असंभव व नामुमकिन है. आज मशीनों के साथ पत्रकार व समाचार पत्रों को धन उगाहने का माध्‍यम बना दिया गया है. लोग बाग जीवन के साथ अपने कर्तव्‍यों को भी नही समझ पा रहे है.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5314751509333412310?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5314751509333412310/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5314751509333412310&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5314751509333412310'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5314751509333412310'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/10/blog-post.html' title='हिंदी पत्रकारिता की दूर्दशा व दशा'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-5939309709289903465</id><published>2008-09-15T13:52:00.003+05:30</published><updated>2008-09-15T15:43:58.106+05:30</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='समसामयिक'/><title type='text'>नपुंसक नेतृत्व से हल नहीं हो सकता आतंकवाद</title><content type='html'>देश की राजधानी हो या कोई अन्य प्रान्त बेरोकटोक आतंकी घटनाये घट रही है.हमारा नेतृत्व नाकाबिल हो चूका है व राष्ट्र की मर्यादा के विरुद्ध आचरण कर रहा है. यह कौनसी सी मज़बूरी है की आतंकी घटना राष्ट्रीय राजधानी में घट जाती है और हमारे खुफिया तंत्र विफल साबित हो   &lt;span class=""&gt;जाते  है &lt;/span&gt;,हमारे राजनेता वोटो की राजनीती में लगे रहते है .  इस मसले पर शायद ही किसी विद्वान या संवेदनशील नागरिक ने अपने विचार व्यक्त नहीं किये हो.हमारे राजनेता किसी भी मसले को इतना खीचते है की वह बदबू देने लगता है.क्या भारत सरकार को पता नही की देश में किस तरफ से कितना घुसपैठ हो रहा है.पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अबुल कलाम का स्पस्ट मानना है-आतंक को रोकने के लिए केंद्र व राज्य का एकीकृत संयुक्त खुफिया तंत्र जरुरी है,साथ ही घुसपैठ रोकने के लिए एकीकृत सीमा सुरछा प्रबंधन की आवश्यकता है.सीमा पर आधुनिक सेंसर प्रणाली लगाना ,इन्फ्रा आधारित कैमरा लगाकर सखत नियंत्रण किया जाना चाहिए .उन्होंने सीमा सुरछा बल को सुझाव दिया है की इसरो द्वारा विकसित उपग्रह ,जो एक मीटर तक की छोटी जगह को भी देख सकता है उसे सीमा पर चौकसी में उपयोग करे.सवाल यहाँ यह है की एसा किये जाने से कौन अधिकारी या राजनेता रोकता है उसे चिन्हित किया जाना चाहिए.सर्वोच्च नयायालय की टिप्पणी है -लाखो लोगो का कोई जनसमूह जब किसी देश में अवैध रूप से प्रवेश कर जाता है तो यह एक प्रकार का आक्रमण है.इस आक्रमण से देश की सुरछा की जिमेदारी केंद्र सरकार की है . असम की ८२ लाख हेक्टेयर वन,भूमि,जनजातिय भूमि पर घुसपैठियों का कब्जा है.काजीरंगा नेशनल पार्क में हाथी और गैंडे की जगह बंगलादेशियों की झोपरिया दिखाई देती है.इस इलाके के छोटे बड़े व्यवसाय पर इनका दखल है.एक रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश को प्रतिदिन २० हजार गाय तस्करी होती है.बांग्लादेश में लगे मलेशिया के कत्लगाह से १,८७,००० टन गौमांश का निर्यात होता है ,जिससे सालाना ३०० करोड़ की आय होती है.हथियार,जाली नोट मादक व नशीले पदार्थ,एक रुपया के सिक्के की खास कर,क्योंकि इससे दो ब्लेड बनती है जो पांच रूपये में बिकती है. क्या भारत सरकार को यह सब कुछ नहीं पता है,नहीं है तो किसकी जिम्मेवारी है पता करने की.पाकिस्तान को लेकर कई बार चिंताए व्यक्त की जा चुकी है, क्या हमारी आंतरिक सुरछा नीति,विदेश नीति की समीछा कर इसे धारदार बनाने की जरुरत नहीं समझ में आती है.कबतक हम अपने भाई बहनों का लहू बहता हुआ देखते रहेंगे.आतंकी घटना के बाद जब एक घंटे के अंदर कोई गृह मंत्री तीन बार कपडे बदलता हो,उसे बैठको में हालत की समीछा कर त्वरित निर्णय लेने की सूझ भला कैसे हो सकती है.सत्ताधारियों को खुफिया एजेंसियों को विरोधी दलों के पीछे लगाने की बजाये, राष्ट्र की सुरछा में लगाना होगा. अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब आम लोगो को ही नहीं बल्कि हर उस शक्श को अपने खून से स्वतंत्रता की कीमत चुकानी होगी.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-5939309709289903465?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/5939309709289903465/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=5939309709289903465&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5939309709289903465'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/5939309709289903465'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/09/blog-post_15.html' title='नपुंसक नेतृत्व से हल नहीं हो सकता आतंकवाद'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-812017714113797331</id><published>2008-09-12T22:27:00.000+05:30</published><updated>2008-09-12T23:24:07.209+05:30</updated><title type='text'>हिंदी के प्रति दुराग्रह राष्ट्र का अपमान</title><content type='html'>पिछले दिनों मुंबई में जिस प्रकार से राज ठाकरे नामक तथाकथित राजनेता ने हिंदी बोले जाने को लेकर अमिताभ परिवार को अपमानित करने का प्रयाश किया वह निंदा योग्य है .हिंदी के ख्यात साहित्यकार के परिवार को जिस प्रकार से माफी मांगने को लेकर सार्वजनिक तौर पर बाध्य किया गया और अमितजी ने जिस उदारता से अपनी भावनाए प्रकट की ,यह हिंदी व हिंदुस्तान से सच्चा प्यार करने वाला ही एसा कर सकता है ,लुच्चो व लफंगों से निबटना भी हिंदी प्रेमी जानते है .हिंदी साहित्य के रचनाकारों को पूर्व में इससे भी ज्यादा प्रतारणा का शिकार होना पडा है लेकिन उन्होंने उफ तक नहीं की है .एसे लोगो के जिक्र से हिंदी साहित्य का इतिहास भरा पडा है .हिंदी सेवियों के परिवारवालों को कई जिल्लाते उठानी पड़ी है ,अपमान के घुट पीने पड़े है .वैसे भी कहा गया है की हिम्मते मरदा ,मददे खुदा .अमितजी के इस पुरे प्रकरण में जिस प्रकार की भूमिका निभाई है ,वे यहाँ भी बाजी मार गये है .लेकिन मेरी अपनी सोच है, प्रथमतः एसा अवसर प्रदान ही नहीं किया जाये ,न ही इसको लेकर कोई उतेजना पैदा की जाय ,लेकिन जब कोई गुंडा किसी भद्र व्यक्ति से उलझ ही जाने को तैयार हो तो उसे करारा जबाब दिया जाये ताकि भविष्य में फिर उसे एसा करने की हिम्मत ही न हो .पुरे प्रकरण पर हिंदी की रोटी खाने वालो का खामोस रह जाना बेहद दुखद है .हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है ,उसका अपमान अपने ही देश में हो ,और संबिधान के रखवाले चुप रहे ,यह नापंसुकता है .मुबई के पुलिस अधिकारी का यह कहना की मुबई किसी के बाप की नहीं है ,बिलकुल उचित है .क्या मराठी भाषी को उत्तर प्रदेश या बिहार में हिंदी नहीं बोले जाने को लेकर अपमानित या प्रतारित किया जाना उचित ठहराया जा सकता है .कश्मीर से कन्या कुमारी तक जो देश को एक नहीं समझता उन्हें यहाँ रहने का कोई अधिकार नहीं .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-812017714113797331?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/812017714113797331/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=812017714113797331&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/812017714113797331'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/812017714113797331'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/09/blog-post_12.html' title='हिंदी के प्रति दुराग्रह राष्ट्र का अपमान'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-1946062987990786944</id><published>2008-09-06T15:13:00.001+05:30</published><updated>2008-09-06T16:22:44.945+05:30</updated><title type='text'>बिहार में बाढ़</title><content type='html'>राष्ट्रीय आपदा की इस घडी में न जाने क्यों लोगो को जब भूमि विवाद चाहे वह सिंगुर का हो या अमरनाथ श्राइन बोर्ड का ,में उलझे देखता हु तो कुछ अजीब सा लगता है . क्या हम इतने संवेदना शून्य हो चुके है की जब देश में एक ओर लाखो की आबादी जीवन व् मृत्यु के दौर से जूझ रही है वैसे समय में हम अपने अपने स्वार्थ में लिप्त है .बिहार के बाढ़ प्रभावित जिलो में जाकर देखे कैसे हिन्दू मुसलमा एक साथ बैठ कर भोजन व् भजन कर रहे है .इस विपदा ने बड़बोले चेहरों को भी उजागर कर दिया है .खैरात में भीख दी जा सकती है ,लोगो की पीडा कम नहीं की जा सकती .बच्चे अनाथ हो चुके है ,कितनो का सिंदूर धुल गया है ,जीवन जीने का आधार छीन गया है यहाँ जो भी राहत सामग्री पहुच रही है उसे कोई सही तरीके से जरूरत मंदों तक पहुचाने वाला नहीं है .संकट के पल में हमने जीना सिखा है चाहे वह आतंकी घटनाये हो या प्राकृतिक आपदा लेकिन हमें धैर्य पूर्वक एक दुसरे का सहयोग तथा साथ देना भी सीखना होगा .कोसी की विनाशकारी लीला ने दो पीढियों बाद अपना रौद्र रूप दिखाया है .तब से अबतक नेपाल का रूप भी बदल चूका है .हमें अपने देश के नौनिहालों की चिंता करनी होगी अन्यथा याद रखे बड़े बड़े तानाशाहों व् हुक्मरानों को भी इतिहास भूलने में देर नहीं करता .जीवन की एक ही गति है सब को यहाँ सबकुछ छोड़ कर चले जाना है ,अपनी आदतों में सुधार नहीं लाये ,अपनी प्रवृत्यो को नहीं बदले तो इतना निश्चित मानिये की प्रकृति आपको स्वयम ही सुधार देगी .राष्ट्रीय संकट की इस घडी में संकट को वोट बैंक में बदलने अथवा इस में लूटपाट कर अपना घर भरने वालो सावधान हो जाये कही कोई है जो सबको देख रहा है . आइये , इस संकट को हम अवसर में बदल देने की कला सीखे .हम स्वयं में छिपी हुई मानवीय गुणों को विकसित करे .संकट की घडी में अफवाह फैलाने वालो से सावधान रहे .मीडिया भी खबरों की आपाधापी के बीच धैर्य बरते .जब चाहे बांध टूटने या फिर उसके नहीं टूटने की चर्चा न करे .डैमेज कंट्रोल के लिए जो भी बन पड़े किया जाना जरूरी है .राहत के पहुच रहे सामानों को सही हाथो तक पहुचाने में मदद करे .अफरातफरी की जो स्तिथि बनी हुई है उसे दूर करना होगा .आपदा के कारण उत्पन्न मनोवैज्ञानिक पहलू पर ध्यान देते हुए लोगो को उबरने में मदद करना होगा .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-1946062987990786944?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/1946062987990786944/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=1946062987990786944&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1946062987990786944'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/1946062987990786944'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/09/blog-post_06.html' title='बिहार में बाढ़'/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-7026856849327965016</id><published>2008-09-06T13:38:00.000+05:30</published><updated>2008-09-06T13:49:30.216+05:30</updated><title type='text'></title><content type='html'>क्या कहे बाढ़ का  जो सूरते हाल है वह बेहद पीडादायक है ,ज्यादातर समय अखबार के माध्यम से बाढ़ को लेकर सूचनाओ को  इन दिनों बिहार  सरकार व् आम जनता के बीच पहुचाने में बीत रहा है.सरकार तथा स्वयमसेवी संस्थाओ द्वारा राहत पहुचाने के प्रयास किये जा रहे है किन्तु सही व्यवस्था नहीं होने से अफरातफरी मची हुई है .बाते बहुत सी है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/1726112540987231155-7026856849327965016?l=balidanipatrakar.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/feeds/7026856849327965016/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=1726112540987231155&amp;postID=7026856849327965016&amp;isPopup=true' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7026856849327965016'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/1726112540987231155/posts/default/7026856849327965016'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://balidanipatrakar.blogspot.com/2008/09/blog-post.html' title=''/><author><name>कौशलेंद्र मिश्र</name><uri>http://www.blogger.com/profile/04841813169974429745</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='21' height='32' src='http://3.bp.blogspot.com/_YfUK6h9242o/TCtlM88Oj_I/AAAAAAAAADQ/CRg6yl-0do4/S220/DSC_0034.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-1726112540987231155.post-6079082814393658304</id><published>2008-08-29T13:05:00.003+05:30</published><updated>2008-08-29T13:55:09.315+05:30</updated><title type='text'>भूख से बिलबिलाते बच्‍चे,उजडने व पुन बसने की नियति</title><content type='html'>उत्‍तर बिहार के कोशी अचंल में कोशी की धारा ने महाप्रलय मचा रखा है, नेपाल के कुसहा के समीप बांध टूटने के फलस्‍वरूप सहरसा जिला के पतरघाट,सौर बाजार एवं सोनबरसा प्रखंड में बाढ का पानी प्रवेश कर गया है, साथ ही सुपौल, मधेपुरा,पूर्णियां सहित छह जिलों के सैकडों गांव कोशी की धारा में विलीन हो गये. बच्‍चे भूख से बिलबिला रहे है, पिछले 10 दिनों से टीलों,भवनों, सार्वजनिक स्‍थानों पर शरण लिये हुए लोगों की सुधि लेने वाला कोई नही है. बडी ही ह़दयविदारक द़श्‍य है. सहरसा में सैकडों शरणार्थी पहुंच रहे है. कोशी कॉलोनी,सुपौल के रहने वाले संजीव कुमार बताते है कि सुपौल के ग्रामीण 100 रुपये किलो चुडा व दूध डेढ सौ रूपये लीटर खरीदने को बाध्‍य है,नमक 50 रुपये, अमूमन तीन रूपये में मिलने वाला बिस्‍कूट 20 से 50 रुपये किलो मिल रहा है. ऐसे समय में कालाबाजारियों की पौ बारह है. बांढ की विभीषिका से पत्‍नी व परिवार को निकाल कर किसी तरह सहरसा तक पहुंचे अमित कुमार बताते है कि मात्र 15 किलो मीटर की दूरी तय करने के लिए उन्‍हें साढे तीन हजार रूपये नाव वाले को देना पडा है. कहीं कही तो नाव वाले पांच हजार रुपये वसूल कर रहे है. मानव जीवन की इससे बडी त्रासदी क्‍या होगी जब लाखों लोग कोशी के प्रलय से जुझ रहे हो वैसे में कुछ टुच्‍चे लोग अपने स्‍वार्थ के कारण उसमें भी लाभ का योग ढूढ रहे है. मधेपुरा की सुनीता देवी इस लिए उदास है कि बांध व उंचे टीले के सहारे, नाव व पैदल वह परिवार को लेकर निकली किंतू उसके बढू ससूर छूट गये. कई परिवारों के आय का जरिया बने मूक जानवर बकरी, गाय,भैस को उन्‍हें मुक्‍त करना पडा ताकि वे अपना शरण ढूढे. बांध के टूटने, उसकी समय समय पर मरम्‍मति नही किये जाने के प्रति घोर लापरवाही बरतने के लिए राज्‍य सरकार को किसी भी तरह माफ नहीं किया जा सकता. कोशी ने पहली बार अपनी जलधारा नहीं बदली है, किंतू कोशी को पुन 1826 की स्थिति में ले जाने के लिए सूबे की अफसरशाही व राजनेता पूर्णतया दोष्‍ाी है. केंद्रीय सहायता, राजकीय सहायता, राष्‍ट्रीय आपदा घोषित किये जाने, राहत व मुआवजे का खेल बिहार में एक बार फिर शुरू हो गया है. गुरूवार को प्रधानमंत्री,यूपीए अध्‍यक्षा, कई केंद्रीय मंत्री, मुख्‍यमंत्री,बिहार सहित कई राजनेता पूर्णियां में उपस्थित थे. प्रधान मंत्री ने मुख्‍यमंत्री की मांग के अनुरूप एक हजार करोड रुपये राष्‍ट्रीय आपदा राहत कोष्‍ा से देने की घोषणा कर दी, चुनावी वर्ष में कोई भी राजनेता व दल बाढ को लेकर कुछ भी करने का मौका नहीं छोडना  चाह रहे है. क्‍या इसके बावजूद इस समस्‍या के निदान के प्रति इनकी भावनाएं स्थिर है, क्‍या सचमुच बिहार को प्रत्‍येक वर्ष होने वाले बाढ की त्रासदी से मुक्ति मिल सकेगी, राहत व पुनर्वास के नाम पर राजनीति चमका कर सांसद व जनप्रतिनिधि बनने का मौका छोड विकास की ओर राजनेता सक्रिय हो सकेगा कई सारे प्रश्‍न अनुतरति है, कोशी क्षेत्र की जनता बार बार उजडने व बसने की नियति से निकल सकेगी यह कहना ब‍हुत ही मुश्किल है. वर्ष 93 में तत्‍कालीन मुख्‍य सचिव वीएस दूबे ने ऐसी परिस्थिति का पूर्व में आकलन करते हुए 18 दिनों तक कोशी के बांध पर कैम्‍प कर उसकी मरम्‍मति का कार्य किया था, रात 12 बजे उन्‍होने सिचाई मंत्री को सूचित किया था कि 'सर, वर्क इज ओवर, तब मंत्री ने मुख्‍यमंत्री लालू प्रसाद को उसी समय मुख्‍यमंत्री निवास में जाकर सूचित किया कि सर, उत्‍तर बिहार को बाढ की भयानक विपदा से बचा लिया गया. इस बार तो एनडीए के शासन काल में तो हद ही हो गयी, विकास व न्‍याय के शासन का राग अलापते नेता व नौकरशाह इस कदर निश्चित हो गये कि किसी को भी पिछले दो वर्षो से बांध की मरम्‍मति की नहीं सूझी. जब पानी का रिवाव शुरू हो गया तो बांध की मरम्‍मति को लेकर चहेते ठीकेदार की खोज शुरू हुई. तब तक तो बहुत देर हो चुकी थी. मात्र एक एज्‍यकुटिव इंजीनियर के सहारे पुरे क्षेत्र को भगवान भरोसे छोड दिया गया था. स्‍थानीय ग्रामीणों के भडकने को लेकर राज्‍य सरकार की यही बेत्‍लखी थी. बाढ के जाने माने वशिेषज्ञ टी प्रसाद कहते है कि अंग्रेजी शासनकाल होता तो शायद इतनी बडी समस्‍या नहीं होती,अंग्रेजी प्रारंभ से ही मूल समस्‍या का आकलन करते हुए चरणबद्व तरीके से काम कर रहे थे. बाद की सरकारों ने इस पर बहुत अधिक ध्‍यान नहीं दिया, अब भी समस्‍या को लेकर एक दूसरे पर दोषारोपण करने के सिवाय किसी के पास कोई अन्‍य विकल्‍प नहीं है. ऐसे ही परिस्थितियों में हिंदी साहित्‍य न
